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UP में शिक्षामित्रों की बल्ले-बल्ले, हुए शिक्षकों के बराबर!

By Shakti Prakash Shrivastva on February 20, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार का एक अहम फैसला आया है। एक लंबे अरसे से अपनी मांगों को लेकर प्रदेश भर के प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षामित्र विरोध प्रदर्शन करते रहते हैं। सरकार के इस फैसले से शिक्षामित्रों की एक मनमाफिक मुराद पूरी हो गई है। इस आदेश के तहत प्रदेश भर के प्राथमिक विद्यालयों में तैनात शिक्षामित्र अब सामान्य शिक्षकों की तरह ही 60 साल की उम्र तक अपनी सेवाएं दे सकेंगे। यानि कि अब प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत सामान्य शिक्षकों की भांति ही शिक्षामित्रों की भी अवकाश प्राप्ति की आयुसीमा बढ़ाकर 60 साल कर दी गई है। इस आदेश का फायदा प्रदेश के प्राथमिक विद्यालयों में सेवा दे रहे लगभग एक लाख छियालिस हजार शिक्षामित्रों को मिलेगा। इनके लिए हर साल नवीनीकरण की प्रक्रिया पूर्ववत ही चलती रहेगी।

इस संबंध में प्रदेश के प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा दीपक कुमार की तरफ से आदेश जारी किया है। इस आदेश की मुताबिक शिक्षामित्रों की संविदा आधारित सेवाएं 60 साल की आयु पूरी होते ही स्वतः समाप्त हो जाएगी। उनके मुताबिक बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक विद्यालयों के संबंध में शिक्षामित्र योजना क्रियान्वयन से संबंधित पूर्व में जारी शासनादेशों को इस सीमा तक संशोधित समझा जाए।

1999 में प्रदेशभर में शिक्षकों की कमी को देखते हुए प्रदेश की तत्कालीन सरकार ने प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षामित्रों की नियुक्ति शुरू की थी। आज प्रदेश भर के प्राथमिक विद्यालयों में कुल लगभग डेढ़ लाख की तादाद में शिक्षामित्र कार्यरत हैं। ये शिक्षामित्र अमूमन इलाकाई शिक्षित ग्रामीण होते है जिनके पास आवश्यक शैक्षिक योग्यता है। इसके सेवा का हर 11 महीने के बाद उनकी संविदा नवीनीकरण किया जाता है। इन शिक्षामित्रों को मानदेय के रूप में 10000 हजार रुपये मासिक दिया जाता है।

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