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डलझील बनाम नैनीझील

By Shakti Prakash Shrivastva on May 31, 2025
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                                                                   शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत इलाके श्रीनगर स्थित डलझील अपने चिकारा सेवा के लिए देश ही नहीं पूरी दुनिया में मशहूर है। ऐसे ही उतराखंड स्थित नैनीताल की नैनी झील भी पर्यटकों की पसंदीदा होने की वजह से देश में लोकप्रिय है। ये दोनों ही जगहें पहाड़ी इलाके में है। डलझील और नैनीझील दोनों ही के पास अनूठी नैसर्गिक वातावरण है। लेकिन इन दिनों एक खास वजहों से इन दोनों ही मशहूर जगहों की चर्चा हो रही हैं। ये वजह है पर्यटकों की कमी। दोनों ही जगहों का आर्थिक ढांचा पर्यटकों से होने वाली आय पर निर्भर करता है। लेकिन इस बार इन दिनों में गुलजार रहने वाले इन दोनों ही जगहों पर पर्यटकों का टोटा है। ऐसा होने के भी अपने कारण है। जैसे डलझील में पर्यटकों की कमी की सबसे बड़ी वजह पहलगाम जिले के बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले में दो दर्जन से अधिक पर्यटकों की हत्या से उपजा भय है जबकि नैनीझील या नैनीताल क्षेत्र में पर्यटकों की कमी की मूलवजह भारत-पाक तनाव के साथ-साथ नैनीताल क्षेत्र में बीते दिनों हुए सांप्रदायिक तनाव और सरकार द्वारा टोल टैक्स आदि में की गई वृद्धि जैसे कारण है।

आज जहां श्रीनगर के डलझील में पर्यटकों की ठसाठस भीड़ हुआ करती थी। डलझील में चिकारा वालों के यहाँ बुकिंग मिलना मुश्किल हुआ करता था आज पर्यटकों के लाले पड़े हुए है। जीना मुश्किल हो गया है। इस सीजन में गुलजार रहने वाले इस पूरे इलाके में सन्नाटा पसरा है। हालांकि इस स्थिति से उबरने के लिए उमर अब्दुल्ला की सरकार ने कुछ ऐसे प्रयास शुरू किये है जिससे पर्यटकों के मन में बैठे खौफ को दूर करते हुए हालात पहले जैसे बहाल कराए जायें। इसके लिए सरकार की तरफ से चिकारा, टैक्सी यूनियनों आदि के सहयोग से रोडशो जैसे आयोजन किये जा रहे है। जबकि नैनीताल के नैनीझील की स्थिति या समस्याए कुछ भिन्न है। यहाँ व्यापारियों से वसूले जाने वाले टैक्सेस आदि में हुई बढ़ोत्तरी के साथ-साथ नैनीताल क्षेत्र में हुए सांप्रदायिक तनाव आदि के चलते पर्यटकों ने अपनी प्राथमिकताएं बदल दी है। नैनीताल की जगह उन्होंने अपना रुख अन्य पर्यटन स्थलों की ओर कर लिया है। पीक सीजन होने के बावजूद यहां के होटल आधे खाली पड़े हैं। बाजारों से रौनक गायब है। नैनी झील में नावें बिना पर्यटकों के एक किनारे खड़ी हैं। टूरिज्म से जुड़े लोगों का कहना है कि अब तक करीबन 60 करोड़ रुपए का नुकसान हो चुका है। नैनीताल होटल एसोसिएशन के मुताबिक, पिछले साल मई में जहां 90% तक होटल बुकिंग हो रही थी, इस बार वो घटकर सिर्फ 10–15% रह गई है। कारोबारियों का कहना है, यहां के हालत बेहद खराब हैं, इसका असर हर जगह देखने को मिल रहा है, इसमें होटल, रेस्तरां टैक्सी सर्विस, दुकानें और बोटिंग, सबका धंधा ठप पड़ चुका है। बता दें, हाल के हफ्तों में 90% से ज्यादा होटल बुकिंग कैंसिल हो गई हैं, जिसकी वजह बताई जा रही है सुरक्षा को लेकर डर। वहीं यहां कमरे खाली पड़ें हैं और व्यापारियों के लिए स्टाफ की सैलरी देना मुश्किल हो गया है। हालांकि कुछ दुकानदारों ने कहा कि पीछे कुछ दिनों में टूरिस्ट की संख्या में इजाफा हुआ है। अगर हालात सामान्य रहे, तो अगले कुछ हफ्तों में पर्यटक लौट सकते हैं।

 

 

 

 

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