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गंगा तेरा पानी अमृत : बीएचयू के वैज्ञानिकों ने माना कोरोना में भी कारगर है ‘गंगाजल’!

By Shakti Prakash Shrivastva on September 13, 2021
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प्रयागराज, (संवाददाता)। हमारे देश में आदि-आध्यात्म युग से ही गंगाजल का महात्म्य है। धर्म की मुताबिक गंगा का जल अमृत के समान है। यही वजह है कि सनातनी संस्कार में इसे पूज्य माना गया। बीएचयू के वैज्ञानिकों की टीम ने भी अपने शोध में पाया है कि गंगा नदी के जल में 1300 प्रकार के बैक्टीरिया हैं जो बहुत सी संक्रामक बीमारियों से लड़ने में कारगर हैं। कोरोना महामारी के इलाज में भी यह कारगर हो सकता है। नमामि गंगे राष्ट्रीय मिशन ने बीएचयू के इन वैज्ञानिकों के प्रारंभिक शोध को आगे बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय को लिखा है। अगर आयुष मंत्रालय इससे सहमत होता है तो गंगाजल पर वैज्ञानिक शोध को और आगे बढ़ाया जा सकेगा।

गंगाजल पर शोध करने वाले बीएचयू के न्यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर विजयनाथ, प्रोफेसर अभिषेक पाठक तथा इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण गुप्ता ने रविवार को पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। प्रोफेसर मिश्रा ने बताया कि हमने गंगाजल का कोविड-19 पर असर  जानने के लिए 600 लोगों का क्लीनिकल डाटा तैयार किया है। इससे  पता चला कि गंगाजल का नियमित सेवन करने वाले लोगों में कोविड-19  का असर कम रहा और उनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट नेगेटिव आई। इस पर वैज्ञानिक दृष्टि से और अधिक शोध किए जाने की आवश्यकता है ।जो सरकार की मंजूरी के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कोविड-19 भी दवा नहीं है। दुनिया भर में तमाम तरीके के शोध हो रहे हैं इसलिए गंगाजल पर भी शोध होना चाहिए। क्योंकि गो मुख से निकलने वाले इसके जल में प्राकृतिक रूप से तमाम ऐसे फेक्ट होते हैं जो  कोविड-19 वायरस को खत्म करने में कारगर हो सकते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता अरुण गुप्ता की मुताबिक उन्होंने गंगाजल पर एक शोध पत्र राष्ट्रपति को भेजा था।  इस शोध पत्र के आधार पर नमामि गंगे ने आईसीएमआर को जांच करने के लिए कहा लेकिन वर्चुअल प्रेजेंटेशन के अलावा उन्होने कुछ भी नहीं किया। उन्होंने इसे लेकर के हाईकोर्ट में जनहित याचिका भी दाखिल की है जिस पर हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के तमाम संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

 

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