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उत्तर प्रदेश : अतीत बिसराइये….ये योगी का यूपी है

By Shakti Prakash Shrivastva on August 30, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

जिन लोगों के जेहन में उत्तर प्रदेश की अस्सी के दशक वाली तस्वीर तैर रही है। उनके लिए ये खबर महत्वपूर्ण है। क्योंकि अस्सी के दशक में प्रदेश की पहचान देश ही नही पूरी दुनिया भर में अपराध के नाते थी। प्रदेश के शहर गोरखपुर का तो अपराध के लिए शिकागो शहर से तुलना किया जाने लगा था। लेकिन जबसे उत्तर प्रदेश में बीजेपी की योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली सरकार आई है तबसे यह पहचान लगातार बदल रही है। हालांकि बीच के कुछ वर्षों तक बीएसपी की मायावती सरकार भी अपराध नियंत्रित करने में कामयाब रही थीं लेकिन भ्रष्टाचार, कार्यों में राजनीतिक दखलंदाजी जैसे अन्य क्षेत्रों में बहुत कुछ नही कर सकी थीं। योगी आदित्यनाथ ने जब 2017 में प्रदेश में सत्ता की बागडोर संभाली थी तभी उन्होने प्रदेश को एक ट्रिलियन मुद्रा की आर्थिक आधार वाला प्रदेश बनाने का एलान किया था। चुनाव भी पार्टी ने उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के टैग लाइन के साथ लड़ा था। अभी पहले की सरकार के पाँच साल और दूसरे कार्यकाल के लगभग पाँच महीने का समय बीता है। योगी के ऐलान का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। इसके लिए उन्होने इन वर्षों में कोरोना काल खंड के महीनों को छोड़ लगातार प्रदेश के पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण के जिलों का दौरा किया। इलाकों की जमीनी समस्याओं को नजदीक से जानकर उसके तात्कालिक और दीर्घकालिक कार्ययोजनाओं के जरिये समाधानित करने का प्रयास किया। इस बाबत उन्होने मुख्यमंत्री के नोएडा-गाजियाबाद का दौरा अशुभ सिद्ध होने जैसे टोटके को झुठलाते हुए कई मिथक भी तोड़े। इतना ही नहीं प्रदेश में अपराध और अपराधियों के खिलाफ सख्ती, भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेन्स की नीति सहित मुख्यमंत्री की सख्त, ईमानदार, और पाक-साफ चरित्र प्रदेश को नया रूप देने में सोने में सुहागा साबित हो रहा है। आज चाहें मुख्तार अंसारी, विजय मिश्र, अतीक अहमद सरीखे माफिया डान हों या इलाकाई छुटभैये माफिया सभी में योगी नाम का खौफ है। यही वजह है कि नेशनल क्राइम रिकार्ड्स ब्यूरो की नवीनतम रिपोर्ट में प्रदेश के आपराधिक आंकड़ों में अपेक्षाकृत बेहतर सुधार दिख रहा है। आंकड़ों की मुताबिक 2021 में पूरे देश में सांप्रदायिक हिंसा के 378 मामले दर्ज हुए जिसमें उत्तर प्रदेश जैसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश में महज एक मामला दर्ज हुआ है। जबकि झारखंड में 100, बिहार में 51, राजस्थान में 22, महाराष्ट्र में 77 और हरियाणा में 40 मामले हुए। साइबर क्राइम के मामलों में 22.6 प्रतिशत की कमी आई है।  2021 में साइबर क्राइम के 8829 मामले दर्ज हुए जबकि 2020 में 11097 और 2019 में 11416 मामले दर्ज किये गए। महिलाओं से हुए बलात्कार के मामलों में प्रदेश का तीसरा स्थान है। प्रदेश में बलात्कार के कुल 2845 प्राथमिकी दर्ज हुए है जबकि राजस्थान में 6337 और मध्य प्रदेश में 2947 प्राथमीकियाँ दर्ज हैं। 2021 में पूरे देश में कुल 36 लाख 63 हजार 360 प्राथमिकी दर्ज हुई है जिसमें से प्रदेश में 3 लाख 57 हजार 905 प्राथमिकी हुई है। प्रदेश में हत्या की वारदातों में भी कमी आई है। प्रतिदिन 10 से अधिक हत्याएं हुई हैं जो पिछले वर्षों की तुलना में कम हैं। इस साल 3717 हत्याएं हुई जबकि 2020 में 3779, 2019 में 3806 हत्याएं हुई थीं। 2021 में प्रदेश में बच्चों के खिलाफ 16838 मामले दर्ज हुए जबकि 2020 में 15271 और 2019 में 18943 मामले दर्ज हुए। इस तरह से बाल अपराध में 11.11 प्रतिशत की कमी आई है। प्रदेश के विकास में तो ये रिकार्ड उल्लेखनीय है ही कहते है कि जब तक स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नही होंगी तब तक उस प्रदेश का वास्तविक विकास की परिभाषा अधूरी है। इस क्रम में कोरोना से बचाव के बाबत भी प्रदेश ने इतिहास रचा। ट्रेस, ट्रीट और टेस्ट के फार्मूले पर काम करते हुए प्रदेश ने कोरोना पर प्रभावी नियंत्रण पाने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की। कोरोना के वैक्सीनेशन में भी प्रदेश का पूरे देश में आज पहला स्थान है। अब तक प्रदेश में वैक्सीन की कुल 37 करोड़ डोज दी जा चुकी है जिसमें 17 करोड़ 66 लाख से अधिक लोगों को पहली डोज और 16 करोड़ 74 लाख लोगों को दोनों डोज दी जा चुकी हैं। दो करोड़ 59 लाख से ज्यादा कोविड वैक्सीन की प्रिकॉशन डोज दी गई है। जिस तरह से योगी आदित्यनाथ अपने वायदे की मुताबिक गंभीरता से कार्यों को अंजाम दे रहे है। वो दिन दूर नहीं जब उत्तर प्रदेश वाकई उत्तम प्रदेश बन कर देश में एक बड़ी आर्थिक ताकत के रूप में अपनी पहचान बनाएगा।

 

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