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बिहार बीजेपी-जेडीयू में ठनी !

By Shakti Prakash Shrivastva on March 16, 2025
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                                                                                 शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

बिहार में इस साल के अंत तक विधानसभा का चुनाव होना है। यहाँ एक तरफ बीजेपी-जेडीयू का सत्तासीन गठबंधन इस फिराक में है कि उनकी सत्ता बरकरार रहे। वही दूसरी तरफ कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल का हर संभव प्रयास है कि उसका सियासी बनवास खत्म हो और सत्ता पर काबिज हो जाएँ। लेकिन मौजूदा सियासी हालात यह बया कर रहे हैं कि यहाँ सत्तासीन गठबंधन के मुख्य घटक दलों के बीच ही रिश्ते तल्ख होने लगे है। कई ऐसे मुद्दे है जिन पर इनके बीच टकराहट कम होने की बजाय बढ़ती जा रही है। मुद्दे भी ऐसे हैं जिनका स्थायी समाधान असंभव है। ऐसे में दोनों मुख्य दलों के बीच अगर तल्खी कम नहीं हुई तो यह तय है कि बिहार में सत्ता पलट संभव हो जाएगा। देश का हिन्दू राष्ट्र बनाना, औरंगजेब पर छिड़ा विवाद और चुनाव पूर्व मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान जैसे कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे है जिस पर दोनों दलों में गतिरोध बना हुआ है। इससे दोनों के बीच रिश्ते की कड़वाहट बढ़ रही है जो बिहार की भावी सियासत के लिए उपयुक्त नहीं है।

बिहार में चर्चित कथा वाचक बागेश्वर बाबा धीरेंद्र शास्त्री के दुबारा हिन्दू राष्ट्र के लिए जनजागरण यात्रा निकालने के मुद्दे पर बीजेपी और जेडीयू आमने-सामने आ गए हैं। बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल की मुताबिक देश में धर्म निरपेक्षता इमरजेंसी के दौरान थोप दिया गया था। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर ने जो संविधान बनाया है उसमें धर्म निरपेक्षता नहीं है। इस तरह भारत हिंदू राष्ट्र है।

बीजेपी के इस बयान पर जीडीयू नेता जमा खान ने पलटवार करते हुए कहा कि बिहार में जब तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री हैं तब तक यहां धर्म निरपेक्षता को कोई खतरा नहीं है। इस मुद्दे पर जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने बीजेपी विधायक हरिभूषण ठाकुर बचौल के साथ-साथ और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि इन नेताओं को यह पता होना चाहिए कि बिहार में धर्म के नाम पर वोट करने वालों की संख्या 1.4 फीसदी है।

औरंगजेब की तारीफ करने के चलते समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र विधायक अबू आजमी के विधानसभा से निलंबित किए जाने के मसले पर भी दोनों दलों में टकराहट बढ़ती जा रही है। इस मसले पर जेडीयू के एमएलसी खालिद अनवर का मानना है कि देश के इतिहासकारों ने औरंगजेब के बारे में अलग-अलग राय रखी है। कुछ बड़े इतिहासकार औरंगजेब को एक अच्छा शासक मानते है। तो दूसरे कुछ ऐसे भी है जो औरंगजेब को जालिम के रूप में फ्रेम करने में जुटा हुआ है। जबकि दिल्ली के बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने पटना में आकर कहा कि जो भी औरंगजेब का समर्थन करता है उनको इंगित करके उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए। इसके अलावा गठबंधन होने और सत्ता में भागीदार होने के बावजूद बीजेपी और जेडीयू में इस बात का भी संघर्ष है कि आखिर गठबंधन की तरफ से मुख्यमंत्री का उम्मीदवार कौन होगा। क्योंकि बीजेपी के बिहार इकाई प्रमुख अध्यक्ष दिलीप जायसवाल और वरिष्ठ मंत्री प्रेम कुमार ने जिस तरह से कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार के चेहरे पर लड़ा जाएगा, लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा इसका फैसला चुनाव बाद होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पटना यात्रा के दौरान नीतीश को अपना लाड़ला बताया लेकिन मुख्यमंत्री के नाम पर उन्होंने चुप्पी साढ़े रखी।

इस तरह से चुनावी वर्ष में दोनों दलों के बीच पनपी ये गलतफहमियाँ दोनों ही दलों के भविष्य के लिए बहुत मुफीद नहीं है। अगर सत्ता में वापसी करनी है तो जल्द से जल्द इस विवाद का समाधान करना होगा।

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