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योगीराज में राजनीति के नटवरलालों की खैर नहीं : पकड़ा गया मंत्री और विधायक बनवाने वाला गिरोह

By Shakti Prakash Shrivastva on July 23, 2021
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लखनऊ, (मुख्य संवाददाता)। प्रदेश की योगी सरकार में माफियाओं के साथ-साथ नटवरलालों की भी शामत है। माफियाओं की शांत गतिविधियां इस बात का संकेत दे रही है कि उनमे सरकार का खौफ है लेकिन राजनीति के नटवरलालों में ऐसा लगता है कि अभी वो खौफ नहीं बन पा रहा है। क्योंकि सचिवालय के अंदर पशुधन विभाग में समानान्तर सत्ता चलाकर ठेका पट्टी दिला रहे नटवरलालों के साल से अधिक समय से सलाखों के पीछे रहने और जमानत के लिए तरसने का हश्र देखने के बाद भी ये राजनीति के नटवरलालों कि गतिविधियां बंद नहीं हो रही है। हजरतगंज पुलिस ने प्रदेश सरकार में मंत्री बनवाने और पार्टियों से विधायकी का टिकट दिलाने वाले ठीकेदार नटवरलाल गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार किया है।

पकड़े गये गिरोह के सदस्य प्रदेश में बेखौफ हो केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह का निजी सचिव बनकर छुटभैय्ये नेताओं को मंत्री, एम एल सी बनवाने सहित अलग-अलग राजनीतिक दलों से विधायकी का टिकट दिलवाने का ठेका लिया करते थे। गिरोह के एक सदस्य ने प्रयागराज की महिला नेता रीता सिंह को मंत्री बनवाने के लिये एक करोड़ रुपये की मांग की थी। एडवांस के रूप में चार लाख रुपये ले भी लिए थे। इसी तरह शिवपाल यादव की प्रगतिशील समाजवादी पार्टी से विधायक का टिकट दिलाने के नाम पर एक युवक से चार लाख रुपये लिये थे। इसी महिला नेता की शिकायत पर हजरतगंज पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार किया है। इनमें दो उत्तराखंड और दो यूपी के बरेली व लखनऊ के हैं। इसके अलावा अन्य दो फरार साथियों की तलाश की जा रही है। इंस्पेक्टर हजरतगंज श्याम बाबू शुक्ला के मुताबिक प्रयागराज की रीता सिंह ने चार दिन पहले बताया था कि कुछ लोग उनसे भाजपा कार्यालय पर मिले थे। इन लोगों ने खुद को गृहमंत्री अमित शाह का करीबी बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री पद दिलाने की बात कही थी। इसके लिये रीता से एक करोड़ रुपये की मांग की थी। विश्वास जताने के लिए इन लोगों ने अमित शाह के साथ कई फोटो भी दिखायी थी। इसी वजह से वो झांसे में आ गई और चार लाख रुपये एडवांस भी दे दिये। इन लोगों ने भरोसा दिया था कि प्रदेश में होने वाले मंत्रिमंडल  विस्तार में उन्हें भी शपथ दिलायी जायेगी। लेकिन जैसे ही एडवांस के रुपये मिले इन लोगों ने मिलना-जुलना बंद कर दिया। टालमटोल की स्थिति देख रीता ने फिर हजरतगंज थाने में रिपोर्ट की। एसीपी क्राइम प्रवीण मलिक की मुताबिक जालसाजों में उधमसिंह नगर निवासी शमीम अहमद खान,  हसनैन अली, गोमतीनगर निवासी हिमांशु सिंह और बरेली, नवाबगंज निवासी जाने आलम है। हिमांशु मूल रूप से बलिया के रानीगंज कोटवा का है। फरार साथियों में बरेली, नवाबगंज का शाहिद व उधमसिंहनगर, सिसैया निवासी विजय उर्फ बबलू हैं। क्राइम ब्रांच के मुताबिक हसनैन ही फोन पर खुद को गृहमंत्री अमित शाह बनकर बात करता था। वह उनकी तरह आवाज निकालने की कोशिश करता था। किसी को शक होता तो बता दिया जाता कि कुछ तबियत खराब है। उसके साथी हसनैन का नम्बर गृहमंत्री नाम से मोबाइल में सेव कर रखे थे। बरेली का शाहिद गृहमंत्री का निजी सचिव बनता था। शाहिद ही चंगुल में फंसे लोगों के सामने गृहमंत्री का फोन मिलाकर व्हाटसएप कॉल करता था। उसने रीता सिंह की कई बार फर्जी गृहमंत्री बने हसनैन से बात करायी थी।  पकड़े गए आरोपियों ने कुबूला कि वह लोग छोटे नेताओं को झांसे में लेते थे। कई छुटभैये भाजपा नेताओं को विधानसभा व एमएलसी का टिकट दिलाने के लिये खुद को बड़ा नेता व उनका पीए बताकर फंसाते थे। फिर ये लोग हसनैन से फोन पर बात करते और जताते की गृहमंत्री से बात हो रही है। रीता को इन लोगों ने एमएलसी बनाने का झांसा दिया था ताकि उन्हें मंत्री बनने में कोई बाधा न आये। पुलिसिया तफतीश में चारों लोगों ने छह लोगों से रकम वसूलने की बात कुबूली है। एडीसीपी पूर्वी चिरंजीव नाथ सिन्हा के मुताबिक अभी यह साफ नहीं हुआ है कि कितनी रकम अब तक वसूली गई है। सामने आयी जानकारियों के आधार पर पड़ताल की जा रही है। उल्लेखनीय है कि पशुधन विभाग के फर्जी रैकेट में शामिल लोग अभी भी जेल के सलाखों के पीछे है। उनकी जमानत नहीं हो सकी है।

 

 

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