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एनडीए से फिर अलग होंगे नीतीश!

By Shakti Prakash Shrivastva on December 16, 2025
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एनडीए से फिर अलग होंगे नीतीश!

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

सियासत में कुछ भी स्थायी नहीं होता है। जो आज है वो कल नहीं रहेगा। यह मुहावरा एक बार फिर बिहार की सियासत में दिखने जा रहा है। एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी में पिछले दिनों जो बदलाव हुआ है उसका सीधा प्रभाव बिहार की सियासत पर पड़ने जा रहा है। ऐसा इसलिए लग रहा है क्योंकि जिस नितिन नवीन की वजह से कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच रिश्ते खराब हुए थे वही नितिन आज बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष बन गए हैं। जिनका भविष्य में बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनना तय है।

एक समय था जब नितिन बिहार में एक विधायक हुआ करते थे। उस समय पटना में इनके लगाए पोस्टरों के नाते बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच तल्खी इतनी बढ़ गई थी कि उस समय न केवल एक बहुचर्चित कार्यक्रम निरस्त हुआ था बल्कि बीजेपी और जेडीयू के रिश्ते भी टूट गए थे।

हुआ ये था कि 2009 में लोकसभा चुनाव के मद्देनजर एनडीए की तरफ से लुधियाना में एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया था। इसमें एनडीए के सभी घटक दल के नेताओं को और एनडीए के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रित किया गया था। इनमे बतौर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी शामिल होना था लेकिन नीतीश नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा नहीं करना चाहते थे। लेकिन स्व.अरुण जेटली और संजय झा के कहने पर वो कार्यक्रम में पहुंचे। संयोगवश जब नीतीश मंच पर चढ़ रहे थे उसी समय नरेंद्र मोदी भी पहुंचे। मोदी ने मंच पर ही लपक कर नीतीश का हाथ पकड़ ऊपर की ओर उठा दिया था। वहाँ मीडिया के कैमरों में ये तस्वीरें कैद हो गई। नीतीश को तत्काल आभास हो गया कि कुछ गलत हो गया।

रैली के बाद संजय झा के साथ कार से वापस जाते समय नीतीश कुमार ने संजय झा से अपनी नाराजगी जताई। कहा, ‘आपने मुझे फंसाया है। आप जानते थे कि क्या होने वाला है।  सब डेलिबरेट है, डिजाइन है, कल अखबार में वही फोटो छपेगा जो उस आदमी ने मेरा हाथ पकड़ के जबरदस्ती खिंचवाया। हुआ भी वैसा ही। अखबारों में वही फ़ोटो छपी। बाद में लुधियाना वाली घटना के लगभग साल भर बाद जून 2010 में पटना में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक आयोजित हुई। बैठक से पहले ही पटना की दीवारों पर बिहार में कोसी की बाढ़ से पीड़ित लोगों के लिए पांच करोड़ रुपये का महादान देने वाले गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताने के लिए पोस्टर लगाए गए थे। बड़े-बड़े पोस्टरों में वही तस्वीर लगी थी जो लुधियाना के कार्यक्रम में मंच पर मोदी और नीतीश एक-दूसरे का हाथ थामे खड़े हैं। इनको लगवाया था नितिन नबीन और रामेश्वर चौरसिया ने।

पोस्टर देखते ही नीतीश कुमार भड़क गए। उन्होंने बीजेपी नेताओं का अपने आवास पर होने वाला डिनर जिसका निमंत्रण पत्र तक बंट गया था उसे निरस्त करा दिया। इसके बाद बीजेपी-जेडीयू का गठबंधन बिहार में टूट गया था। हालांकि बाद में गठबंधन फिर से बना-टूटा, बना-टूटा और अब फिर से बना हुआ है। ऐसे में आज से लगभग पंद्रह साल पहले का वो सियासी दृश्य जिन्होंने देखा है वो अच्छी तरह से समझ सकते हैं कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर नितीन नवीन के अध्यक्ष बनने पर क्या प्रभाव पड सकता है। संभव है कि देश की सियासत में पलटूराम के नाम से मशहूर नीतीश कुमार एक बार फिर उचित अवसर देख पलटी मार लें। बहरहाल ये भविष्य के गर्भ में है।

 

 

 

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