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August 9, 2026
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अमेरिका का घमंड चकनाचूर करेगा तेजस!

By Shakti Prakash Shrivastva on June 21, 2025
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                                                                                 शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

भारत एक विकासशील देश है जबकि अमेरिका एक विकसित देश। ऐसे में लाजिमी है कि कई मायनों में अमेरिका भारत से बेहतर होगा। खासकर तकनीकी के मामले में। लेकिन भारत भी अपनी तकनीक को अब तेजी से परिष्कृत और उन्नत कर रहा है। एक समय था कि जब अमेरिका ने लड़ाकू विमानो की सप्लाई तो भारत को दी थी लेकिन उसके इंजन के तकनीक की जानकारी मांगने पर भी नहीं दिया था। ऐसे में जब आज भारत अपनी तकनीकी और इज़राइल से मिले तकनीक से तैयार तेजस जैसे लड़ाकू विमान को अपने वायु सेना में शामिल कर रहा है। जो अत्याधुनिक है उन्नत तकनीक वाला है। कई मायनों मे समकक्ष अमेरिकी विमानों से बेहतर होगा। इससे अमेरिका को तकनीक न देने वाला घमंड चूर-चूर हो जाएगा।

भारतीय वायुसेना को इस महीने के अंत तक अपना नया लड़ाकू विमान तेजस मिलने वाला है। यह विमान मिलने में एक साल से ज़्यादा की देरी हो गई है। तेजस एक भारतीय हल्का लड़ाकू विमान है। जो चौथी पीढ़ी का एक स्वदेशी विमान है और कई आधुनिक तकनीकों से लैस है। भारतीय वायु सेना के लिए यह एक महत्वपूर्ण विमान है।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की ओर से भारतीय वायुसेना को पहले ही शुरुआती उत्पादन में 40 तेजस विमान मिल चुके हैं। अब उसे एडवांस्ड A1 वेरिएंट मिलने वाला है। इज़राइली तकनीक की वजह से यह पश्चिमी देशों के मानकों के काफी करीब है। एक समय फ्रांस ने राफेल का सोर्स कोड देने से और अमेरिका ने लड़ाकू विमानों के इंजन की तकनीक भारत को देने से मना कर दिया था। ऐसे में अब इजरायल तकनीक वाले रडार ने तेजस को एक तरह से इन देशों की तुलना में महाबली बना दिया है।

तेजस में एक्टिव इलेक्ट्रॉनिक स्कैन एरे तकनीक लगी है। यह ऐसी तकनीक है जो दुश्मन के विमानों और मिसाइलों को आसानी से खोज लेता है। इसे इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी एल्टा ने बनाई है। इसने पहले वाले इजरायली रडार की जगह ली है। एल्टा एक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली भी दे रही है। पायलट, एल्बिट कंपनी का बनाया हुआ आधुनिक हेलमेट-माउंटेड साइट इस्तेमाल करेंगे। विमान राफेल कंपनी की रडार-निर्देशित डर्बी मिसाइलें ले जाएंगे। नए वेरिएंट के 83 विमानों में से हर एक में मल्टीमिलियन-डॉलर के इजरायली सिस्टम लगाए जाएंगे। ये सिस्टम भारत में ही स्थानीय कंपनियों के साथ मिलकर बनाए जाएंगे। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘मेक इन इंडिया’ नीति के अनुसार है। इस नीति के तहत अब हर तरह के रक्षा उपकरणों का उत्पादन देश में ही किया जाएगा।

एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे रडार एक आधुनिक रडार तकनीक है जिसकी खासियत ये है कि वो एक ही समय में कई लक्ष्यों को ट्रैक करने और विभिन्न प्रकार के मिशनों को संभालने में सक्षम है। यह रडार हवा से हवा, हवा से जमीन और हवा से समुद्र जैसे विभिन्न प्रकार के मिशनों को अंजाम दे  सकता है। यह रडार उच्च सटीकता के साथ लक्ष्यों को ट्रैक कर सकता है, जो आधुनिक हवाई युद्ध के लिए महत्वपूर्ण है।

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