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August 9, 2026
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योगी के रहते नहीं होगा यूपी का बंटवारा !

By Shakti Prakash Shrivastva on February 4, 2025
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                                                                     शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

उत्तराखंड के उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद से ही लगातार प्रदेश के और विभाजित होने की खबरें गाहे-बेगाहे मीडिया की सुर्खियां बनती रही है। लेकिन वाकई प्रदेश का और विभाजन होगा कि नहीं इस पर कभी ठोस खबर सुर्खियां नहीं बन सकी। लेकिन महाकुंभ में बीते दिनों प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह स्पष्ट कर दिया कि वो प्रदेश के और विभाजन के पक्षधर नहीं है। मतलब साफ है कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री रहते उत्तर प्रदेश के विभाजन की संभावनाएं लगभग शून्य हो गई है।

2011 में एक वक्त ऐसा भी आया था कि जब लगा कि उत्तर प्रदेश का विभाजन हो जाएगा। क्योंकि तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बाँटने संबंधी एक प्रस्ताव उत्तर प्रदेश की विधानसभा में पारित कराकर केंद्र सरकार को भेजा था। उस समय प्रदेश में बहूजन समाज पार्टी की सरकार थी जबकि केंद्र में कांग्रेस की। मायावती सरकार का इस प्रस्ताव के पीछे आशय ये था कि उत्तर प्रदेश जनसंख्या अधिक होने की वजह के प्रशासनिक व्यवस्थागत दबाव में है। व्यवस्था के और बेहतर संचलन के लिए इसको छोटे टुकड़ों में विभाजित करना अपरिहार्य है। इस क्रम में पूरे प्रदेश के भौगोलिक क्षेत्रफल को पूर्व, मध्य, बुन्देलखंड और पश्चिम खंड में विभाजित किया जा सकता है। लेकिन केंद्र में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार प्रदेश सरकार के इस प्रस्ताव से सहमत नहीं हुई। लिहाजा उसने विभाजन संबंधी इस प्रस्ताव को नकारते हुए प्रदेश सरकार को वापस कर दिया।

पिछले दिनों प्रयागराज में महाकुंभ में शिरकत कर रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक मीडिया के कार्यक्रम में इससे संबंधित प्रश्न का जवाब देते हुए स्पष्ट कर दिया कि उत्तर प्रदेश की ताकत इसकी एकता में है। उन्‍होंने कहा कि यूपी के यूनाइटेड रहने में ही उसकी ताकत, पहचान और सम्‍मान है। यूपी अपने आप में यूपी है। उसकी पोटेंशियल है ये। मुझे लगता है कि उत्तर प्रदेश को यूनाइटेड रहकर ही अपने लक्ष्‍यों को प्राप्‍त करना चाहिए। मुझे यह भी लगता है कि इसी में उसकी ताकत भी है, पहचान भी है और सम्‍मान भी है।

ऐसा कह कर योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश विभाजन की संभावनाओं को एक सिरे से खारिज कर दिया। ये पहला मौका है जब योगी का प्रदेश विभाजन पर उनका क्लियर कट स्टैंड सामने आया है। हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार में बीजेपी के साथ गठबंधन में शामिल सियासी दल चाहे राष्ट्रीय लोकदल हो या सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी इन्हे योगी के इस बयान से खासी मायूसीहुई होगी। क्योंकि ये दल राज्य विभाजन के पक्षधर माने जाते है।

योगी आदित्यनाथ ने अपने इस स्पष्ट विचार से बीते लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए ट्रम्प कार्ड साबित हुए अपने दिए नारे बटेंगे तो कटेंगे का भी अप्रत्यक्ष समर्थन किया है।

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