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May 2, 2026
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अतीक की मौत के बाद भी बढ़ रहा उसका ‘गैंग’

By Shakti Prakash Shrivastva on July 10, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                          अमूमन ऐसा होता है कि अपराधी चाहे कितना भी बड़ा अपराधी क्यों न हो लेकिन उसकी मौत के बाद उसका आपराधिक कुनबा खत्म हो जाता है। अगर किसी अपराधी के बाद भी अगर उसका गैंग अपराध जगत में पहले से और बड़ा होता है तो ऐसा अपवाद ही है। लेकिन प्रयागराज और आसपास के शातिर माफिया डान अतीक अहमद के मामले में ऐसा नहीं है। अतीक अहमद और उसके माफिया भाई अशरफ की 15 अप्रैल को प्रयागराज में पुलिस कस्टडी में हत्या कर दी गई थी। लेकिन उनकी हत्या हो जाने के बाद भी अब उसका कुनबा यानि आपराधिक गैंग जो पुलिस रिकार्ड में आई एस-227 के रूप में दर्ज है का आकार बढ्ने जा रहा है। बढ्ने का मतलब उसकी सदस्य संख्या में बढ़ोत्तरी होने जा रही है। और यह बढ़ोत्तरी गैंग को कोई करता धर्ता या अतीक का कोई वारिस नहीं कर रहा है बल्कि पुलिस कर रही है। अब यहाँ समझने वाली बात ये है की आखिर पुलिस उसके गैंग को बड़ा क्यो और कैसे कर रही है। वो यूं कि इन दिनों यूपी पुलिस और एसटीएफ की टीम माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ अहमद समेत उसके आपराधिक कुनबे का इतिहास-भूगोल पता करने में लगी हुई है। इस दौरान रोज-रोज नई-नई जानकारियाँ पुलिस को मिल रही है। उसी में जानकारी ऐसी भी मिल रही है कि कुछ लोग माफिया अतीक और अशरफ को आर्थिक सहयोग करते थे तो कुछ लोग उसके आर्थिक साम्राज्य को बढ़ाने में मदद करते थे। कुछ प्रत्यक्ष तो कुछ अप्रत्यक्ष तौर पर गैंग के लिए काम करते थे। इस तरह के लोगों को चिन्हित कर पुलिस ने इनकी एक सूची तैयार की है। जिन लोगो के माफिया अतीक और उसके माफिया भाई अशरफ को सहयोग करने संबंधी मिली जानकारी के पुख्ता प्रमाण मिल गए हैं उन्हे अतीक अहमद गैंग आई एस 227 का सदस्य मान लिया जा रहा है। पुलिस ने अभी तक ऐसे कुल 58 लोगो को चिन्हित किया है। जल्द ही इनके नाम गैंग की सूची में अधिकृत तौर पर शामिल कर लिया जाएगा।

अतीक अहमद पुलिस रिकार्ड वाले आईएस-227 गैंग का सरगना था। उसके इस गैंग में 121 सक्रिय सदस्य थे। इनमें वो लोग हैं जिन पर कई-कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। ये सभी मिलकर आपराधिक वारदातों को अंजाम देते थे। पुलिस पड़ताल में ही पता चला कि इनमें कुछ सदस्य ऐसे भी हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है।पड़ताल में ही यह भी खुलासा हुआ कि गैंग में सूचीबद्ध अपराधियों के अलावा भी कुछ ऐसे भी अपराधी हैं जो प्रत्यक्ष तौर पर भले साथ नहीं दिखते थे लेकिन वो अतीक के इशारे पर वारदात को अंजाम देते थे। ये अतीक के शूटरों के संपर्क में रहते थे। शूटरों के माध्यम से ही अतीक इन तक संदेश पहुंचाता था और फिर यह संदेश की मुताबिक आपराधिक वारदातें करते थे। इनही वजहों से अतीक, अशरफ और उसके बेहद खास शूटरों के जनपद की बाहर की जेलों में रहने के बावजूद अतीक का धंधा बेरोकटोक संचालित होता रहता था। इस तरह जल्द ही माफिया अतीक का गैंगचार्ट अपडेट करेगी।

पुलिस पड़ताल में ही यह खुलासा हुआ कि माफिया अतीक के कुछ करीबी शूटरों ने अपराधियों के छोटे-छोटे गैंग बना रखे हैं। इन छोटे गैंग में अधिकांशतः कम उम्र के आपराधिक प्रवृत्ति के लड़के हैं। यही कम उम्र वाले युवा गैंग के लिए जमीन, मकान कब्जाने से लेकर अवैध वसूली, रंगदारी मांगने तक की वारदातें करते थे। इसी छोटे-छोटे गैंग के सहयोग से ही जेलों में बंद रहते हुए अतीक और अशरफ का आपराधिक कृत्य कम नहीं हुए। वारदाते इनके नाम पर होती रही लेकिन किसी वारदात में किसी शूटर का नाम नही आया। हालांकि अतीक और अशरफ की हत्या भी इसी तरह के कम उम्र अपराधियों ने किया।  15 अप्रैल को प्रयागराज में दर्जनों पुलिसवालों और मीडिया की मौजूदगी में तीन युवा बदमाशों ने अत्याधुनिक हथियारो से गोली बरसाकर दोनों माफिया भाइयों की हत्या कर दी थी। हत्या करने के बाद तीनों ही हत्यारों ने भागने की बजाय अपने को स्वयम पुलिस के हवाले कर दिया। प्रयागराज शूटाउट जिसमें पूर्व विधायक राजूपाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल और उसके दो सरकारी सुरक्षाकर्मियों की दिन दहाड़े बदमाशों ने बम और गोलियों की बौछार कर मौत के घाट उतार दिया था। इस घटना के वक्त प्रदेश में विधानसभा सत्र चल रहा था। उसमें सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा प्रदेश की कानून व्यवस्था पर प्रश्न खड़ा करने पर मुख्यमंत्री तैश में आ गए। उनहों गुस्से में ही माफियाओं को मिट्टी मिलाने का ऐलान कर दिया। फिर क्या था। हरकत में आई पुलिस ने इस मामले में कई अपराधियों को गिरफ्तार किया तो कई को इंकाउंटर में मार गिराया तो कुछ के मकान पर बुलडोजर चलाया। फिलहाल प्रदेश में माफियाओ पर अंकुश लग रहा है। काफी हद तक कानून व्यवस्था भी ठीक ठाक है।

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