Responsive Menu
Add more content here...
August 9, 2026
ब्रेकिंग न्यूज

Sign in

Sign up

आखिर डर क्यों गए अखिलेश

By Shakti Prakash Shrivastva on January 24, 2023
0 506 Views

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

मैनपुरी उपचुनाव में मिली रिकार्ड जीत से उत्साहित सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव अपने नेचर के विरुद्ध अब अपना अधिकांश समय पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच बिता रहे है। इतना ही नहीं उनकी नागवार लगने वाली बातों तक को न केवल अनसुना कर रहे है बल्कि कभी-कभी पार्टी नीतियों के विरुद्ध उन्हे स्वीकार भी कर रहे है। लेकिन पिछले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी में शामिल होने वाले वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य के एक हालिया दिये गए बयान पर नाराजगी जताते हुए उसे उनकी व्यक्तिगत राय करार दे उससे उन्होने किनारा कर लिया। राजनीतिक पंडित अखिलेश के इस व्यवहार से हतप्रभ हैं। उन्हे अखिलेश की ये सियासत समझ नही आयी। कुछ ने अखिलेश के इस कदम को डर कर उठाया गया कदम बताया। उनका मानना है कि भले ही अखिलेश धर्मनिरपेक्षता की चादर ओढ़ने का दंभ भरते है लेकिन उनके इस कदम से ये साबित होता है कि कहीं न कहीं उन्हे बहुसंख्यक हिन्दू समाज के नाराज होने का डर सता रहा था। इसीलिए उन्होने स्वामी प्रसाद मौर्य के रामचरित मानस पर प्रतिबंध लगाने सरीखे बयान पर नाराजगी जताई थी।

ग्यारह जंनवरी को बिहार के शिक्षा मंत्री ने रामचरित मानस को नफरत फैलाने वाला ग्रंथ कहा था। उसके बाद वरिष्ठ सपा नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरित मानस पर दिए गए एक बयान में इस पवित्र ग्रंथ पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि रामचरित मानस में दलितों और महिलाओं का अपमान किया गया है। तुलसीदास ने ग्रंथ को अपनी खुशी के लिए लिखा था। करोड़ों लोग इसे नहीं पढ़ते। इस ग्रंथ को बकवास बताते हुए कहा कि सरकार को इस पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए। इतना ही नहीं स्वामी प्रसाद ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि धर्म के ठेकेदार ही धर्म को बेच रहे हैं। ये शास्त्री ढोंग फैला रहे हैं। उन्होने धीरेन्द्र शास्त्री के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की।

सपा की तरफ से वरिष्ठ नेता रविदास मेहरोत्रा ने बयान जारी कर कहा कि ये स्वामी प्रसाद मौर्य का निजी बयान है। सियासी जानकारों का यह भी मानना है कि अखिलेश बहुसंख्यक हिन्दू समाज को नाराज नहीं करना चाहते है इसीलिए उन्होने ऐसा कहा। स्वामी के इस बयान पर बीजेपी नेत्री अपर्णा यादव भी भड़कीं। उन्होने कहा कि मौर्य अपने चरित्र का उदाहरण दे रहे हैं। सच तो ये है कि उन्होने रामचरित मानस पढ़ा ही नहीं है। राम भारत का चरित्र है। राम आज भी उतने की महत्वपूर्ण हैं। रामचरित मानस का कई भाषाओं में अनुवाद हो चुका है। हजारों वर्षों के बाद भी आज भी कहीं इसका पाठ होता है तो नया जैसा लगता है। हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई सभी राम को सम्मान देते हैं। इतने महत्वपूर्ण ग्रंथ पर टिप्पणी करना गलत है। ये बयान स्वामी प्रसाद की मानसिकता को दर्शाता है।

 

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *