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गोरखपुर : तांत्रिक के चलते जोखिम में बच्चे की जान, डाक्टरों ने आपरेशन कर बचाई जान

By Shakti Prakash Shrivastva on October 18, 2021
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गोरखपुर, (संवाददाता)। तेजी से एकाकीपन की तरफ सिकुड़ रहे समाज मे जहाँ विश्वास की इतनी कमी हो गयी है कि रिश्ते निभाए जाने के प्रमाण के बावजूद गैर के कहने पर इंसान भरोसा पर अविश्वास कर रिश्ते तोड़ देता है। समय आने पर जब सच से सामना होता है तो फिर वो उसी रिश्ते को दुबारा ढूँढने लगता है जो उसे नहीं मिल पता। ऐसे वास्तविक रिश्तों के अभाव में कहीं हम बाजार तो कहीं अंध विश्वास की दलदल तक में फँसते चले जाते हैं। ऐसा ही एक मामला देवरिया जिले के खुखूंदू थाना क्षेत्र के पिपरा मिश्र गाँव का इन दिनों सुर्खियों में है। जहां वास्तविक अपनों के अभाव में एक परिवार अपने बच्चे के मिट्टी खाने की आदत छुड़ाने के लिए किसी योग्य चिकित्सक से संपर्क करने की बजाय किसी के कहने पर तंत्रिकों के चक्कर में फंस जाता है जहां बच्चे की जान जोखिम में पड़ जाती है। बाद में चिकित्सकों के ही प्रयास से आपरेशन कर बच्चे की जान बचती है।

पूरा मामला जयराम के चौदह वर्षीय बेटे हरिकेश से जुड़ा हुआ है। बच्चे की मिट्टी खाने की आदत थी।  नजदीकी रिश्तेदार चिकित्सक से दिखाने की सलाह देते रहे लेकिन उनकी बात न मान जयराम तांत्रिक से इलाज कराने लगे। तांत्रिक ने आदत छुड़ाने के लिए बच्चे को प्लास्टिक से बनी टूथब्रश और लोहे की कील खिलाने की सलाह दी। परिवार वाले जबर्दस्ती बच्चे को ये चीजे खिलाते रहे। मिट्टी खाने की आदत में कोई सुधार नहीं हुआ बल्कि अब पेट में दर्द रहने लगा। राहत न मिलता देख परिजन बच्चे को ले मेडिकल कालेज गोरखपुर पहुंचे। जांच में बच्चे के पेट में इतनी बड़ी मात्रा में ब्रश और कील देख हैरान हो गए। एक्सरे रिपोर्ट से मिली इस जानकारी के बाद चिकित्सकों को परिजनों ने इस चौंकाने वाले राज का खुलासा किया। उन्होने बताया कि मिट्टी खाना छुड़ाने के लिए हम लोग गाँव के तांत्रिक के पास गए तो उन्होने कहा कि इसके लिए बच्चे को प्लास्टिक और लोहे की कील खिलानी पड़ेगी। जब बच्चा टूथब्रश और कील नहीं खाता था तो जबरदस्ती उसका मुंह खोलकर यह सारी वस्तुएं डाली जाती थीं। तब हम लोगों को यह अंदाजा नहीं था कि मिट्टी छुड़ाने के लिए अपनाई जा रही इस युक्ति से बच्चे की जान पर बन आएगी। मेडिकल कालेज में जिन चिकित्सकों की टीम ने आपरेशन किया उनमें सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डा. अशोक कुमार यादव, असिस्टेंट प्रोफेसर डा. दीपक सिंह, एनेस्थीसिया के असिस्टेंट प्रोफेसर डा. मेहताब आलम और उनके सहायक थे। डा. अशोक यादव की मुताबिक मरीज ओपीडी में पेट दर्द और उल्टी की शिकायत क साथ आया था। बच्चे की मां बता रही थी कि टूथब्रश और कील खा लिया है। जब एक्सरे करवाया गया तो आमाशय में सभी चीजें पड़ी दिखीं। जांच कराकर आपरेशन किया गया। बच्चे को खून की कमी थी इस कारण दो यूनिट ब्लड चढ़ाया गया। शनिवार शाम चार बजे आपरेशन शुरू हुआ। एक घंटे आपरेशन चला। यदि और देर होती तो कील आंत को फाड़कर बाहर आ जाती। बच्चे की पेट से 13 टूथब्रश और 1 लोहे की कील मिली।

 

 

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