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ऐसे क्यों बोल रहे संजय निषाद !

By Shakti Prakash Shrivastva on January 13, 2025
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                                                                                  शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

कहते है दंभ इंसान की प्रगति का सबसे बड़ा बाधक होता है। इसीलिए इससे दूर रहने की हिदायत दी जाती है। उदाहरण दिया जाता है कि रावण जैसे अति समर्थवान राजा का भी अंत उसके दंभ की वजह से ही हुआ। लेकिन आज के संदर्भ में खासकर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के मुखिया डॉ संजय निषाद की बात करे तो वो भी दंभ के शिकार हो गए है। हाल के दिनों में देखा जा रहा है कि डॉ संजय सत्ताधारी बीजेपी की सरकार में कैबिनेट मंत्री होने के बावजूद विरोध का कोई मौका चूकना नहीं चाहते हैं। बीते दिनों उन्होंने फिर एक बार ऐसा बयान दिया है जिससे उनके दंभ का मुजाहरा हो रहा है। उन्होंने कुछ ऐसा कहा कि बीजेपी में कुछ विभीषण लोग है जो सही सूचना योगी जी-मोदी जी को नहीं दे रहे हैं। वो चाहते हैं कि आरक्षण हो जाएगा तो डाक्टर बहुत मजबूत और बड़ा देवता हो जाएगा,अंबेडकर जैसा हो जाएगा। उसी चक्कर में 43 सीट भाजपा हारी थी। अपनी बड़ाई करते वो इतने पर नहीं रुके उन्होंने कहा कि उस समय मैंने बीजेपी-एनडीए को जीतवाया था जब सपा-बसपा एक थी। यहाँ संजय का दंभ उन्हे अंबेडकर होने तक का अहसास करा रहा है।

निषाद पार्टी यानि निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल के मुखिया है डॉ संजय निषाद। इन्होंने 2016 में इस पार्टी की स्थापना की थी। 2017 के विधानसभा चुनाव में कई दलों के साथ गठबंधन कर पार्टी ने 71 सीटों पर चुनाव लड़ा जिसमे एक सीट ज्ञानपुर पर उसे विजय मिली। इसके बाद 2018 के गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीट के लिए हुए उपचुनाव में सपा के साथ गठबंधन में गोरखपुर से डॉ संजय के बेटे प्रवीण निषाद ने चुनाव लड़ा। इसमें प्रवीण ने 1989 से अपराजेय रही बीजेपी को पहली बार शिकसस्त दी। 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रवीण ने बीजेपी का दामन थाम लिया और बतौर बीजेपी प्रत्याशी संतकबीर नगर से विजयी हुए। 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के साथ गठबंधन कर निषाद पार्टी ने 15 सीटों पर चुनाव लड़ा जिनमे 11 पर जीत मिली। यह अलग बात है कि 11 में 5 पर इनके प्रत्याशी बीजेपी के सिंबल पर चुनाव लड़े थे। 6 सीटे इनके हिस्से आई और यह प्रदेश में विधायक संखया बल पर चौथे नंबर की पार्टी बन गई। पार्टी मुखिया डॉ संजय निषाद स्वयं विधान परिषद सदस्य बने। इस तरह बीजेपी के साथ आने से डॉ संजय निषाद की पार्टी लगभग नौ साल की उम्र में ही छः विधायक और एक विधान परिषद सदस्य वाली पार्टी बन गई। लेकिन समय के साथ डॉ संजय निषाद में भी दंभ आने लगा। बीते दिनों आजमगढ़ के दौरे पर पहुंचे डॉ संजय निषाद के बयान सुन कोई भी चौक जाएगा। कि महज आठ-नौ साल वाली पार्टी का मुखिया अपने आपको अंबेडकर के नाम के साथ जोड़ने का साहस कैसे कर रहा है। अगर ऐसा कर रहा है तो उसकी वजह उसका दंभ है। इस दंभ पर समय रहते डॉ निषाद ने अंकुश नहीं लगाया तो वो दिन दूर नहीं कि ये दूध में मक्खी की तरह एनडीए गठबंधन से बाहर फेंक दिए जाएगे। क्योंकि बीजेपी खासकर आज की मोदी-शाह वाली बीजेपी का सहयोगियों को लेकर जो रवैया है पिछले दस साल में किसी से छुपा नहीं है। बेहतर हो कि संजय को इसका समय रहते एहसास हो जाए।

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