Responsive Menu
Add more content here...
October 9, 2026
ब्रेकिंग न्यूज

Sign in

Sign up

  • Home
  • टॉप न्यूज
  • सपा सम्मेलन 28-29 सितंबर को : सियासी फलक पर बाउंस बैक करने की जुगत में अखिलेश

सपा सम्मेलन 28-29 सितंबर को : सियासी फलक पर बाउंस बैक करने की जुगत में अखिलेश

By Shakti Prakash Shrivastva on September 27, 2022
0 609 Views

https://spotifyanchor-web.app.link/e/bPuqr3XqFtb

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव की आवाज में रिपोर्ट सुनने के लिए आडियो बटन  पर क्लिक करें।

समाजवादी पार्टी का प्रांतीय और राष्ट्रीय सम्मेलन 28 और 29 सितंबर को लखनऊ में होने जा रहा है। पार्टी के स्थापना से लेकर आज तक यह पहला पार्टी सम्मेलन होगा जो कई मायने में पूर्व के सम्मेलनों से अलग होगा। सहयोगी दलों के असहयोग पूर्ण रवैये और पार्टी के अंदर भी कई तरह के असंतोष के बीच इस सम्मेलन में बतौर राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के लिए सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के भविष्य के लिए बेहतर नीतियाँ बनाना होगा। 2017 में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद यह पहला सम्मेलन होगा जिसमें अखिलेश यादव ही सर्वेसर्वा होंगे। स्वास्थ्य कारणो से पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव के भी सम्मेलन में शामिल होने की संभावना कम ही है। ऐसे में दिग्गज नेताओं की गैरमौजूदगी में दिग्गजों जैसा काम करना अखिलेश यादव के सामने एक बड़ी चुनौती होगी। पार्टी की स्थापना के बाद प्रत्येक दो साल पर होने वाला सम्मेलन कुछ वर्षों तक तीन साल के अंतराल के बाद हुआ। 2017 के बाद से अब पाँच वर्षों पर होने लगा है। लिहाजा अब हो रहा है।

28 सितंबर को  प्रांतीय और 29 सितंबर को राष्ट्रीय सम्मेलन होगा। इसमें पार्टी को सियासी फलक पर और चमकदार व मजबूत बनाने के लिए कई सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। यह पहला मौका होगा जब पार्टी संस्थापक मुलायम सिंह यादव के साथ पार्टी को जमीन से उठाकर सत्ता पर काबिज कराने वाले अधिकांश दिग्गज नेता नही होंगे। जो हैं भी उनकी भूमिका सीमित है। शिवपाल हैं नहीं, रामगोपाल की भूमिका राष्ट्रीय महासचिव तक सीमित है। परिवार के अन्य सदस्य अखिलेश को ही सर्वेसर्वा मानते हैं। ऐसे में अगर अखिलेश को लंबी सियासी सफर तय  करना है तो सम्मेलन में उन्हें यह भी समझना होगा कि पार्टी में बचे हुए नेताओं का सम्मान रखते हुए उनका बेहतर इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है। गठबंधन धर्म के निर्वहन में कहाँ चूक हो रही है जिसके नाते अधिकांश सहयोगी असन्तुष्ट हैं। साथ ही समझौते के तहत सशर्त पार्टी में आने वाले नेताओं को पदों पर समायोजित करते समय पार्टी के मूल कैडर का भी ख्याल कैसे रखा जाए। इनको ध्यान में रखते हुए व्यवस्था देना अखिलेश के सामने बड़ा टास्क है। हालांकि अखिलेश का दुबारा राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना जाना लगभग तय है। पार्टी के जानकारों की मानें तो प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम को भी दुबारा मौका दिया जा सकता है। 4 अक्तूबर, 1992 को गठित हुई सपा का यह ग्यारहवां सम्मेलन होगा। पार्टी के पहले प्रदेश अध्यक्ष राम शरण दास रहे। उसके बाद 2006 में शिवपाल यादव बनाए गए जो 2010 तक रहे। उसके बाद 2017 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के पहले तक अखिलेश यादव रहे। उसके बाद से अब तक नरेश उत्तम हैं। राष्ट्रीय अध्यक्षों में मुलायम सिंह यादव के बाद अब अखिलेश यादव उस पद पर कायम हैं। सम्मेलन बेशक समाजवादी पार्टी का है लेकिन इस पर निगाहें देश के सभी सियासी दलों की लगी हुई है जो देश में बीजेपी का विकल्प ढूंढ रही हैं।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *