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मिल्कीपुर उपचुनाव …..योगी नीति से मिली जीत

By Shakti Prakash Shrivastva on February 9, 2025
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       शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
यूँ तो लोकतान्त्रिक व्यवस्था मे होने वाले किसी भी चुनाव में एक व्यक्ति के नाते कोई हार या जीत नहीं होती है। लेकिन व्यवहार में ऐसा देखा गया है कि जब किसी चुनाव का सम्पूर्ण प्रबंधन यानि व्यवस्था, प्रचार आदि की जिम्मेदारी किसी एक ही व्यक्ति के जिम्मे कर दिया जाता है तो उस चुनाव के हार और जीत दोनों का ही जिम्मेदार उसी को माना जाता है। हारने पर हार का और जीतने में जीत का। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश के माध्यम से इसे बखूबी समझा जा सकता है। जैसे अयोध्या की प्रतिष्ठापरक मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव और दिल्ली विधानसभा चुनाव में जब बीजेपी को शानदार जीत मिली तो सीधे तौर पर इसके लिए सूबे के मुखिया और दिल्ली चुनाव के लिए बीजेपी के स्टार प्रचारक रहे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी श्रेय दिया गया। वहीं दूसरी तरफ बीते लोकसभा चुनाव के परिणाम में बीजेपी की सीटें अपेक्षानुकूल नहीं रही तो उसके लिए भी सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ही जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की गई। यह अलग बात है कि पार्टी के अंदरूनी फ्रंट पर योगी को दोषी नहीं माना गया। चूंकि मिल्कीपुर चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए पार्टी द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को जिम्मेदार बनाया गया था। योगी ने भी बूथ प्रबंधन से लेकर प्रचार प्रबंधन तक की जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वहन किया। जब परिणाम आया तो पार्टी प्रत्याशी की रिकार्ड जीत हुई। लिहाजा इसका पूरा का पूरा श्रेय योगी आदित्यनाथ की उन नीतियों को दिया गया जिसके चलते उन्होंने यहाँ का प्रबंधन किया।
मिल्कीपुर मे यूँ तो आधे दर्जन से अधिक प्रत्याशियों ने भाग्य आजमाया लेकिन मुख्य मुकाबला सपा की तरफ से अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद के पुत्र अजीत प्रसाद, बीजेपी के चंद्रभानु पासवान और आसपा के सूरज प्रसाद के बीच ही रहा। इनमे बीजेपी प्रत्याशी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सपा प्रत्याशी को 61 हजार 710 मतों के अंतर से हरा दिया। इस जीत के महत्व को इसी से समझा जा सकता है कि बीते लोकसभा चुनाव में जितने अंतर से अयोध्या लोकसभा सीट समाजवादी पार्टी जीती थी उससे दोगुने से अधिक अंतर से मिल्कीपुर विधानसभा सीट में उसे हार मिली।
इस रिकार्ड जीत का श्रेय पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कुशल चुनाव प्रबंधन, बेहतर संवाद शैली, सख्त तेवर वाली छवि को दिया गया। योगी आदित्यनाथ ने अपनी नीतियों के तहत चुनाव संचालित करने के लिए सरकार के छः मंत्रियों को क्षेत्र में जिम्मेदारी दी थी। क्षेत्र में दो बार किए गए अपने प्रचार के दौरान स्थानीय मुद्दों समेत सपा के परिवारवाद को हराने और राष्ट्रवाद को जिताने का जो उन्होंने नारा दिया। उसे मिल्कीपुर की जनता ने बखूबी समझा और अपने मतों के जरिए भरपूर समर्थन बीजेपी को दिया। इसके चलते जहां योगी आदित्यनाथ सरकार की नीतियों पर जनता की मुहर लगी वहीं लोकसभा चुनाव में मिली हार से लगे दाग भी धुलने में पार्टी कामयाब रही। योगी आदित्यनाथ महज दो बार प्रचार करने मिल्कीपुर गए। लेकिन प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ जैसे प्रतिष्ठापरक आयोजन सहित दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली प्रचार की जिम्मेदारियों के बीच सामंजस्य बनाते हुए जिस तरह उन्होंने यहाँ जीत हासिल करने मे सफलता पाई वो इनके सियासी दक्षता को प्रमाणित करता है।

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