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October 9, 2026
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ये रिश्ता भी कोई रिश्ता है

By Shakti Prakash Shrivastva on August 1, 2025
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
भारतीय समाज में रिश्तों को जिस संस्कारित चौहद्दी से आच्छादित किया गया है। उसमें कहा जाता है कि रिश्ते ओढ़ने-बिछाने के लिए नहीं निभाने के लिए होते है। इस चश्में से अगर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अपने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच के रिश्तों को देखा जाए तो ये परिभाषा बेमानी लगने लगती है। क्योंकि जिस तरह से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत पर 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। उससे लगता है कि ऐसा कर ट्रम्प ने भारत से कौन सा रिश्ता निभाया है। क्योंकि अमेरीकी राष्ट्रपति के लिए हुए पिछले चुनाव के पहले अमेरिका में आयोजित हाऊदी मोदी और मोदी द्वारा अमेरिका में लगाए गए नारे अबकी बार ट्रम्प सरकार के नारों का क्या मतलब है। अगर आज देश का विपक्ष यह प्रश्न कर रहा है तो गलत कहाँ है क्योंकि यह तो आज हर देशवासी जानना चाहता है। सभी के जेहन में यह प्रश्न कौंध रहा है कि ये रिश्ता भी कोई रिश्ता है।
सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा इन दिनों ज़ोरों पर है कि आखिर अगर इतना कमजोर रिश्ता था तो मोदी जी को इसे इतना प्रोमोट नही करना चाहिए था। क्योंकि उन दिनों सब कुछ इसी स्वार्थ के नाते ही किया गया कि ट्रम्प की सरकार आ जाएगी तो देश की बल्ले-बल्ले हो जाएगी। जबकि हो रहा है बिलकुल उल्टा।
अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रम्प का व्यवहार कहीं से भी भारत के मित्र रूप वाला लग ही नहीं रहा है। बल्कि जो कर रहे है वो नितांत दुश्मन सा व्यवहार कर रहे है। मसलन ऑपरेशन सिंदूर को रोकने का ऐलान हो या पाकिस्तानी सेना प्रमुख को खास भोज देना या फिर आईएमएफ और विश्व बैंक से पाकिस्तान को मदद दिलवाना हो, ये सभी दुश्मन होने जैसे रिश्ते की तसदीक कर रहे हैं।
इतना ही नहीं जब अमेरिका ने अपने देश में अवैधानिक तरीके से रह रहे लोगों को देश छोड़ने का आदेश जारी किया था तो उस समय भारत के लोगों को उसने बेड़ियाँ में जकड़ कर सेना के विमान से भेजा था। उस समय भी उसने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रिश्ते का ख्याल नहीं आया। वो बिना बेड़ियों के भी भेज सकता था। कंबोडिया जैसे छोटे देशों तक को अपने विमान से अपने लोगों के लिए छूट दी गयी लेकिन भारत को वो भी छूट क्यों नहीं दी गयी। यहाँ तक कि अमेरिका ने भारतीयों को सेना के विमान से भेजा था जिसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बेहद अपमानजनक व्यवहार के रूप में देखा गया। पाकिस्तान के साथ पिछले दिनों हुए युद्ध की स्थिति में भी जिस तरह से अमेरीकी राष्ट्रपति ने युद्ध विराम की घोषणा की थी उसकी भी देश-दुनिया में थू-थू हुई। यह अलग बात है कि बाद में सरकार ने इसे गलत करार दिया और कहा कि युद्धविराम दोनों देशों के संबन्धित अधिकारियो की बातचीत के बाद किया था। न कि ट्रम्प के घोषणा के चलते हुआ। इस तरह के व्यवहार के बाद अब 25 फीसद का टैरिफ यह बताने के लिए काफी है कि आज ट्रम्प और मोदी जी के क्या संबंध है।

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