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सीवान में साहेब की सहानुभूति से रंग लाएगी हिना !

By Shakti Prakash Shrivastva on May 24, 2024
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                                                                                   शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

बिहार में एक ही शख्स रहा है जिसे जीते जी तो साहेब कहा ही गया लेकिन आज उनके न रहने पर भी इसी नाम से जाना पहचाना जाता है। इस शख्स को इसके अलावा माफिया डान और सीवान के बहुचर्चित सांसद के रूप में भी जाना जाता है। इनका असली नाम मोहम्मद शहाबुद्दीन है। शहाबुद्दीन को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव का खासमखास माना जाता था। लालू की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल से चार बार सांसद रहे शहाबुद्दीन की मौत 2021 में जेल में रहते हुए कोरोना से हो गई थी।  जीते जी सीवान संसदीय सीट से अजेय रहते हुए सियासत करने वाले शहाबुद्दीन की मौत के बाद उनकी पत्नी हिना शहाब ने प्रयास तो किए लेकिन उनकी सियासत मुकाम हासिल नहीं कर सकी। तीन बार चुनाव मैदान में उतरी लेकिन तीनों बार जीत मयस्सर नहीं हुई। इस बार फिर चौथी बार जोर आजमाइश कर रही है हिना। इस बार अन्य मुख्य दलों के प्रत्याशियों की स्थिति और हिना शहाब के लगातार हार से उपजी सहानुभूति के चलते ऐसे समीकरण बनते दिख रहे हैं जो इस बात की तसदीक करते है कि हिना का पलड़ा भारी है।

हिना शहाब आरजेडी यानि राष्ट्रीय जनता दल के टिकट पर पहली बार सीवान से वर्ष 2009 का लोकसभा चुनाव लड़ी और वे निर्दलीय उम्मीदवार ओमप्रकाश यादव से हार गई। दूसरी बार वर्ष 2014 का लोकसभा चुनाव लड़ी और बीजेपी उम्मीदवार ओमप्रकाश यादव से चुनाव हार गई। तीसरी बार वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ी और जदयू की कविता सिंह से चुनाव हार गईं। इस बार सीवान की सियासी परिस्थितियाँ पिछली बार से भिन्न हैं। इस बार सीवान में आमने-सामने की बजाय लड़ाई को हिना ने त्रिकोणीय बना दिया है। जदयू ने अपनी रणनीति में बदलाव करते हुए अपने सीटिंग सांसद कविता सिंह को बेटिकट कर दिया और कुशवाहा जाति से आने वाली विजय लक्ष्मी कुशवाहा को उम्मीदवार बनाया। आइएनडीआईए गठबंधन की तरफ से राजद ने पूर्व विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी को अपना उम्मेदवार बनाया है। इन दोनो की सीधी जंग निर्दलीय उम्मीदवार हिना शहाब की वजह से त्रिकोणनीय हो गई है।

आइएनडीआईए प्रत्याशी अवध बिहारी चौधरी सीवान विधान सभा से छह बार विधायक रहे हैं। लेकिन इन्हे लोकसभा चुनाव लड़ने का अनुभव नहीं है। यह उनका पहला लोकसभा चुनाव है। एनडीए गठबंधन की ओर से जदयू उम्मीदवार विजयलक्ष्मी का भी यह पहला लोकसभा चुनाव है। जबकि निर्दलीय हिना शहाब चौथी बार लोकसभा का चुनाव लड़ रही हैं। जहां तक हिना के सियासी सफर या उपलब्धि की बात है तो वो कुछ खास नहीं है। सियासी पूंजी के नाम पर जो कुछ भी है तो वो है पति शहाबुद्दीन का पुराना प्रभाव और लगातार तीन चुनाव में हार मिलने से मिल रही सहानुभूति है। पिछले तीन चुनावों में हिना भले ही बहुत प्रभावशाली नहीं रही हो लेकिन इस बार इतना जरूर है कि लड़ाई में है और सियासी समीकरण के लिहाज से मतदाताओं का रुझान बन गया तो आश्चर्य न होगा कि उन्हे जीत भी मिल जाए।

वैसे सीवान लोकसभा में लगभग 18 लाख मतदाता हैं। इसमें 9,85,125 पुरुष और 7,90,829 महिला मतदाता हैं। जातियों के आधार पर संख्या देखें तो यहां मुस्लिम की आबादी सर्वाधिक है। मुस्लिम वोटर की संख्या करीब 3 लाख है। दूसरे नंबर पर यादव हैं। यादव का कुल मतदाता करीब 2.5 लाख हैं। सवर्ण मतदाता भी करीब चार लाख के करीब हैं। कुशवाहा 1.25 लाख, सहनी 80 हजार और ईबीसी 2.5 लाख है। सीवान लोकसभा क्षेत्र के विधानसभाओं की स्थिति भी ऐसी है कि यहाँ किसी दल का वर्चस्व नहीं है।  सीवान लोकसभा के अंतर्गत कुल छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं। इनमे एक दरौंदा विधानसभा है जहां बीजेपी के करण जीत सिंह विधायक हैं। सीवान से राजद के अवध बिहारी चौधरी, रघुनाथपुर से हरिशंकर यादव, बड़हरिया से राजद के बच्चा पांडेय विधायक हैं। वही जीरादेई से सीपीआईएमएल के अमरजीत कुशवाहा और दरौली से सीपीआईएमएल के सत्यदेव राम विधायक हैं।

राजद के चुनावी समीकरण में एमवाई के साथ सीपीआईएमएल के कैडर वोट के साथ कांग्रेस के आधार वोट का भरोसा है। जदयू को बीजेपी के आधार वोट सवर्ण और वैश्य के साथ कुशवाहा और कुर्मी वोट का भरोसा है। वही इस चुनाव को त्रिकोणात्मक संघर्ष की ओर ले जाने वाली हिना के मजबूत आधार कई वार सांसद रहे शहाबुद्दीन के सर्व जाति का आधार वोट है। 4 जून का परिणाम बताएगा कि सीवान में मतदाताओं पर हिना का रंग कितना चटक हो सका है।

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