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ये कैसा प्रेम … प्रेमी ने ही की प्रेमिका की हत्या : गोरखपुर में 3 के बाद मथुरा में 1 की हत्या

By Shakti Prakash Shrivastva on May 6, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

             सृष्टि में जीव की अवधारणा के साथ ही प्रेम शब्द के महत्व की मान्यता है। रिश्ते की मजबूती की कड़ी का सबसे अहम किरदार के रूप में भी इसकी मान्यता है। लेकिन आज के मौजूदा भौतिकवादी समाज में यही शब्द यानि ‘प्रेम’ सर्वाधिक कलंकित होते नजर आ रहा है। आए दिन ऐसी खबरे सुनने-देखने को मिल रही है कि प्रेमी ने प्रेमिका या प्रेमिका ने प्रेमी की हत्या कर दी। हत्या यानि मौत, जीवन की समाप्ति। जीवन को जोड़ने के सबसे सर्व मान्य हथियार से जीवन का अंत। ऐसे वाक्य समान्यतया विश्वास करने योग्य नही लेकिन जब साक्षात उदाहरण सामने हो तो फिर वहाँ किन्तु-परंतु का स्थान नहीं रहता है। आज शुक्रवार की ही घटना है। वो भी उस क्षेत्र की जिसे प्रेम के पर्याय के रूपए में समूचे चर-चराचर जगत में जाना जाता है। यानि प्रेमलीला के योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण के जनम और करम का क्षेत्र मथुरा-वृन्दावन। मथुरा के गोविंदनगर थाना क्षेत्र के शिवनगर कालोनी में सुबह प्रेमी ने अपनी प्रेमिका की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी। जिस प्रेमिका की हत्या हुई वो शादी-शुदा और दो बच्चों की माँ थी। गौर करिएगा एक ऐसी प्रेमिका का एक ऐसा प्रेम, जिसकी वजह से वो अपना भरापूरा परिवार छोड़कर उस प्रेमी के साथ जिंदगी बसाने चली गयी। और उस प्रेमी ने ही उसकी हत्या कर दी। वो भी कुल्हाड़ी से काट-काट कर। इसका मतलब कही से उनके बीच वो भावना भरा प्रेम नही था जिसकी गाथाओं से इतिहास भरा पड़ा है। यह घटना एक मात्र घटना नहीं है अभी चंद रोज पहले गोरखपुर के खोराबार थाना क्षेत्र के रायपुर मुहल्ले में भी एक ऐसे ही तथाकथित सिरफिरे प्रेमी ने न केवल अपनी प्रेमिका बल्कि उसके माँ-बाप को भी धारदार हथियार से काटकर मौत की नींद सुला दिया। ऐसी और भी बहुत सी घटनाए आए दिन समाज में घटित हो रही है। यह घटनाए समाज को सावधान करने के लिए काफी है। बशर्ते हमारा समाज इससे सबक ले। क्योंकि रिश्ते की बुनियाद का मूल ‘प्रेम’ ही अगर इतना कलंकित हो जाएगा तो रिश्ते से बनने वाले समाज और राष्ट्र का क्या होगा। प्रतिष्ठित मनोविज्ञानी और गोरखपुर विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की विभागाध्यक्ष प्रो.अनुभूति दुबे का मानना है कि इस तरह की घटनाएँ कहीं न कहीं सामूहिक परिवार से एकल होते परिवार की अवधारणा का प्रतिफल है। जो पुरुष प्रधान समाज के उस मूल से प्रभावित है जिसमें पुरुष का पुरुषत्व नारी को एक वस्तु की तरह मान्यता देता है।  प्रो. दुबे ने जिस तरह ऐसी घटनाओं की वजह की ओर इशारा किया है उससे सबक लेते हुए नेतृत्व देने वालों को गंभीरता पूर्वक इसके लिए योजना बनानी होगी। जिससे इस तरह से समाज की रीढ़ को ही कमजोर करने वाले अपराध पर समय रहते अंकुश लगाया जा सके। ये घटनाए बार-बार ये सोचने को विवश करती हैं की आखिर ये कैसा प्रेम जिसमें प्रेमी ही प्रेमिका की हत्या कर दे।

 

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