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October 9, 2026
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बीजेपी के लिए अछूत क्यों हो गए वरुण!

By Shakti Prakash Shrivastva on April 12, 2024
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

नुसरत फतह अली खान ने दशकों पहले एक गीत गया था जिसके बोल थे पल भर में कैसे बदलते हैं रिश्ते

अब तो हर अपना बेग़ाना लगता है….आज यह गाना पीलीभीत से बीजेपी के निवर्तमान सांसद वरुण गांधी की स्थिति पर सटीक लगता है। पहले के चुनावों में पार्टी के स्टार प्रचारक रहे वरुण गांधी आज के संदर्भ में पार्टी के लिए अछूत लगने लगे हैं। इस बार पार्टी ने उन्हे अपना उम्मीदवार भी नहीं बनाया है। पीलीभीत से उनकी बजाय उत्तर प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री मंत्री जितिन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया गया है। शाहजहांपुर निवासी जितिन प्रसाद कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे जितेंद्र प्रसाद के पुत्र हैं। वैसे तो वर्षों से वरुण गांधी के तेवर पार्टी की नीतियों की अवहेलना करते दिख रहे थे। इसलिए ऐसा कयास भी लगाया जा रहा था कि उन्हे पार्टी संभव है कि इस बार अपना उम्मीदवार न बनाए। ठीक वैसा ही हुआ उन्हे प्रत्याशी नहीं बनाया गया। लेकिन जिस तरह से मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पीलीभीत में आयोजित चुनावी सभा मे वरुण गांधी को दूर रखा गया। मंच पर भी कहीं नहीं दिखे। जबकि बरेली के निवर्तमान सांसद संतोष गंगवार मौजूद रहे। उससे ऐसा लग गया कि पार्टी के लिए अब वरुण गांधी उपयोगी नहीं रह गए हैं। क्योंकि बेशक वरुण पार्टी के उम्मीदवार नहीं है लेकिन पीलीभीत लोकसभा सीट के निवर्तमान बीजेपी सांसद तो हैं ही। लिहाजा सियासी मर्यादा और सियासी मंच से जनता में एकजुटता का संदेश देने के लिए भी ऐसा चलन है कि निवर्तमान जनप्रतिनिधि को मंच पर स्थान दिया जाता है। अगर निवर्तमान प्रतिनिधि ने पार्टी छोड दी है तो बात दीगर है।

मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पार्टी प्रत्याशी के समर्थन में चुनावी सभा को संबोधित किया। अपने सम्बोधन में उन्होंने तुष्टीकरण की राजनीति को लेकर सपा और कांग्रेस पर निशाना साधा। प्रधानमंत्री ने तराई की सियासी जमीन से सिख मतदाताओं को भी साधने का प्रयास किया। पीलीभीत में प्रधानमंत्री मोदी की पहली चुनावी सभा में न केवल निवर्तमान सांसद वरुण गांधी गायब रहे बल्कि किसी नेता की जुबान से उनका जिक्र भी नहीं हुआ। पार्टी के पोस्टर-बैनर से भी वरुण गांधी की तस्वीर पूरी तरह नदारद रही।

वरुण गांधी और उनकी माँ मेनका गांधी की कर्मस्थली रही पीलीभीत में 35 वर्ष में यह पहला मौका है जब इन दोनों में से कोई भी मैदान में नहीं है। अपने टिकट कटने पर वरुण गांधी ने अपने लोकसभा क्षेत्र की जनता के लिए एक खुला पत्र लिखा था। इस भावुक पत्र में मां का हाथ पकड़े तीन साल के बच्चे की एक कहानी का जिक्र था।

इसके बाद से यह कयास लगाए जा रहे थे कि बीजेपी के चुनाव प्रचार अभियान में वरुण गांधी पीलीभीत जरूर आएंगे। उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री योगी के प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन में वरुण गांधी यहां पहुंचेंगे लेकिन तब भी लोगों को निराशा ही हाथ लगी थी। अब प्रधानमंत्री मोदी की चुनावी सभा से भी वरुण गांधी को दूर रख पार्टी ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

 

 

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