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खत्म हो गया ‘सैम’ का खौफ

By Shakti Prakash Shrivastva on March 31, 2024
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

कुछ दशकों पहले तक उत्तर प्रदेश और बिहार में सैम शब्द का खौफ था। इससे जुड़ी तिकड़ी का सामान्य जन में इतना भय था कि इनकी तूती बोलती थी। जरायम की दुनिया में किसी की हत्या से लेकर, बड़े ठेके सहित अत्याधुनिक हथियारों के जखीरे तक की उपलब्धि कराना इस तिकड़ी के लिए बेहद आसान था। इनकी ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इनसे  भारतीय खुफिया एजेंसियां भी बेहद सतर्क रहती थी। लेकिन पिछले गुरुवार को माफिया डान मुख्तार अंसारी की मौत के बाद इस तिकड़ी की अंतिम कड़ी भी टूट गई और इसके साथ ही इनके खौफ का भी अंत हो गया। बाहुबलियों की इस तिकड़ी का सैम नाम भी खुफिया एजेंसियों द्वारा ही दिया गया था। कुछ वर्ष पहले सैम के बारे में एक प्रतिष्ठित पत्रिका में विस्तृत विवरण भी छपा था।

अब यहाँ यह जानना भी जरूरी है कि सैम में मुख्तार के अलावा दो अन्य कौन थे और यह नाम क्यों पड़ा। दरअसल उत्तर प्रदेश और बिहार में पिछले तीन-चार दशकों के जरायम की दुनिया का इतिहास-भूगोल खंगालें तो बाहुबली शहाबुद्दीन, मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद का नाम शीर्ष पर दिखेगा। शहाबुद्दीन के नाम से S, अतीक अहमद के नाम से A और मुख्तार अंसारी के नाम का M मिलाकर SAM नाम दिया गया था। इन तीनों के जघन्य आपराधिक कृत्यों से शायद ही कोई इलाकाई अनभिज्ञ हो। मोहम्मद शहाबुद्दीन का प्रभाव पश्चिमी बिहार के सिवान जिले और उसके आसपास जबकि मुख्तार अंसारी का उसके क्षेत्र से लगे पश्चिम गाजीपुर और उसके आसपास था। अतीक अहमद का जरायमी साम्राज्य प्रयागराज और उससे लगे सीमावर्ती जिलों में अधिक था। लेकिन दशकों तक अपने इलाकों सहित सियासत में सिक्का जमाने वाले इन कुख्यात बाहुबलियों का भी अंत हुआ। राष्ट्रीय जनता दल के पूर्व सांसद और खतरनाक बाहुबली मोहम्मद शहाबुद्दीन का 2021 में कोरोना से मौत हो गई। इसके बाद बाहुबली अतीक और उसके माफिया भाई अशरफ अहमद की हत्या 2023 की अप्रैल में हो गई। अब  सैम का तीसरा और अंतिम सदस्य मुख्तार अंसारी था जो कई मामलों में सजायाफ्ता होने के चलते बांदा जेल में बंद था। जेल में ही बीते गुरुवार को उसकी हार्ट अटैक से मौत हो गई। इस तरह सैम के तीनों ही सदस्यों की मौत हो गई और इसके साथ ही अपने इलाकों में खौफ की बादशाहत चलाने वाले इन दुरदाँत अपराधियों के आतंक का भी अंत हो गया। इन तीनों को मुंबई के अंडरवर्ल्ड डान अबू सलेम का संरक्षण प्राप्त था। उसी के माध्यम से अत्याधुनिक हथियारों का जखीरा इन्हे मिलता था जिसके आधार पर ये खौफ का अपना जरायमी सिक्का चलाते थे। इन तीनों की मौत में एक दुर्लभ संयोग था। तीनों ही मौत के पहले सजायाफ्ता थे और जेलों में बंद थे।

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