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यूपी में दलितों को सहेजने उतरे ‘चिराग’

By Shakti Prakash Shrivastva on September 27, 2024
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

लोकसभा चुनाव परिणाम ने राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन यानि एनडीए के नीतिनियंताओं को अपने नीतियों पर मंथन करने को मजबूर कर दिया है। तब से लगातार गठबंधन इस बात का प्रयास कर रहा है कि चुनाव के दौरान विपक्षियों द्वारा छेड़े गए मुद्दों की काट कैसे दी जाए। इनमे दलितों को साधना भी एक अहम विषय उभर कर सामने आया था। क्योंकि चुनाव में विपक्षियों ने जनता में यह भय दिखाने की कोशिश की थी कि अगर यह सरकार वापस आएगी तो संविधान में आरक्षण को नए सिरे से पारिभाषित करेगी और दलितों के आरक्षण को समाप्त कर देगी। चुनाव परिणाम आया एनडीए की सरकार तो बन गई लेकिन परिणाम उसके अनुकूल नहीं रहे। लिहाजा एनडीए ने अब एक-एक मुद्दे की काट के लिए प्रयास शुरू कर दिए हैं। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में दलितों को साधने की जिम्मेदारी एनडीए के अहम हिस्सेदार लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान को सौंपी गई है। इसके लिये कद्दावर दलित चेहरे चिराग ने दौरा भी शुरू कर दिया है। गुरुवार को कौशांबी इसकी शुरुआत भी हो गई है।

कौशांबी के मूरतगंज में उन्होंने वंचित समाज सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने अपने सम्बोधन में समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव और बहुजन समाज पार्टी की मुखिया बहन मायावती सहित कांग्रेस को निशाने पर रखते हुए कहा कि इन पार्टियों ने हमेशा दलित समाज को डराने का काम किया है। उन्होंने कहा कि वह पासी समाज के हक और हुकूक की लड़ाई हर मोर्चे पर लड़ने के लिए तैयार है। उन्होंने यहाँ तक कहा कि जब तक रामविलास पासवान का बेटा जिंदा है आरक्षण और संविधान को कोई खतरा नहीं है।

उत्तर पदेश की सियासत में दलितों की हिस्सेदारी क्या है इसे बीएसपी की कई बार सरकार बनने से समझा जा सकता है। लेकिन अब प्रदेश की मौजूदा सियासी तस्वीर का आलम ये है कि प्रदेश में कई-कई बार सरकार बनाने वाली पार्टी मायावती की पार्टी का प्रदेश की विधानसभा में महज एक विधायक है। विधान परिषद में उसका एक भी सदस्य नहीं है। एसे में सभी सियासी दलों की निगाहे बहुजन समाज पार्टी के मतदाताओं की तरफ है। हर दल दलितों का हितैषी बनने की होड़ में है। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने पीडीए यानि पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक उत्थान का शिगूफ़ा छोड़कर उसकी फसल अपने हित में काटने के हर संभव प्रयास कर रहे है। काफी हद तक उन्हे इस प्रयास में सफलता भी मिली है। अब पीड़ीए के इसी काट के लिए बीजेपी या एनडीए ने चिराग को आगे किया है। क्योंकि चिराग का सकारात्मक पहलू ये है कि वो साफ्ट स्पोकेन है, व्यवहार कुशल है और दलित सियासत के एक नामचीन शख्सियत रामविलास पासवान के बेटे हैं। अब देखना दिलचस्प ये होगा कि एनडीए और यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार की उम्मीदों पर चिराग का चिराग कितना जल पाता हैं।

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