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बयान से सियासी खुराक पाने की जुगत में फिर स्वामी !

By Shakti Prakash Shrivastva on August 1, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

             उत्तर प्रदेश में बीजेपी की पहली सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे और वर्तमान में सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने जबसे बीजेपी छोड़ सपा का दामन थमा है। तबसे उनके विचार-बयान सब बदले-बदले नजर आ रहे हैं। खासकर उनके हिन्दू धर्म विरोधी बयान लगातार सुर्खियों में बने रह रहे हैं। अपने ऐसे धर्म खासकर हिन्दू धर्मविरोधी बयान देने की वजह से वो लगातार सुर्खियों में बने भी रहते है। पिछले दिनों एक बार फिर उन्होने विवादित बयान देकर चर्चा बटोरी है। उन्होने कहा कि केदारनाथ, बद्रीनाथ और जगन्नाथ धाम समेत बड़ी संख्या में तीर्थस्थल बौद्ध मठों को तोड़कर बनाए गए हैं। उन्होने बीजेपी का जिक्र करते हुए कहा कि अगर बीजेपों के लोग हर मंदिर में मस्जिद ढूंढने का काम करेंगे तो हर मंदिर में बौद्ध मठ ढूंढा जाएगा। जोकि, काफी महंगा पड़ेगा। इसलिए देश में भाईचारा कायम रखने के लिए जरूरी है कि सभी धार्मिक स्थलों का स्वरूप वैसा ही रहने देना चाहिए, जैसाकि 15 अगस्त 1947 को था। स्वामी प्रसाद मौर्य ने रविवार को अपने आवास पर प्रेस कांफ्रेंस करके विभिन्न इतिहासकारों, प्रकांड विद्वान पंडित राहुल सांकृत्यायन, स्वामी विवेकानंद और दयानंद सरस्वती के हवाले से कहा कि आदि गुरु शंकराचार्य, उनके सहयोगियों और उन्हें मानने वाले राजाओं ने प्राचीन काल में बड़े पैमाने पर बौद्ध मठों को तुड़वाया। पुरी का प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर भी बौद्ध मठ को परिवर्तित करके बनाया गया है। उत्तराखंड के कुमाऊं में भी ऐसा बड़े पैमाने पर किया गया। इसलिए उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी का यह कहना है कि मैं (मौर्य) उनकी आस्था को प्रभावित कर रहा हूं, उचित नहीं है।

स्वामी प्रसाद ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को दूसरों की आस्था की भी उतनी ही चिंता करनी चाहिए, जितनी उसे अपनी आस्था की चिंता रहती है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के मंदिरों को भी तोड़कर हिंदू तीर्थस्थल बनाए गए हैं। विश्व प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर के रथ उत्सव की उत्पत्ति भी बुद्ध धम्म व संघ के आयोजन से जुड़ी है। जगन्नाथ मंदिर की छवियां भी बुद्ध धर्मावलंबियों की मान्यता संबंधी प्रतिमाओं से मिलती-जुलती हैं।

 

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