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इलाहाबाद हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी, कहा- गांवों में ‘राम भरोसे’ है चिकित्सा व्यवस्था

By Nikhil Pal on May 18, 2021
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प्रयागराज-यूपी के ग्रामीण इलाकों में तेजी से फैल रहे कोरोना संक्रमण को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चिंता जाहिर की है।इससे जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने योगी सरकार पर तल्ख टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश के गांवो, छोटे कस्बों मे चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति “राम भरोसे” है।कोर्ट ने कहा है कि यदि संक्रमण का पता लगाकर इलाज करने में हम विफल रहे तो हम तीसरी लहर को निश्चित ही आमंत्रण दे रहे हैं। कोर्ट ने ये टिप्पणी मेरठ के मेडिकल काॅलेज से लापता 64 साल के बुजुर्ग संतोष कुमार के मामले में सुनवाई करते हुए की है।

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा हलफनामा

जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और अजीत कुमार की खंडपीठ ने मेरठ के एक अस्पताल में आइसोलेशन वार्ड में भर्ती संतोष कुमार (64) की मौत से जुड़े मामले में यह टिप्पणी की।एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, वहां के अस्पताल कर्मचारी पीड़ित की पहचान करने में विफल रहे और शव का अज्ञात के रूप में अंतिम क्रियाकर्म कर दिया। संतोष 22 अप्रैल को अस्पताल के एक बाथरूम में बेहोश हो गए थे और उनकी मृत्यु हो गई।इसे कोर्ट ने घोर लापरवाही माना है। सरकार ने बताया कि दोषी पैरामेडिकल स्टाफ और डॉक्टर एक साल का इंक्रीमेंट रोक दिया गया है। कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य को इस संबंध में कड़ी कार्रवाई का निर्देश देते हुए हलफनामा मांगा है। कहा कि अगर मेरठ जैसे शहर के मेडिकल कॉलेज की यही स्थिति है तो छोटे शहरों और गांवों से संबंधित राज्य की पूरी चिकित्सा प्रणाली रामभरोसे है।

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