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बृजलाल बने UP कांग्रेस अध्यक्ष : कितना मुफीद होगा जातिसाधक निर्णय, विरोध शुरू

By Shakti Prakash Shrivastva on October 3, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

लंबे अरसे बाद बड़े चिंतन-मनन के बाद आखिरकार रविवार को उत्तर प्रदेश कांग्रेस को नया अध्यक्ष मिल गया। जातिगत समीकरणों को साधते हुए पार्टी हाइकमान ने इस बार कई बड़े दावेदारों की दावेदारी दरकिनारे करते हुए पहली बार बीएसपी से आए दलित चेहरे बृजलाल खाबरी की ताजपोशी कर दी। लेकिन अभी ताजपोशी के चौबीस घंटे भी नहीं बीते कि पार्टी के अंदर खाने से लेकर सोशल मीडिया पर इस बाबत विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं कि आखिर जातिसाधो यह निर्णय जमीनी स्तर पर लगभग समाप्त प्राय पार्टी को क्या संजीवनी दे पाएगा। जमीनी हकीकत यही है कि उत्तर प्रदेश में फिलहाल जमीन में कांग्रेस दूर-दूर तक कहीं सीन में नही में है लेकिन यह भी सही है कि कांग्रेस को फिलहाल कोई बेहतर स्थिति लाने में कामयाब नही हो सकता है। जो नेता पार्टी अध्यक्ष बनने की दावेदारी कर रहे थे उनमें भी कोई ऐसा नही है जिसके लिए यह कहा जाए कि वो स्थिति बदल देगा। इसीलिए पार्टी हाइकमान ने यह निर्णय ले एक बार समझदारी भरा कदम उठाया है। उसका मानना है कि यदि जब खोने के लिए कुछ नहीं है तो क्यों न अपने से दूर हो चुके दलित कार्ड को फिर से रिझाने का एक प्रयास किया जाए। राजनीतिक के जानकार कांग्रेस के इस कदम को सूझ-बूझ भरा मान रहे हैं। विरोध करने वाले नेताओं का मानना है कि इतनी बड़ी पार्टी में अभी भी बड़ी संख्या में बड़े नेता है। उनके रहते हुए बाहर से आने वाले नेता पर पार्टी ने क्यों भरोसा जताया। इसके लिए बकायदे सोशल मीडिया पर विरोध दिखा लेकिन फिर धीरे-धीरे कुछ पोस्ट नेताओं ने डिलीट भी कर दिया। ऐसे नेताओं का कहना है कि जमीन पर पार्टी मृतप्राय हो चली है। ऐसे में पार्टी को उसे ध्यान में रख कर निर्णय लेने चाहिए। क्योंकि अंदर खाने उपजा यह विरोध पार्टी के लिए नुकसान दायक साबित हो सकता है।

पार्टी से ही जुड़े एक वरिष्ठ नेता की मानें तो उनका मानना है कि ऐसा नहीं है कि उत्तर प्रदेश कांग्रेस में जुझारू नेता और पार्टी के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने वाले लोगों की कमी है। ऐसे में उन्हे मौका देने की बजाय दूसरी पार्टी में लंबे समय तक काम करने वाले नेता को जब कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं के ऊपर थोपा जाएगा तो निश्चित तौर पर विरोध होना स्वाभाविक है।

यह कड़वी सच्चाई है कि उत्तर प्रदेश में इन दिनों कांग्रेस अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। राजनीतक विशेषज्ञों की मुताबिक कांग्रेस ने जातिगत समीकरणों के आधार पर बहुत लंबे समय बाद अपने प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव किया है। उनका मानना है कि संभव है पार्टी में विरोध हो रहा हो, लेकिन इसका पार्टी आलाकमान के लिए गए फैसले पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। उनका कहना है कि कांग्रेस में इस वक्त जितने भी नेता हैं, अगर पार्टी आलाकमान ने उन सब को दरकिनार करते हुए खाबरी पर दांव लगाया है, तो निश्चित तौर पर सोच समझकर और उत्तर प्रदेश की जातिगत समीकरणों के आधार पर ही लगाया होगा। पार्टी से जुड़े कुछ नेताओं का यह भी मानना है कि पार्टी ने बृजलाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर अपने खोए हुए वोट बैंक को वापस पाने की मुहिम में एक कदम आगे बढ़ाया है। बहुजन समाज पार्टी का जो कोर वोट बैंक है दरअसल वह कांग्रेस का ही असली वोट बैंक है, जो इस वक्त नेतृत्व विहीन होने के चलते भाजपा की ओर शिफ्ट हो गया है। पार्टी का कहना है कि खाबरी के माध्यम से उनका अपना कोर वोट बैंक वापस उनके साथ जुड़ेगा। हालांकि अब यह तो वक्त बताएगा कि खाबरी का निर्णय पार्टी के लिए फायदे का सौदा साबित होता है या घाटे का।

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