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महापुरुषों से होगी योजनाओं की पहचान

By Shakti Prakash Shrivastva on March 7, 2025
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                                                                                       शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश सरकार यूँ तो कई क्षेत्र में कई रिकार्ड बना देश में अपने को अव्वल साबित कर चुकी है। ऐसे में यह प्रमाणित हो चुका है कि उत्तर प्रदेश अब बीमारू प्रदेश नहीं रह गया है। प्रयागराज में आयोजित सदी के पहले महाकुंभ में लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ का व्यापार इस परिभाषा को और पुख्ता करता है। इससे प्रदेश के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी विकास और सनातन स्थापना के पुरोधा के रूप में वैश्विक छवि बनी है। इससे उत्साहित राज्य की बीजेपी सरकार अब अपनी योजनाओं को देश के महापुरुषों के नामों पर क्रियान्वित करने जा रही है।
बीते दिनों बुधवार को समाप्त हुए विधानमंडल के बजट सत्र के दौरान बजट पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाओं की घोषणा की। लगभग दस की संख्या में ऐसी योजनाओं को उन्होने महापुरुषों को समर्पित करते हुए योजनाओं को उनके नाम से पहचाने जाने की वकालत की। आने वाले समय में ये सभी योजनाएँ इन्ही महापुरुषों के नाम से जानी-पहचानी जाएंगी। मुख्यमंत्री की मुताबिक सरकार की यह पहल उत्तर प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने और समरस समाज की स्थापना की दिशा में नई ऊंचाई प्रदान करेगी। इन योजनाओं के जरिये कृषि, उद्योग, शिक्षा और सामाजिक कल्याण के क्षेत्र में विकास होगा। साथ ही रोजगार सृजन, महिला सशक्तीकरण और बौद्धिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
इन योजनाओं को जिन महापुरुषों का नाम दिया गया है। उसमें इस बात का ध्यान रखा गया है कि उन महापुरुषों का व्यक्तित्व-कृतित्व कहीं न कही उस योजनाओं के कार्यक्षेत्र से जुड़ाव रखने वाला हो।
मसलन माता शबरी को रामकाल में भक्ति और समर्पण का प्रतीक माना गया था। उन माता शबरी के नाम पर कृषि मंडियों में कैंटीन और विश्रामालय की स्थापना से किसानों और श्रमिकों को सस्ते दर पर भोजन व आराम की सुविधा मिलेगी। सरकार ने अयोध्या में भी शबरी के नाम पर भोजनालय बनाया है।
अपने सख्त प्रशासकीय मिजाज के लिए इतिहास प्रसिद्ध देश के पहले गृहमंत्री सरदार बल्लभ भाई पटेल के नाम पर प्रत्येक जनपद में वहाँ की विशेषताओं और संभावनाओं को देखते हुए लगभग सौ एकड़ में पीपीपी मॉडल पर एक अनूठी योजना शुरू की जा रही है। इसमें हर परिवार से न्यूनतम एक व्यक्ति को रोजगार से जोड़ने के लिए जनपदीय आर्थिक क्षेत्र रोजगार जोन बनाया जाएगा।
ऐसे ही माता अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर श्रमजीवी महिला हॉस्टल, कामकाजी महिलाओं के लिए वाराणसी, मेरठ, प्रयागराज, गोरखपुर, कानपुर नगर, झांसी और आगरा में वर्किंग वुमेन हॉस्टल, स्वतंत्रता संग्राम की अमर वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर मेधावी बालिकाओं को स्कूटी देने की योजना, अपनी अक्खड़ प्रवृत्ति के लिए मशहूर संत कबीरदास के नाम पर 10 टेक्सटाइल पार्क की स्थापना, लखनऊ-हरदोई में निर्माणाधीन पीएम मित्र पार्क को भी संत कबीर को ही समर्पित किया गया है। सामाजिक समरसता के पक्षधर संत रविदास के नाम पर प्रदेश में आगरा समेत दो लेदर पार्क, लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री भारतरत्न चौधरी चरण सिंह के नाम पर सीड पार्क, नगरीय क्षेत्रों में भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर पुस्तकालय, भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर के नाम पर दलित, पिछड़े और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए छात्रावास सहित मिर्जापुर और सोनभद्र में बिरसा मुंडा के नाम पर दो जनजातीय संग्रहालय स्थापित करने की योजना बनाई है।
आज से कुछ दशक पहले तक यूपी बोर्ड पाठ्यक्रम में हमारे पूर्वज के नाम के किताब की ख़ासी अहमियत थी। अब सरकार उसी मनोवृत्ति के महत्व को महापुरुषों के नाम पर योजनाएँ संचालित करके दुबारा जनमानस तक पहुंचाना चाहती है।

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