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वाह रे योगी : जन्माष्टमी में गोरखपुर से सुबह पूजा कर के गए और रात में पूजा करने फिर वापस आ गए

By Shakti Prakash Shrivastva on August 19, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

विचारक भले ही राजनीति और आध्यात्म को अलग-अलग तरीके से पारिभाषित करते हों लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इन दोनों के प्रति अपना अलग नजरिया है। वे हर दिन हर पल इन दोनों को यानि राजनीति और आध्यात्म को न केवल एक ही चश्मे से देखते हैं बल्कि इनके आपसी सामंजस्य का अनूठा उदाहरण भी समय-समय पर प्रस्तुत करते रहते हैं। पहले जब ये सांसद हुआ करते थे तब तो नही लेकिन जबसे वो मुख्यमंत्री हुए, शुरुआत में इनके बारे में लगातार ये कयास लगाए गए कि गोरखनाथ मंदिर के आध्यात्मिक क्रियाकलापों और प्रदेश की राजनीतिक गुणा-गणित में तालमेल बिठाना एक महंत के लिए बहुत आसान नहीं होगा। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया योगी आदित्यनाथ ने ऐसे सभी कयासबाजों के सारे कयास एक-एक कर गलत साबित करते गए। इसी बार कोरोना की वजह से लगभग दो वर्षों बाद गोरखनाथ मंदिर में अपने परंपरागत रिवाज में श्री कृष्ण जन्मोत्सव का पर्व मनाया जाना था। लेकिन सुबह-सुबह उन्हे अपने राजनीतिक-प्रशासनिक कर्तव्यों के निर्वहन के क्रम में गोरखपुर से बलिया फिर मथुरा फिर लखनऊ जाना था। मथुरा-वृंदावन में जन्मोत्सव कार्यक्रम मे शामिल होने के बाद उन्हे लखनऊ में भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव में शामिल होना था। उन्होंने एक बार फिर राजनीतिक और आध्यात्मिक कर्तव्यों में आपसी सामंजस्य का अनूठा उदाहरण पेश करते हुए न केवल सभी प्रशासनिक, राजनीतिक निहितार्थ वाले सभी कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन किया बल्कि अपने महंत पद से जुड़े आध्यात्मिक गतिविधियों का भी बेहतर निर्वहन किया। उन्होंने शुक्रवार को अपनी दिनचर्या की शुरुआत अलसुबह मंदिर परिसर स्थित गौशाला में गौसेवा से करते हुए अपने ब्रह्मलीन गुरुओं की पूजा-अर्चना के बाद राजनीतिक कर्तव्यों के निर्वहन हेतु करीब नौ बजे हेलीकॉप्टर से बलिया के लिए निकल गए। लगभग ढाई घंटे बाद 11.15 बजे बलिया से गोरखपुर एयरपोर्ट वापस पहुंचे और फिर आगरा एयरपोर्ट के लिए रवाना हो गए। वहाँ से मथुरा-वृंदावन में आयोजित जन्माष्टमी आयोजन में शिरकत की। उसके बाद शाम से देर शाम तक लखनऊ स्थित रिजर्व पुलिस लाइन में आयोजित श्रीकृष्ण जन्मोत्सव में शामिल हुए। दिनभर सारे पूर्व निर्धारित क्रियाकलापों को अंजाम देते हुए देर रात वापस गोरखपुर पहुंचे और रात्रि में गोरखनाथ मंदिर परिसर में आयोजित जन्माष्टमी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस तरह एक ही दिन में सूबे के पूर्वी हिस्से से लेकर पश्चिमी हिस्से में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होते हुए अपने कर्मस्थली गोरखपुर में आयोजित लगभग तीन दशकों की परंपरा के निर्वहन के लिए पहुंचना योगी आदित्यनाथ जैसे योगी के ही बूते की बात है। पूजा करके सुबह गोरखपुर से जाना और रात में पूजा के लिए फिर वापस आना उनके आध्यात्मिक समर्पण का परिचायक है। जानकारों की मुताबिक उनके अंदर ऐसी अनूठी ऊर्जा उनके माता-पिता और गुरु के आशीर्वाद के साथ-साथ उनकी व्यक्तिगत तपस्या का प्रतिफल है। उनकी यही क्षमता और दक्षता उन्हे आज न केवल आध्यात्मिक क्षेत्र बल्कि राजनीतिक क्षेत्र में भी अपने समकक्षों से अलग करती है।

 

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