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October 8, 2026
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बीजेपी के नए सियासी प्रयोग की ‘रेखा’

By Shakti Prakash Shrivastva on February 26, 2025
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                                                                                           शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

देश की सियासत का इतिहास इस बात का साक्षी है कि बहुत लोकप्रिय और चर्चित चेहरे को ही किसी राज्य में मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिलता रहा है। लेकिन समय के साथ-साथ बदलते परिवेश में अब ऐसा नहीं रह गया है। खासकर आज की मोदी-शाह और नड़ड़ा वाली बीजेपी सियासत में नित नए प्रयोग की हिमायती है। दिल्ली में मुख्यमंत्री पद पर ताजपोशी किए जाने में भी पार्टी ने हाल के अपने प्रयोगों के ही क्रम में किसी चर्चित या लोकप्रिय राजनेता को बिठाने की जगह एकदम नए और सियासत में नवागंतुक रेखा गुप्ता को अवसर दिया है।  रेखा गुप्ता दिल्ली विधानसभा की पहली बार चुनी गई विधायक है। जबकि इस पद के लिए मनोज तिवारी, प्रवेश साहब सिंह वर्मा, कपिल मिश्रा सरीखे कई लोकप्रिय और चर्चित नेताओं की दावेदारी थी।

हालांकि ऐसा नहीं है कि बीजेपी ने ऐसा पहली बार प्रयोग किया है। इसके पहले भी हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इस तरह के प्रयोग किया जा चुका है। हरियाणा में अनिल विज जैसे कई दिग्गज चेहरों को नजरअंदाज कर पार्टी ने नायब सिंह सैनी को मूखयमन्त्री बनाया था। इसी तरह मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान सरीखे प्रबल दावेदार की बजाय मोहन यादव को मौका दिया। ऐसा ही कुछ राजस्थान में भी प्रबलतम दावेदार वसुंधरा राजे की बजाय भजनलाल शर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया। इस तरह प्रयोगों के साथ-साथ ही पार्टी अपने सियासी उद्देश्यों को भी साधने का कोई मौका नहीं गँवाती है। जैसे रेखा गुप्ता को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाकर पार्टी ने एक तीर से कई सियासी निशाने साधने का काम किया है।

दिल्ली में पार्टी के भविष्य की सबसे बड़ी बाधा आप प्रमुख अरविन्द केजरीवाल जिस क्षेत्र हरियाणा के जींद से आते है वही की रेखा गुप्ता को इस पद पर बैठा कर पार्टी ने अपने कट्टर समर्थक वैश्य समाज को प्रतिनिधित्व दिया है। इसके अलावा बीजेपी शासित किसी राज्य मे कोई महिला मुख्यमंत्री नहीं थी। इससे यह संदेश भी था कि पार्टी एक तरफ महिला आरक्षण और उसके सम्मान की बात करती है। दूसरी तरफ कही उसे मौका नहीं देती है। लिहाज रेखा के जरिए यह दाग भी धूल गया। रेखा तीन बार पार्षद और दक्षिणी दिल्ली नगर निगम की मेयर भी रह चुकी है। रेखा छात्र राजनीति से आई है। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ की अध्यक्ष रही है लिहाजा युवाओ और छात्रों के बीच बीजेपी की राह आसान करेंगी।

इस तरह पार्टी ने सियासी प्रयोग के तहत रेखा गुप्ता को मुख्यमंत्री तो बना दिया है। लेकिन अब रेखा के सामने बतौर मुख्यमंत्री आम आदमी पार्टी की चुनौतियों से पार पाने के अलावा एक ऐसी बड़ी रेखा खींचना है जिससे पार्टी का सत्ताईस साला बनवास जैसी स्थिति की पुनरावृत्ति न हो सके। हालांकि ऐसा करना बहुत आसान नहीं है रेखा के लिए।

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