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कोरोना का असर : नहीं लगेगा अयोध्या का प्रसिद्ध सावनी मेला

By Shakti Prakash Shrivastva on August 10, 2021
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अयोध्या, (संवाददाता)। कोरोना महामारी की वजह से इस साल अयोध्या में प्रसिद्ध सावनी मेला का आयोजन नहीं किया जाएगा। साथ ही 11 अगस्त को लगने वाला मणिपर्वत मेला भी नही लगेगा। जिला प्रशासन ने यह निर्णय कोरोना के चलते लिया है। साधू-संतों ने भी प्रशासन का निर्णय मान लिया है। बकायदे प्रमुख महंतों ने अपना वीडियो संदेश जारी कर श्रद्धालुओं से अयोध्या में भीड़ न लगाने का अनुरोध किया है।

अयोध्या में स्थापित धार्मिक परम्पराओं के अनुसार सावन में मणिपर्वत झूला मेले का आयोजन किया जाता है। इसी मेले के साथ ही अयोध्या का प्रसिद्ध 12 दिवसीय सावन झूला मेला भी शुरू होता है। शुरुआती दिन मणिराम छावनी ,श्रीरामवल्लभाकुंज, दशरथ महल, रंगमहल, कनक भवन आदि स्थानों से धूमधाम से भगवान श्री राम की मूर्तियां गाजे-बाजे के साथ मणि पर्वत पर ले जाने की परंपरा रही है। वहां मणि पर्वत मंदिर के सामने लगे बरगद की शाखाओं पर भगवान झूला झूलते हैं। झूलन की मंदिरों में वापसी के बाद ही झूला मेले को शुरू करने की परम्परा है। 11 अगस्त को ही राममंदिर आंदोलन के महानायक अखिल व भारतीय दिगंबर अनी अखाड़ा के श्रीमहंत रामचंद्र दास परमहंस की पुण्यतिथि होने की वजह से दिगंबर अखाड़ा में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम को भी काफी संक्षिप्त रखा गया है। महाराजश्री को श्रद्धांजलि देने के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री व गोरक्ष पीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ भी इस कार्यक्रम में शामिल होते रहे हैं लेकिन इस बार सीएम के आगमन की संभावना कम है। मेले के महत्व को देखते हुए डीएम अनुज कुमार झा, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शैलेश पांडेय, पुलिस अधीक्षक नगर विजय पाल सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी राजेश कुमार राय समेत अन्य अधिकारियों ने मेला क्षेत्र का निरीक्षण कर लिया है। मणि पर्वत मेले के दिन पर्वत पर विराजमान भगवान सीताराम के दरबार का दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में जाते हैं। अयोध्या कोतवाली प्रभारी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि दर्शन पर रोक नहीं रहेगी पर भीड़ न हो, इसका हर जगह ध्यान रखा जाएगा। महापौर ऋषिकेश उपाध्याय का कहना है कि मेला अपार श्रद्धा का विषय है पर कोविड को लेकर सतर्कता में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रशासन के अनुरोध पर महंतों ने मणिपर्वत मेले के लिए मंदिरों से झांकियां न निकालने की बात मान ली है और पूरा सहयोग का भरोसा दिया है। कोरोना महामारी को देखते हुए प्रतीकात्मक झूलन उत्सव मंदिर में ही होगा। संत स्वामी राजकुमार दास की मुताबिक सावन मेला आनंद का उत्सव है। रोज शाम को भगवान का झूलन उत्सव, भवन सहित प्रमुख मंदिरों में होता है। इस बार कोरोना महामारी को देखते हुए प्रतीकात्मक झूलन मंदिर में होगा। भक्तों से भीड़ का हिस्सा न बनने की अपील की गई है। श्री दास ने बताया कि श्रीरामवल्लभाकुंज मंदिर में भगवान विराजमान होते हैं। पूरे 12 दिन तक भगवान की आरती और उनके सेवाएं की जाती हैं। श्रीरामवल्लभाकुंज का झूला चांदी और सोने से युक्त है। इसे अयोध्या का सबसे भव्य झूलन माना जाता है।

 

 

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