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May 26, 2026
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काँग्रेस के धोखे से सकते में INDIA गठबंधन!

By Shakti Prakash Shrivastva on May 20, 2024
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                                                                                     शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
साल भर पहले जब देश के सभी विपक्षी नेताओं ने मिलकर देश से बीजेपी को सत्ता से बेदखल करने के लिए एक गठबंधन बनाया। तब सबके जहाँ में एक ही बात थी कि किसी तरह से बीजेपी से निजात पाई जाए। इसके लिए बिहार के मुख्यमंत्री और तत्कालीन गठबंधन के करता-धरता नीतीश कुमार ने बाकायदा पटना, बेंगलुरू और मुंबई में बैठकें भी कराई। गठबंधन को मजबूती देने के साथ-साथ संयोजक और लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री का चेहरा कौन हो इस पर भी बात होती रही। गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं को जब यह लगने लगा कि इस तरह के मुद्दों से गतबंधन बनने से पहले ही टूटने की ओर बढ़ रहा है तो इस पर चर्चा को विराम दे दिया गया। अब जबकि गठबंधन के इलाकाई क्षत्रपो के चलते बीजेपी की सियासत काफी कमजोर सी लगने लगी है। विपक्षी ऐसा प्रचारित करने में लग गए है कि बीजेपी 400 कौन कहे 200 के लिए परेशान है। अब गठबंधन में शामिल पार्टियों के बड़े नेताओं के सपने उछाल मरने लगे है। सबको लग रहा है कि सरकार बनने की स्थिति से पहले ही अपना नाम प्रधानमंत्री के लिए चलाया जाए जिससे समय आने [पर उसे काटा जा सके। इसमें बाजी कांग्रेस ने मार ली। सीधे तौर पर तो नहीं लेकिन पार्टी के एक मुख्यमंत्री रहे कद्दावर नेता ने राहुल गांधी का नाम प्रधानमंत्री पद के लिए बड़े तरीके से उछाल दिया। इसे कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है।
अबयह चर्चा खास से आम होने लगी है कि क्या प्रमुख विपक्षी दलों के गठबंधन में सरकार बनाने की स्थिति आने पर काँग्रेस नेता राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री का चेहरा होंगे। राजनीतीक दल के नेता गठबंधन धर्म का लिहाज कर या मर्यादा के तहत भले ही प्रधानमंत्री कौन हो के मसले पर कुछ ना बोलते हो लेकिन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे भूपेश बघेल ने इस मुद्दे पर सलीके से अपनी बात रख सियासत गरमा दिया है। दरअसल गठबंधन में यही एक महत्वपूर्ण मुदा है, जो न सिर्फ सबसे संवेदनशील है बल्कि उस पर बोलने से लोग कतराते हैं। रायबरेली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इशारों-इशारों में राहुल गांधी को प्रधानमंत्री का चेहरा बता दिया। बघेल ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि आप सांसद नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री चुन रहे हैं। उनके इस बयान के बाद सियासी पारा हाई हो गया। गठबंधन में शामिल प्रमुख दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच में इस बात को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है कि आखिर बघेल ने प्रधानमंत्री के चेहरे के तौर पर राहुल गांधी को कैसे प्रोजेक्ट कर दिया। उत्तर प्रदेश में गठबंधन के सबसे मजबूत घटक समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव ने इस बाबत चुप्पी साध ली। उन्होंने कहा कि हम अपनी रणनीति का खुलासा नहीं करेंगे।

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