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क्या-क्या कर गया अतीक?

By Shakti Prakash Shrivastva on November 25, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

फरवरी महीने के अंत में हुआ प्रयागराज का शूटाउट माफिया डान अतीक अहमद के आतंकी साये में पले-फले आर्थिक साम्राज्य के ताबूत की अंतिम कील साबित हुआ। दिन दहाड़े हुए इस शूटाउट में पूर्व विधायक राजूपाल हत्या के मुख्य गवाह उमेश पाल और उसके दो सुरक्षाकर्मियों की हत्या हो गयी थी। घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज में मिले हमलावरों की पहचान होने के बाद हुई तफतीश में घटना के मूल में माफिया अतीक और उसके कुनबे की सीधी संलिप्तता उजागर हुई। हालांकि उस दौरान माफिया अतीक अहमद गुजरात की साबरमती जेल और उसका माफिया भाई अशरफ अहमद बरेली जेल में बंद थे। लेकिन जांच में मिल रहे सबूत इतने पुख्ता थे कि जांच एजेंन्सियो ने अपनी  जांच इसी पर केन्द्रित रखा। समय के साथ-साथ जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी कहानी परत दर परत एजेंसियों की शक के मुताबिक खुलती चली गईं। प्रमाणित हो गया कि इस पूरे घटनाक्रम में अतीक, उसके भाई अशरफ और उसके कुनबे का ही हाथ है। पुलिसिया कार्रवाई में अब तक कुछ हत्यारे पुलिसिया मुठभेड़ में मार गिराए गए। इसमें अतीक का बेटा असद भी शामिल था। जिसे एक साथी के साथ झांसी के निकट एसटीएफ की टीम ने मार गिराया। जबकि अतीक और अशरफ की जांच के दौरान ही पुलिसिया कस्टडी में कम उम्र अपराधियों ने गोली मारकर हत्या कर दी। इसके अलावा शूटाउट में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से शामिल इनामिया अपराधी गुडू मुस्लिम, अरमान, अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन, अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा जैसे कुछ अभी भी पुलिसिया पकड़ से दूर है। लेकिन जांच एजेंसियों द्वारा जब अतीक के आर्थिक ढांचे की जांच शुरू हुई तो उसमें एक से एक नए मामले सामने आने लगे। अतीक और उसके गैंग द्वारा वक्फ सम्पत्तियों पर अवैध कब्जे करने और उसे बेचने का मामला सामने आया। पिछले दिनों पूरामुफ्ती थाने में अशरफ की पत्नी जैनब सहित सात के विरुद्ध मामला दर्ज कर जमीन मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू की गई।

पता चला कि अतीक अहमद का पूरा आर्थिक साम्राज्य ही निजी और सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे से बना है। उसने वक्फ की संपत्तियां भी हड़प लीं। बहादुरगंज की बताशा मंडी में दो सौ वर्ष पुराना इमामबाड़ा हैदर रजा भी वर्ष 2015 में अतीक के कब्जे का शिकार हो गया। अतीक ने यूपी शिया वक्फ बोर्ड से संचालित इस इमामबाडे में अपने करीबी वकार रिजवी को पहले मुतवल्ली बनवाया और बाद में इमामबाड़ा को ढहाकर वहां 64 दुकानों वाला चार मंजिला शापिंग कांपलेक्स बना दिया। इमामबाड़ा को कांपलेक्स की पहली मंजिल के पिछले हिस्से में छोटे स्थान पर सीमित कर एक-एक दुकान को 20 से 30 लाख रुपये में बेच दिया। इस तरह से इमामबाड़ा पर कब्जा कर अतीक ने अपनी तिजोरी भर ली। मौजूदा सरकार ने इस प्रकरण की जांच कराने के बाद पूरे शापिंग काम्पलेक्स को ढहाकर मामला दर्ज कराया था। इतना ही नहीं अतीक अहमद ने अपने कार्यालय के निकट छोटी कर्बला पर भी अपने गुर्गों से कब्जा करा दिया था। वहां गिट्टी-बालू और सीमेंट की दुकाने खुलवाने के बाद वक्फ की जमीन पर गुर्गों का नाम चढ़वा दिया था। इस पर भी जांच चल रही है। कुल मिलाकर अतीक ने गुंडई-रंगदारी से उपजे रसूख का इस्तेमाल कमजोर लोगो और सरकारी सम्पत्तियों को हड़पने के लिए किया। लेकिन वर्तमान सरकार उसके इस अवैध साम्राज्य को ज़मींदोज़ करने पर आमादा है। सरकार इसके कब्जे वाली जमीनो को मुक्त करा वहाँ कमजोर लोगो के लिए आवासीय मकान बनवा रही है।

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