Responsive Menu
Add more content here...
June 20, 2026
ब्रेकिंग न्यूज

Sign in

Sign up

परिवारवाद के साये में बीएसपी !

By Shakti Prakash Shrivastva on August 16, 2023
0 408 Views

शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

           उत्तर प्रदेश की सियासत में परिवारवाद एक ऐसा शब्द है जिसे यहाँ का हर राजनीतिक दल दूसरे दल को नीचा और सिद्धान्त विहीन राजनीति वाला साबित करने के लिए इस्तेमाल करता है। जबकि सच्चाई ये है कि कोई भी ऐसी पार्टी यूपी की सियासत में नहीं है जो इससे अछूती हो। कभी परिवारवाद पर सबको ललकारने वाली पार्टी बीएसपी भी अब उसी राह पर चलने लगी है।

दूसरे दलों पर परिवारवाद का सबसे अधिक ढिंढोरा पीटने वाली बीजेपी को ही लें तो लखनऊ से सांसद और देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह नोएडा से पार्टी के विधायक हैं। बीजेपी को सरकार चलाने में सहयोग देने वाली पार्टी निषाद पार्टी की बात करें तो पार्टी सुप्रीमो संजय निषाद स्वयं विधान परिषद सदस्य हैं और प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। उनका बड़ा बेटा प्रवीण निषाद बीजेपी से संत कबीरनगर का सांसद है और छोटा बेटा सरवन निषाद भी बीजेपी से चौरीचौरा का विधायक है। बीजेपी की दूसरी सहयोगी पार्टी अपना दल (सोनेलाल) की बात करें तो उसकी अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल सांसद हैं और केंद्र सरकार में मंत्री हैं। जबकि उनके पति आशीष पटेल उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और एमएलसी हैं। अगर नए सहयोगी बने सुभासपा की बात करें तो ओमप्रकाश राजभर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं विधायक है तो उनके बेटे अरविंद और अरुण राजभर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं।

जहां तक प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी की बात है तो उसके अध्यक्ष अखिलेश यादव है, उनकी पत्नी डिंपल यादव मैनपुरी से सांसद हैं, प्रोफेसर राम गोपाल यादव पार्टी के राज्यसभा सांसद है, शिवपाल यादव विधायक हैं, धर्मेंद्र यादव, पूर्व सांसद हैं, अक्षय यादव भी पूर्व सांसद हैं, तेज प्रताप यादव भी पूर्व सांसद हैं, अंशुल यादव जैसे ये सभी दिग्गज समाजवादी पार्टी के सदस्य है और एक ही परिवार के हैं। लेकिन अब सियासत का आलम ये है कि बीएसपी जैसी पार्टी जिसके संस्थापक मान्यवर कांशीराम ने हमेशा परिवारवाद का विरोध किया। उनका मानना था कि राजनीति में परिवारवाद और भाई-भतीजावाद की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यही वजह रही कि अपनी राजनीतिक विरासत तक उन्होंने अपने परिवार के किसी सदस्य की बजाए मायावती को सौंपी। इसी कारण परिवारवाद को लेकर मायावती भी कांग्रेस, बीजेपी, सपा पर हमेशा हमलावर रहीं। लेकिन अब वही मायावती अब परिवारवाद को प्रश्रय देते दिख रही हैं। पिछले महीने मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को विधानसभा चुनाव होने वाले राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना का चुनाव प्रभारी बना दिया। इससे पहले पिछले लोकसभा चुनाव के बाद मायावती ने अपने भाई आनंद कुमार को पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और भतीजे आकाश आनंद को पार्टी का नेशनल कोआर्डिनेटर बनाया था। भाई और भतीजे के बाद मायावती अब भतीजे आकाश के ससुर और पार्टी के पुराने नेता डॉक्टर अशोक सिद्धार्थ को 10 राज्यों का प्रभारी बनाया है। पहले से ही 7 राज्यों के चुनाव प्रभारी के तौर पर कामकाज देख रहे अशोक सिद्धार्थ को तीन और राज्यों के प्रभार की जिम्मेदारियाँ दे दी गईं है। इस तरह अब अशोक सिद्धार्थ को कुल 10 राज्यों की जिम्मेदारी मिल गई है। इस तरह अब राज्य की अन्य राजनीतिक दलों की भांति बीएसपी भी परिवारवाद की राह पर चल पड़ी है। जिस तरह से बीएसपी में अब भाई भतीजावाद और परिवारवाद की झलक देखने को मिल रहा है। उसे लेकर यूपी में मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी का साफ तौर पर कहना है कि बीएसपी परिवारवाद की ओर बढ़ रही है। विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक और पूर्व कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय की मुताबिक लोग अपनी सुविधा के हिसाब से ही हर एक चीज का विश्लेषण करते हैं। तभी मायावती अपनी सुविधा के हिसाब से ये आरोप लगाया करती थीं, लेकिन अब वो अपनी सुविधा के अनुसार इसका इस्तेमाल कर रही हैं।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *