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May 1, 2026
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किसानों के हितैषी ही बने दुश्मन !

By Shakti Prakash Shrivastva on March 21, 2025
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       शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

सियासत का अपना कोई स्थायी दीन-ईमान क्यों नहीं बन सका। कहीं न कहीं इसकी वजह उसका क्षण-क्षण बदलता स्वार्थ है। जो समय के साथ तेजी से बदलता रहता है। देश के बहुचर्चित किसान आंदोलन में भी एक घटना बीते दिनों हुई जो इसका जीता-जागता प्रमाण है। लगभग तेरह महीने तक चले इस आंदोलन को तेरह घंटे भी नहीं लगे समाप्त करने में और पंजाब-हरियाणा बार्डर पर चल रहे किसानों का जमावड़ा हट गया। पंजाब सरकार के बुलडोजर ने बार्डर पर लगे सभी बैरिकेटिंग हटा दिये। ऐसा महज इसलिए हुआ कि एक महत्वपूर्ण व्यक्ति के सपने को पूरा करना है।

पिछले वर्षों किसानों ने फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की केंद्र सरकार से मांगे रखी थीं। लेकिन सरकार द्वारा किसानों की मांगे नही मानी गयी लिहाजा कई किसान संगठनों की अगुवाई में किसान शंभू, खनौरी सहित लगभग आधा दर्जन बार्डरों पर धरना देने लगे। किसानों ने स्थायी ढांचा खड़ा कर पंजाब से हरियाणा-दिल्ली जाने वाले को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। उस समय की तत्कालीन दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने भी किसान आंदोलन को हवा देने का काम किया। लेकिन समय बदला अब दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन गयी। आम आदमी पार्टी की तरफ से दो बार लगातार दिल्ली के मुख्यमंत्री रह चुके पार्टी सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल तक को विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा। देश की सियासी कैनवास पर केंद्र की सियासत में बने रहने के लिए अरविंद केजरीवाल को विधानसभा नहीं तो लोकसभा या राज्यसभा की सदस्यता चाहिए थी। लोकसभा में तो अभी वक्त है लेकिन राज्यसभा पहुँच उनकी मंशा पूरी हो सकती है। लेकिन पार्टी कोटे के लिहाज से वहाँ भी निकट भविष्य में कोई सूरत नहीं बन रही थी। ऐसे में पार्टी के आला नेताओं ने लुधियाना पश्चिम विधानसभा के होने वाले उपचुनाव को लेकर रणनीति बनाई। पार्टी के राज्यसभा सांसद संजीव अरोड़ा को उम्मीदवार बना दिया गया। लुधियाना पश्चिम के विधायक गुरप्रीत बस्सी गोगी के निधन से रिक्त हुई सीट पर उपचुनाव होना है। पार्टी की हिडेन एजेंडे के तहत योजना ये है कि संजय के इस्तीफे से रिक्त सीट पर अरविंद केजरीवाल राज्यसभा पहुँच जाएँगे लेकिन संजय के लिए यह सीट जीतनी आवश्यक है। इस बाबत पिछले दिनो पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल लुधियाना पहुंचे। वहाँ स्थांनीय प्रभावशाली लोगों से मिलने पर यह एहसास हुआ कि बार्डर बंद होने से नुकसान झेल रहे इलाकाई आक्रोशित है और ऐसे में सीट जीतना पार्टी के लिए मुश्किल नही नामुमकिन है। फिर रणनीति बनी दिल्ली केन्द्रीय मंत्रियों से समझौते के लिए मिलने दिल्ली गए किसान नेताओं को पंजाब सीमा में घुसने पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। साथ में बुधवार को ही बार्डर पर जमे किसानों को बड़ी तादाद में पहुंची पुलिस ने घेर लिया। सरकार का बुलडोजर रास्ते को अवरुद्ध करने वाले स्थायी ढांचे को हटा दिया।

कुल मिलाकर इस आंदोलन को खाद-पानी देने वाले पार्टी ने ही अपने सपने पूरे करने के लिए किसानों के अस्थायी बने आशियाने को ज़मींदोज़ कर दिया। अर्श पर पहुँचने के पार्टी सुप्रीमो के निजी स्वार्थ के लिए बड़ी सियासत को अजाम दिया गया। देखना दिलचस्प होगा कि क्या इसके बावजूद पार्टी प्रत्याशी को वहाँ जीत मिलती है या नहीं। नही मिलने पर सुप्रीमो के सपने का क्या होगा यह अलग बात है।

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