Responsive Menu
Add more content here...
May 31, 2026
ब्रेकिंग न्यूज

Sign in

Sign up

नए साल में साथ खिचड़ी खाएंगे लालू-नितीश !

By Shakti Prakash Shrivastva on January 4, 2025
0 514 Views

                                                                                       शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

बिहार में विधानसभा चुनाव होने में हालांकि कुछ महीने शेष है लेकिन बिहार की सियासी नदी मे इन दिनों आई बाढ़ अपने चरम पर है। बिहार के सियासी आसमान में जितने भी छोटे-बड़े सितारें है उन सबकी गतिविधियां इनदिनों मीडिया की सुर्खियां बनी हुई है। बड़े नेताओं या बड़ी घटनाओं की बात करे तो बिहार में राज्यपाल का बदला जाना, मुख्यमंत्री नितीश कुमार का पहले राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन की बैठक में न जाना, प्रगति यात्रा में भगवान बुद्ध और अंबेडकर की तस्वीर के सामने हाथ जोड़ना, कुछ ही दिन बाद दिल्ली जाना, बीजेपी के आलानेताओं से बिना मिले वापस आना, आते ही नवनियुक्त राज्यपाल से मुलाकात करना जैसे कुछ घटनाक्रम ऐसे है जो इन दिनों मीडिया खासकर सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। सभी खबरों में एक ही कयास को सर्वाधिक प्राथमिकता दिया जा रहा है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री नितीश कुमार बीजेपी आलाकमान से नाराज है। यही वजह है कि जल्द ही वो एक बार फिर पलटी मारते हुए बीजेपी या उसके गठबंधन से अलग हो सकते है। कयास यह भी है कि नितीश खरमास बीतने का इंतजार कर रहे है। खरमास खत्म होते ही मकर संक्रांति पर एक बार फिर वो अपने पहले दोस्त, फिर दुश्मन, फिर दोस्त फिर दुश्मन और एक बार फिर दोस्त बनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल नेता लालू यादव के साथ बैठ खिचड़ी खा सकते हैं। और उनके पुत्र तेजस्वी यादव के साथ गलबहियाँ कर फिर सरकार बना सकते है।

सियासत और उसमें कयासबाजी का संबंध चोली-दामन का रहा है। लिहाजा जो दिखता है उसी से कयासबाजी का जन्म होता है। यह अलग बात है कि जरूरी नहीं कि जो दिखता है उसका अर्थ वही हो जिस पर कयास लगाया जा रहा है। खासकर इस तरह का प्रयोग सोशल मीडिया का प्रभाव बढ़ने के बाद से ज्यादा देखा जा रहा है। यह संभव है कि मुख्यमंत्री नितीश कुमार किसी निजी व्यस्ततावश प्रगति यात्रा नहीं छोड़ सके और अपनी जगह पार्टी के दूसरे नेता को एनडीए की बैठक में हिस्सा लेने भेज दिए। जिस अंबेडकर और बुद्ध की तस्वीर के सामने हाथ जोड़ने वाली नितीश की फ़ोटो वायरल हुई वो भी महज एक संयोग हो। क्योंकि मुख्यमंत्री जैसा विशिष्ट व्यक्ति जब जनसमूह के साथ यात्रा जैसे कार्यक्रम में हो तो जनसरोकारी बनने के लिए उसे ऐसा करना लाजिमी होता है। खासकर ऐसे समय में जब गृहमंत्री अमित शाह द्वारा राज्यसभा में भीमराव अंबेडकर पर दिए गए बयान से मामला काफी तूल पकड़ा हो और विपक्ष ने इसे मुद्दा बना लिया हो। दिल्ली जाकर बीजेपी नेताओं से मिलना इसलिए नहीं हुआ क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन पर उनसे पारिवारिजन से मिलकर नितीश वापस आ गए। जहां तक महामहिम राज्यपाल से मिलने का कार्यक्रम है वो भी औपचारिकता वश हुआ क्योंकि राज्यपाल के आगमन पर मुख्यमंत्री का उनसे मिलने का प्रोटोकाल है। जिसका अनुपालन मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने किया। लेकिन इन सबके बावजूद अगर बिहार में तख्ता पलट यानि सरकार गिरने-बनने की बात होगी तो यह तय मानिए कि खरमास समाप्ति पर ऐसी सूचना पुख्ता हो सकती है। इसके लिए जरूरी होगा कि मुख्यमंत्री नितीश कुमार एक बार फिर राजद के साथ हो और लालू प्रसाद यादव के साथ बैठकर साथ में मकर संक्रांति की खिचड़ी खाएं।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *