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यूपी में साबित हो गया कि योगी हैं तो मुमकिन है!

By Shakti Prakash Shrivastva on May 13, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                  उत्तर प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव आखिरकार सम्पन्न हो ही गया। निर्धारित समय सीमा दिसंबर 2022 पर न हो पाने वाला यह चुनाव कोर्ट-कचहरी की तकनीकी मामलों की वजह से अब जाकर 13 मई को आए चुनाव परिणामों के बाद सम्पन्न हो सका। इस बीच प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर सीना तानकर चलने वाली बीजेपी की योगी आदित्यनाथ की सरकार के सामने कानून को लेकर ही चुनौतियाँ खड़ी होने लगी। प्रयागराज में 24 फरवरी को दिनदहाड़े एक वकील और दो सरकारी सुरक्षाकर्मियों की हुई हत्या से यह प्रश्न खड़ा हुआ। इस हत्याकांड को भी हत्यारों ने जिस दुस्साहसिक तरीके से बमों और गोलियों की बौछार करते हुए अंजाम दिया उससे पुलिस प्रशासन और प्रदेश सरकार के इकबाल को सीधी चुनौती देने वाली लगी। पड़ताल में नाम आया अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद इलाके का माफिया डान अतीक अहमद, बरेली जेल में बंद उसके भाई अशरफ अहमद, उसकी बीबी शाइस्ता परवीन, बेटे असद अहमद और उसके गुर्गों का। इसी दौरान प्रदेश की जेलों के अंदर अपराधियों के ताने-बाने का भी खुलासा हुआ। माफिया मुख्तार अंसारी का बेटा विधायक अब्बास अंसारी अपनी पत्नी के साथ चित्रकूट जेल में घर की तरह रह रहा था। बरेली में बंद पूर्व विधायक और माफिया अतीक का माफिया भाई अशरफ शूटरों को बुलाकर जेल से ही हत्याकांड की पूरी योजना बनाया। इन सब जद्दोजहद से उबर रही पुलिस की कस्टडी में ही 15 अप्रैल की रात तीन युवा बदमाशों ने अतीक और उसके भाई अशरफ को गोलियों से छलनी कर दिया और खुद को पुलिस के आगे समर्पण कर दिया। इस दौरान निकाय चुनाव की जब दुदुंभी बजी तो सियासत के जानकारों ने कयास लगाया कि ऐसी स्थिति में सरकार के बारे में जनधारणा नकारात्मक बनी हुई है लिहाजा मतदाताओं में जो अंडरकरेंट है वो सरकार के विरुद्ध चुनाव परिणाम को प्रभावित करेगा। लेकिन प्रदेश में दो चरणों 4 मई और 11 मई को हुए मतदान का जब परिणाम 13 मई को आया तो उसने सारे कयासों को एक झटके में गलत साबित कर दिया। प्रदेश के सभी नगर निगमों में बीजेपी की जीत हुई। अब राजनीति के वही जानकार यह कहने लगे है कि इन सभी उपजी स्थितियों को एक-एक कर जिस तरह से सरकार ने काबू में किया है। उससे जनता में एक अच्छा संदेश गया है। जनता को यह एहसास हुआ है कि प्रदेश में योगी हैं तो मुमकिन है। प्रदेश में कुल 17 नगर निगम, 760 शहरी निकाय, 199 नगर परिषद, 544 नगर पंचायत, 1420 नगर सेवक और परिषद पंचायतों के करीब 12 हजार 50 सदस्यों के लिए चुनाव हुआ।

इनमें बीजेपी ने पहली बार एक तरफा जीत दर्ज करते हुए सभी 17 नगर निगमों में अपना परचम लहराया है। इन मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद, अलीगढ़, आगरा, कानपुर नगर, लखनऊ,प्रयागराज,अयोध्या,सहारनपुर,फिरोजाबाद, शाहजहांपुर, झांसी, बरेली, मथुरा, गोरखपुर और वाराणसी नगर निगमों में मेयर पद पर बीजेपी ने रिकार्ड जीत हासिल की थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी लगभग अपनी सभी चुनावी सभाओं में जनता से डबल इंजन की सफलता के बाद शहरी सरकार बनाकर ट्रिपल इंजन की सरकार बनाने की अपील की थी। योगी आदित्यनाथ की कार्यशीली से प्रभावित जनता ने भी उनकी अपील पर अमल करते हुए अपना मुहर लगा दिया।

 

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