Responsive Menu
Add more content here...
October 9, 2026
ब्रेकिंग न्यूज

Sign in

Sign up

नहीं जाएँगे दिल्ली…

By Shakti Prakash Shrivastva on November 4, 2023
0 550 Views

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                              दिल्ली देश की राजधानी है। लोकतान्त्रिक व्यवस्था को संचालित करने वाला समूचा तंत्र दिल्ली में ही है। इसलिए देश की आवाम के लिए दिल्ली महज एक महाशहर ही नहीं बल्कि उसका सपना भी है। आम हिन्दुस्तानी दिल्ली को नजदीक से देखना चाहता है। लेकिन आज वही स्वप्न सरीखी दिल्ली प्रदूषण के हाल से बेहाल है। सच मानिए जो आक्सीजन प्रकृति ने हमें मुफ्त में मुहैया कराया है। लेकिन दिल्ली में उस पर भी ग्रहण लग गया है। दिल्ली में वायु प्रदूषण का हाल ये है कि आज वहाँ सांस लेना मुश्किल हो रहा है। छोटे बच्चों को इसकी मार से राहत पहुंचाने के लिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पूरे दिल्ली में कक्षा-5 तक के स्कूल कुछ दिन के लिए बंद कर दिये हैं। ऐसे वही लोग जिनका सपना दिल्ली जाना था वही आज दिल्ली जाने से कतरा रहे हैं। कह रहे हैं नहीं जाएँगे दिल्ली। जान है तो जहान है। गोरखपुर के समाजसेवी शर्देंदु पाण्डेय को रविवार को हेल्थ चेक अप के लिए दिल्ली जाना था। यह स्थिति देख उन्होने जाना केंसिल कर दिया। उनका मानना है कि वापसी में बीमारी लेकर लौटने से बेहतर है कि हालात बेहतर होने का इंतजार कर लिया जाये। ऐसे न जाने कितने लोगों ने देशभर में अपनी योजनाओं में बदलाव किया होगा यात्राएं केंसिल की होंगी।

ऐसे में मशहूर गीतकार गुलजार की वो लाइने याद आती हैं जिसमें उन्होंने लिखा है कि सांस लेना भी कैसी आदत है…लेकिन आज के संदर्भ में वही आदत आफत बनती नजर आ रही है। खासकर दिल्ली के संदर्भ में। आज दिल्ली और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण का आलम ये है कि मानव जीवन के लिए आक्सीजन का जो आवश्यक सुरक्षा मानक है उससे 33 गुना ज्यादा प्रदूषित स्थिति बन गयी है। समूचे इलाके की हवा में जहर घुल चुका है। आज कई दिनों बाद भी आसपास के अधिकतर इलाकों का एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स (AQI) 400 से ज्यादा है। लगातार पांचवें दिन शनिवार को भी आसमान में कोहरे जैसा धुंध की एक घनी परत छाई हुई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन WHO की स्‍टैंडर्ड सीमा से PM2.5 की मात्रा लगभग  80 गुना ज्यादा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि दिल्‍ली का प्रदूषण कितने घातक स्तर पर पहुँच चुका है। इस विधा विशेष के जानकारों की मानें तो इस स्थिति से तीन-चार दिनों तक राहत मिलने के आसार नहीं है। इस स्थिति की वजह समान्यतया पराली जलाना माना जा रहा है जबकि सिर्फ ऐसा नहीं है बल्कि पराली जलाने के साथ-साथ मौसमी स्थितियों की वजह से भी प्रदूषण हो रहा है। शुक्रवार को दिल्‍ली में एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स AQI 475 तक पहुंच गया था। इस स्तर का एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स इससे 2021 के नवंबर महीने में हुआ था।  उस समय 12 नवंबर को एयर क्‍वालिटी इंडेक्‍स AQI 471 पहुंच गया था।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के क्षेत्रीय मौसम पूर्वानुमान केंद्र (RWFC) के वैज्ञानिक और प्रमुख कुलदीप श्रीवास्तव की मुताबिक आने वाले दो दिनों तक फिलहाल हवा की गति में कोई खास बदलाव की उम्मीद नहीं है। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत आने वाले वायु गुणवत्ता प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के अनुसार, वायु गुणवत्ता में मामूली सुधार होने की संभावना है, लेकिन 6 नवंबर तक यह ‘गंभीर’ श्रेणी में बनी रहेगी। AQI के अगले छह दिनों तक गंभीर से बहुत खराब श्रेणी में रहने की संभावना है। एंटी-साइक्लोनिक सर्कुलेशन अस्थायी रूप से भी चक्रवाती सर्कुलेशन में बदल सकता है। पंजाब से आने वाली हवाओं की दिशा भी बदलने की उम्मीद है। इन सबके परिणामस्वरूप प्रदूषकों का फैलाव हो सकता है। ऐसे में राहत मिल सकती है। वैसे तो ऐसी स्थिति से उबरने के लिए बारिश मुफीद होती है। लेकिन इस आगामी पश्चिमी विक्षोभ घटना के दौरान दिल्ली या आसपास के इलाकों में बारिश की उम्मीद नहीं है। लेकिन ऐसा माना जा सकता है कि किसी तरह के अन्य बदलाव की स्थिति में 8 नवंबर से सुधार की उम्मीद की जा सकती हैं।

गुरुवार को दोपहर में आनंद विहार क्षेत्र में प्रदूषण की स्थिति ये थी कि प्रति घंटा PM2.5 का स्तर मानकों से 33 गुना ज्‍यादा बढ़ गया था। इस समय 1,985 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सांद्रता दर्ज की गई। जबकि यह मात्रा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की सुरक्षित गाइडलाइन से 132 गुना ज्यादा है। ऐसे में वाकई आम देशवासियों के लिए यह विचारणीय है कि दिल्ली जाएँ या नहीं।

 

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *