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April 29, 2026
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पीएम पद से इस्तीफा देंगे मोदी !

By Shakti Prakash Shrivastva on July 18, 2025
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                                                                         शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह तीसरा कार्यकाल है। मोदी जब पहली बार 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने थे तो उस समय पार्टी संगठन में यह तय हुआ कि पार्टी में पिचहत्तर साल के उम्र पार चुके नेताओं को संगठन या सरकार के मुख्यधारा से अलग कर दिया जाएगा। नरेंद्र मोदी इसी साल सितंबर में उम्र की यह निर्धारित सीमा पार करने वाले हैं। ऐसे में अगर पार्टी आलाकमान द्वारा निर्धारित मापदंड का अनुपालन किया जाएगा तो सियासी हालात इस बात की चुगली कर रहें हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस साल के अंत तक अपने पद से इस्तीफा दे देंगे।

हालांकि इस बात के भी कयास सियासी गलियारे में लगाए जा रहे हैं कि नरेंद्र मोदी के बेहतर परिणामपरक कार्यों और देश की दुनिया में बढ़ती साख को देखते हुए संगठन आलाकमान द्वारा तय इस पैरामीटर को शिथिल किया जाए। जिससे मोदी के बेहतर स्वास्थ्य को आधार बनाकर देश को उनकी अपेक्षित सेवाएं और समय तक ली जाएँ। ऐसा पार्टी संगठन और सरकार में शामिल कुछ गिने-चुने लोगों को छोड़ दिया जाए तो अधिकांशतः इसके पक्षधर हैं।

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एक ऐसी संस्था है जिसे भारतीय जनता पार्टी का अघोषित मार्गदर्शक माना जाता है। पार्टी संगठन भी संघ की दिशा-निर्देशों की अवहेलना नहीं करती है। कहते हैं जब 2017 में बहुमत की सरकार उत्तर प्रदेश में बनने जा रही थी तो उस समय मुख्यमंत्री पद पाने वाले नेताओं की दौड़ में दूर-दूर तक योगी आदित्यनाथ का कहीं नाम नहीं था। लेकिन अंतिम क्षण में संघ के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए पार्टी ने योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री बनाया था। ऐसे में एक बार फिर संघ का दर्शन या मार्गदर्शन मोदी की राह में रोड़ा बंनता दिख रहा है। पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने सार्वजनिक जीवन में लोगों की रिटायरमेंट की उम्र को लेकर कुछ बातें कहीं हैं। उन्होंने नागपुर में संघ के विचारक मोरोपंत पिंगले की एक किताब के लोकार्पण के मौके पर कहा कि जब आप 75 साल के हो जाते हैं, तो इसका मतलब है कि अब आपको रुक जाना चाहिए और दूसरों के लिए रास्ता बनाना चाहिए। उन्होंने पिंगले का जिक्र करते हुए उनकी कही बात भी बताई जिसमें पिंगले ने एक बार कहा था कि अगर 75 साल के होने के बाद आपको शॉल से सम्मानित किया जाता है, तो इसका मतलब है कि अब आपको रुक जाना चाहिए, आप बहुत बूढ़े हो गए हैं, हट जाइए और दूसरों को आने दीजिए।

संघ प्रमुख के बयान को कई तरह से समझने वाले समझ रहे हैं। संघ प्रमुख स्वयं भी सितंबर में 75 साल के होने जा रहे है। ऐसे में उन्होंने अपने भविष्य की योजनाओं को ध्यान में रखकर ये बात कही है या वाकई उनका इशारा प्रधानमंत्री मोदी की तरफ भी था।

उनकी बातों से अटकलें लगाई जा रही हैं कि क्या वे अपने भविष्य के बारे में कुछ योजना बना रहे हैं। क्योंकि मोहन भागवत भी स साल सितंबर में 75 साल के हो जाएंगे। अब देखना यह है कि संघ प्रमुख ने जो उम्र की सीमा की बात कही है, वह सिर्फ एक आम बात थी या फिर संघ परिवार से जुड़े सभी लोगों को एक साफ संदेश देना चाहते थे। वहीं इसे बीजेपी से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी के लिए यह कड़वी सच्चाई है कि मोहन भागवत की बातों को आसानी से खारिज नहीं किया जा सकता है। हालांकि उनकी बातों के निहितार्थ का खुलासा अभी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन में दिख जाएगा। अगर वहाँ 75 साला नियम लागू हुआ तो यह तय मानिए कि साल के अंत तक मोदी को अपने पद से त्यागपत्र देना पड जाएगा।

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