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UP-PWD तबादले में भ्रष्टाचार : सवाल उठाते जवाब, OSD पर गिरी गाज

By Shakti Prakash Shrivastva on July 18, 2022
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पूर्वाञ्चलनामा डेस्क

इसमें कहीं कोई दो राय नही है कि उत्तर प्रदेश बड़ी तेजी से कई दशकों से बिगड़ी अपनी छवि सुधार रहा है। इसमें बहुत बड़ा योगदान मौजूद योगी आदित्यनाथ सरकार का है। जीरो टालरेन्स के नीति के तहत आगे बढ़ रही सरकार के कदम भी आए दिन पकड़े जा रहे विभागीय भ्रष्टाचार और घोटालों की वजह से रुक जा रहे हैं। खासी मशक्कत उसके खुलासे सहित कार्रवाइयों तक में करनी पड़ रही है। अभी हालिया मामला पीडब्ल्यूडी और स्वास्थ्य विभाग में हुए तबादले को लेकर सुर्खियां बटोर रहा है। पीडब्ल्यूडी में हुए तबादलों का मामला जब गरमाया तो मुख्य सचिव ने इसपर तत्काल जांच बैठा दी। मामला मुख्यमंत्री तक पहुंचा। जांच रिपोर्ट आने पर जो कार्रवाइयाँ हुईं। उन कार्रवाइयों के रूप में घोटाले का जो जाँचोपरांत परिणाम दिखा वो खुद ही कई सवाल खड़े कर रहा है। जांच के बाद तबादले के पूरे मामले में पहली गाज गिरी है पीडब्ल्यूडी मंत्री जीतिन प्रसाद के ओएसड़ी अनिल कुमार पाण्डेय पर। श्री पाण्डेय मूलतः केन्द्रीय उपभोक्ता मामले और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में अवर सचिव रहे है। इन्हे प्रतिनियुक्ति पर प्रदेश सरकार में तैनात किया गया था। सचिवालय प्रशासन विभाग ने सोमवार को उन्हें कार्यमुक्त करते हुए उनके मूल विभाग में वापस भेजने संबंधी आदेश भी जारी कर दिए हैं। इसके अलावा श्री पांडेय के खिलाफ सतर्कता जांच और अनुशासनिक कार्रवाई की सिफारिश भी कर दी गई है। इनके ऊपर प्रथम दृष्ट्या विभागीय तबादलों में भ्रष्टाचार में संलिप्तता का आरोप है। सरकार की इस कार्रवाई पर अब सवाल भी उठने लगे हैं। लखनऊ के सत्ताई गलियारों में इस बात की खूब चर्चा हो रही है कि क्या मंत्री का विशेष कार्याधिकारी यानि ओएसड़ी बिना मंत्री की सहमति के भी कोई आदेश-निर्देश करने का साहस कर सकता है। अभी तक ऐसा सामान्यतया देखने में नहीं आता है। ऐसा माना भी जाता है कि ओएसड़ी महज मंत्री के दिशा-निर्देशों के अनुपालन का जिम्मेदार होता है। खासकर तबादले आदि में बिना मंत्री की सहमति के कोई आदेश जारी करने का दुस्साहस कोई ओएसड़ी नहीं कर सकता। कहीं न कहीं मंत्री की सहमति लेता है। लेकिन जिस तरह ओएसड़ी पर कार्रवाई हुई है उससे प्रशासन पर कई तरह के सवाल खड़े होने लगे है। मुख्यमंत्री की बेदाग छवि पर भी इस तरह की कार्रवाइयाँ से दाग लगने लगेंगे। सूत्रों की मुताबिक सचिवालय प्रशासन विभाग के विशेष सचिव अरुण प्रकाश की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। इस आदेश से ऐसा जाहिर होता है कि श्री पाण्डेय प्रथम दृष्ट्या सिद्ध दोषी माने जा रहे है।

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