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बिहार में जनता के सुंदर राज का सपना सँजोये प्रशांत किशोर

By Shakti Prakash Shrivastva on October 29, 2022
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव की आवाज में  पूरी रिपोर्ट  सुनने के लिए क्लिक करें।

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

कभी एक समृद्ध अतीत का धनी रहा बिहार राज्य क्या फिर अपना सुंदर अतीत दुहरा पाएगा? यह प्रश्न इन दिनों आम बिहारियों के मन में मथ रहा है। ऐसे में अगर बिहार से आ रही खबरों पर गौर करें तो आपको एक खबर अवश्य मिलेगी कि देश में राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले प्रशांत किशोर इन दिनों बिहार भ्रमण पर है। प्रशांत द्वारा एक सोची समझी रणनीति के तहत किए जा रहे पदयात्रा रूपी भ्रमण की चर्चा इन दिनों सुर्खियों में हैं। उनके भ्रमण को अपार जनसमर्थन मिल रहा है। जानकारों का मानना है कि राष्ट्र्पिता महात्मा गांधी और लोकनायक जय प्रकाश नारायण के बाद पहली बार किसी राजनेता की यात्रा के प्रति आम बिहारियों में ऐसा जबर्दस्त आकर्षण देखा जा रहा है। रणनीतिकार से राजनेता बने श्री किशोर की बातें भी लोगों को समझ में आ रही है। यही वजह है कि कुछ दूर चलने के बाद इनकी पदयात्रा में चल रही भीड़ के चेहरे बदल जाते हैं। पुराने ग्रामीण घर वापस हो जाते है और उनकी जगह नए ग्रामीण ले लेते हैं। यानि की प्रशांत के साथ चलने वाली भीड़ बिकाऊ, बुलाऊ या चलताऊ नहीं है बल्कि स्वतः स्फुर्त है। श्री प्रशांत के राजनैतिक कौशल से जो लोग वाकिफ हैं वो जानते है कि आज केंद्र में नरेंद्र मोदी को और बिहार में नितीश को सत्तारूढ़ करने में प्रशांत का कितना योगदान है। उनकी इन्ही स्थापित कुशलता की वजह से विशेषज्ञ भी मान रहे है कि प्रशांत की जो चाहत है उसके पूरी होने की संभावना अधिक है। हालांकि प्रशांत अपने उद्देश्य के बाबत महज इतना बताते हैं कि अभी मेरी प्राथमिकता बिहार और बिहार के लोगों की जमीनी समस्याओं को समझना है। इसमें चाहे साल लगे या दस साल मुझे निरंतर इसमें लगे रहना है। इसके बाद आगे के लिए सब कुछ परिस्थितियों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा। गांधी जयंती के मौके पर पश्चिमी चंपारण जिले की भीतिहरवा गांधी आश्रम से शुरू हुई अपनी पदयात्रा को प्रशांत ने जन सुराज पदयात्रा नाम दिया है। लगभग साढ़े तीन हजार किलोमीटर की पदयात्रा में प्रशांत प्रदेश के लगभग हर प्रखण्ड और पंचायत तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। इस दौरान उनकी कोशिश है कि आम अवाम को उनका अधिकार समझाया जाए। लगभग 14 महीने के टाइम फ्रेम वाली इस यात्रा की शुरुआत पश्चिमी चंपारण से करने के पीछे भी प्रशांत की अपनी रणनीति है। पिछले लगभग तीन हफ्तों में लगभग सैकड़ों गावों की यात्रा कर चुके श्री किशोर के साथ लगभग ढाई-तीन सौ इलाकाई लोगों का हुजूम रहता है। इस दौरान वे ग्रामीणों से न केवल मिलते है बल्कि उनसे गाँव-गिरांव के साथ-साथ देश-दुनिया की भी चर्चा करते हैं। श्री किशोर का मानना है कि जैसे गुजराती व्यावसायिक दृष्टि से बहुत समृद्ध है वैसे ही बिहारी भी राजनीतिक तौर पर बहुत समृद्ध हैं। बेशक वो गरीब है कमजोर है लेकिन उनकी राजनीतिक परिपक्वता किसी मायने में औरों से कमतर नही है। बिहारियों की इसी क्षमता को श्री प्रशांत उभारना चाहते हैं। वो चाहते हैं कि जो बिहारी बिहार से बाहर जाकर अपनी आजीविका के साथ-साथ दूसरों की आजीविका का साध्य बनता है। उसे अपनी जगह पर कैसे समर्थ बनाया जाये। बिहार से युवाओं के हो रहे पलायन, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों के लिए चिंतित प्रशांत इसके स्थायी निदान के लिए संकल्पित हैं। उनका सपना है कि बिहार में जनता का सुंदर राज स्थापित हो। इसके लिए सबसे पहले आवश्यक है कि बिहार को मोदी के वायदे वाली, लालू के परिवारवाद वाली और नीतीश की भ्रष्टाचारी सरकार से निजात दिलाई जाये।

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