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August 10, 2026
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सपा की राह में रोड़ा बन सकते हैं ब्राह्मण!

By Shakti Prakash Shrivastva on February 10, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

समाजवादी पार्टी मैनपुरी उपचुनाव में जीत के बाद से खासी उत्साहित है। लेकिन इतिहास गवाह है कि उत्साह के दौरान ही गलतियों की संभावनाएं अधिक होती है। इन दिनों सपा के भीतर कुछ ऐसे ही तस्वीर बनती दिख रही है। पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने मुस्लिम-यादव सरीखे एम वाई समीकरण के जरिए जातिगत समीकरणों को साधते हुए सत्ता प्राप्ति की जो राह तैयार की थी वह अब बदलते हुए दिख रही है। राजनीतिक विश्लेषकों की मुताबिक अपने एम वाई समीकरण के साथ मुलायम ने ब्राह्मण और ठाकुरों को भी अपने साथ लाकर ही प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। लेकिन मुलायम का वह समीकरण अब ध्वस्त हो रहा है। क्योंकि पार्टी के महासचिव स्वामी प्रसाद मौर्य ने पार्टी के लिए जिस सियासी समीकरण का प्रारूप तैयार किया है वो मुलायम की राह से बिल्कुल अलग है। इसे लेकर पार्टी के भीतर जो खाँटी समाजवादी या ब्राह्मण-ठाकुर कुनबा है। उसमें आक्रोश है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने विवादित बयानों से फिलहाल समाजवादी पार्टी को सियासत के एक ऐसे एक्स्प्रेसवे पर चढ़ा दिया है। जहां गंतव्य तक पहुँचने में रिस्क बहुत है। जानकारों का मानना हैं कि मुलायम सिंह यादव के समय में मुस्लिम-यादव और ठाकुर- ब्राह्मण का जो गठजोड़ बना था। वह न सिर्फ मजबूत था बल्कि सियासत में भी सत्ता की मजबूत दावेदारी करता था। उस समय पार्टी में जनेश्वर मिश्र, ब्रजभूषण तिवारी, माता प्रसाद पांडे, ब्रह्मा शंकर त्रिपाठी जैसे बड़े चेहरे थे। पार्टी में जातिगत समीकरणों का ताना-बाना कुछ ऐसा था कि माता प्रसाद पांडे विधानसभा के अध्यक्ष बनाए गए थे। प्रदेश की सियासी नब्ज को जानने वालों का मानना है कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने पार्टी में इट्री करते ही अपने विवादित बयानों से पार्टी आलाकमान को अपने भरोसे में ले लिया। इससे ऐसा लग रहा है कि पार्टी ने अब पुरानी राह छोड़ नई राह पकड़ ली है। इससे ब्राह्मण अब पार्टी के निशाने पर आ गया लगता है। क्योंकि पार्टी की कार्यसमिति में भी पूर्व की भांति ब्राह्मणों को तवज्जो नहीं दी गयी। इन दिनों पार्टी के अंदर ब्राह्मण नेता काफी असहज महसूस कर रहे हैं। इसका प्रमाण है कि स्वामी प्रसाद के बयान पर ब्राह्मण नेत्री पार्टी प्रवक्ता डॉ रोली तिवारी मिश्रा, पूर्व विधायक विनयशंकर तिवारी और पूर्व विधायक तेजनारायन पांडेय का मुखर विरोध करना। इससे ऐसा लग रहा है कि ब्राह्मण पार्टी की मौजूदा नीतियों से नाराज भी है। यदि ऐसा होता है तो इसमें कोई शक-सुबहा नहीं है कि आने वाले दिनो में सपा की राह में यही ब्राह्मण बहुत बड़ी बाधा बन सकते हैं। ।

 

 

 

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