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बीजेपी की चाल विपक्षी गठबंधन बेहाल !

By Shakti Prakash Shrivastva on December 31, 2024
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
लोकसभा चुनाव के पहले बड़े-बड़े लोकलुभावने नारे के साथ विपक्षी गठबंधन अस्तित्व में आया था। बिहार के पलटू नेता के नाम से मशहूर और बिहार के मौजूदा मुख्यमंत्री नितीश कुमार ही उसके सूत्रधार थे। उस गठबंधन को आइएनडीआइए यानि इंडियन नेशनल डेवेलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस नाम दिया गया। उद्देश्य था हर हाल में केंद्र की सत्तासीन बीजेपी सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाना। इस गठबंधन से जो सियासी समीकरण बने उसका लोकसभा चुनाव मे खासा असर देखा भी गया। यह अलग बात है कि चुनाव से पहले ही उसके सूत्रधार नितीश कुमार गठबंधन से रिश्ता तोड़ बीजेपी युक्त राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन का हिस्सा बन गए। लेकिन अभी लोकसभा चुनाव के बीते चंद महीने ही हुए हैं हालात ऐसे हो गए है कि बीजेपी तो सत्ता से बाहर नहीं हुई उल्टे गठबंधन ही बीजेपी की चाल में फंस गया और टूटने के कगाए पर पहुँच गया है।
उत्तर भारत जो देश की सियासत में अपनी अलग अहमियत रखता है। उसके अधिकांश विपक्ष शासित राज्यों में गठबंधन के घटक दलों में गठबंधन को लेकर माहौल तल्ख बना हुआ है। गठबंधन के पैन इंडिया अपनी उपस्थिति रखने वाला सबसे मजबूत दल कांग्रेस को लेकर गठबंधन के अन्य सहयोगियों में जो तल्खी दिख रही है। उससे स्पष्ट है कि गठबंधन की उम्र अब ज्यादा नहीं है। कभी भी किसी भी समय वो काल कवलित हो सकती है। दिल्ली प्रदेश जहां अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने वाले है। वहाँ गठबंधन के घटक दल आम आदमी पार्टी की सरकार है। यहाँ पिछला लोकसभा चुनाव आप और कांग्रेस मिलकर लड़े थे। लेकिन मौजूद तस्वीर ये है कि कांग्रेस के नेता-कार्यकर्ता आम आदमी पार्टी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर एफ आई आर तक दर्ज करने की मांग कर रहे है और अपने साथ-साथ अन्य सहयोगी दल से अपील कर रहे है कि आम आदमी पार्टी को गठबंधन से बाहर किया जाए। मतलब साफ है कि यहाँ गठबंधन होने का कोई मायने नहीं है।
ऐसे ही उत्तर प्रदेश की बात की जाए तो यहाँ गठबंधन का सबसे मजबूत घटक समाजवादी पार्टी है। लेकिन सपा ने हरियाणा, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव में ये कांग्रेस से अलग होकर चुनाव लड़ी थी। जबकि लोकसभा चुनाव में बकायदे समझौते के तहत कांग्रेस और सपा मिलकर लड़े थे। इसका परिणाम भी दिखा। उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव के नतीजे ने बीजेपी को उसके सपने से दूर कर दिया। लगातार तीसरी बार बहुमत की सरकार बनाने का सपना पाले बीजेपी को अपने सहयोगियों की बैसाखी से सरकार बनानी पड़ी। लेकिन इसके बावजूद आज हालात ये है कि इन दोनों के बीच बस कहने के लिए गठबंधन है। गठबंधन के नेतृत्व के मसले पर सपा का तृण मूल कांग्रेस सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नाम पर खुल कर समर्थन करना और कांग्रेस का संभाल मुद्दे पर सपा की किरकिरी कराने जैसा व्यवहार गठबंधन की उम्र का आकलन करने के लिए काफी है।
सियासी गलियारे में इस बात की चर्चा इन दिनों जोरों पर है कि गठबंधन में गहरी होती दरार के पीछे बीजेपी का हाथ है। माना ये जा रहा है कि समूचा विपक्षी गठबंधन बीजेपी की चाल का शिकार हो गया है।

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