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August 10, 2026
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नेपाल–बांग्लादेश के चलते टेंशन में भारत !

By Shakti Prakash Shrivastva on March 11, 2025
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                                                                                 शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

विश्व गुरु बनने की ओर अग्रसर होने का दावा करने वाला भारत ऐसा लगता है कि इन दिनों अपने ही पड़ोसी देशों से डरा-सहमा है। इसका मतलब यह कत्तई नहीं है कि इन देशों से भारत की सुरक्षा को कोई खतरा पैदा हो गया है। बल्कि पड़ोसी देशों नेपाल और बांग्लादेश में इन दिनों कुछ मुद्दों को लेकर जो प्रदर्शन हो रहे हैं उन प्रदर्शन के मुद्दों के चलते भारत चिंतित है। नेपाल में जहां लोकशाही की जगह फिर से राजशाही की बहाली के लिए प्रदर्शन हो रहे हैं तो वही बांग्लादेश में  खिलाफत लागू करने की मांग को लेकर प्रदर्शन हो रहे हैं। बेशक अभी ये मांग कुछ चंद लोगों के गुटों के द्वारा किया जा रहा है लेकिन अगर यह मुद्दा विस्तृत होता है तो निःसंदेह इसका सीधा प्रभाव अपने देश पर भी पड़ेगा। यही वजह है कि भारत इन दोनों देशों में चल रही गतिविधियों पर अपनी नजर बनाए हुए है।

बीते बुधवार को नेपाल की राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी यानि आरपीपी की तरफ से राजधानी काठमांडू की सड़कों पर राजशाही की पुनबहाली की मांग को लेकर जमकर प्रदर्शन किए गए। इस क्रम में हजारों की संख्या में पार्टी कार्यकर्ताओं ने एकजुट हो बाइक रैली निकाली और सड़कों पर प्रदर्शन किया। सियासी गलियारों में गूंज रही सूचनाओं पर यकीन करें तो प्रदर्शन कर रही पार्टी राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी को नेपाल के पूर्व राजा ज्ञानेन्द्र वीर विक्रम शाह देव का समर्थन हासिल है। यह मामला उस समय से सुर्खियों में आया जब ज्ञानेन्द्र वीर जी पोखरा में राजा वीरेंद्र वीर विक्रम शाह देव की मूर्ति का अनावरण करने आए थे और वहाँ कुछ मौजूद लोगों ने नेपाली राष्ट्रध्वज को लहराते हुए लोकशाही की जगह पर राजशाही की बहाली किए जाने की मांग की थी। हालांकि 2008 से पहले तक नेपाल में राजशाही व्यवस्था ही थी। 2015 से वहाँ नेपाली संविधान लागू है। नेपाल में राजशाही के खिलाफ एक लंबा संघर्ष चला था तब जाकर संघीय व्यवस्था की बहाली हो पाई थी। ऐसे में उम्मीद कम ही लगती है कि वहाँ की जनता वाकई इतने कम समय में ही इस व्यवस्था से ऊब गई हो। क्योंकि किसी भी देश में व्यवस्था परिवर्तन के बाद हालात सुधारने में सत्रह साल का समय कुछ भी नहीं है। कई कमियों के बीच एक बात तो है ही कि नेपाली जनता को अपने मन मुताबिक प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिला हुआ है।

दूसरी तरफ बांग्लादेश में खिलाफत लागू करने की मांग जोर पकड़ रही है। यह आंदोलन अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधित चरमपंथी इस्लामी संगठन हिजबुत तहरीर के सदस्यों द्वारा बांग्लादेश की राजधानी ढाका में किया गया। इस कट्टरपंथी संगठन पर पाकिस्तान,जर्मनी और तुर्की साहित कई अरब देशों ने प्रतिबंध लगा रखा है। जबकि कनाडा, अमेरिका जैसे कुछ यूरोपीय देशों मे इसे कानूनी संरक्षण प्राप्त है। यह संगठन पूरी दुनिया मे खिलाफत यानि शरिया कानून लागू करने का पक्षधर है। संदेह इस बात का भी है कि बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का भी इसे समर्थन हासिल है।

इस तरह अगर बांगलादेश में इस्लामी कट्टरपंथ अपनी जड़ें मजबूत करता है तो उसका प्रभाव भारत पर पड़ना तय है। ऐसे में भारत की चिंता स्वाभाविक है। हालांकि नेपाल में राजशाही का कहीं न कही भारत पक्षधर रहा है।

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