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October 9, 2026
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योगी नहीं छोड़ेंगे यूपी!

By Shakti Prakash Shrivastva on March 25, 2025
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                                                                                       शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

मीडिया में इन दिनों लगातार इस बात की चर्चा हो रही है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ गुजरात लाबी की चाल सफल हो गयी है। जल्द ही यूपी से योगी आदित्यनाथ की विदाई की खबर मिल सकती है। मतलब योगी आदित्यनाथ को यूपी की कुर्सी छोड़ना होगा और बीजेपी आलाकमान योगी को केंद्र सरकार या संगठन में कही समायोजित करेगी। लेकिन योगी को नजदीक से जानने वाले यह बखूबी जानते है कि योगी जितना ईमानदार और कर्मठी नेता है उतने ही वो जिद्दी भी है। इसका मुजाहरा सांसद रहते हुए वो कई बार कर भी चुके हैं। उनके इस चरित्र से पार्टी संगठन भी बखूबी जानता है। अगर उन्होंने तय कर लिया है कि उन्हे प्रदेश से बाहर नहीं जाना है तो फिर कोई भी व्यक्ति या परिस्थितियाँ ऐसी नहीं है जो योगी को उनके निर्णय से इतर दबाव में कोई निर्णय करने को बाध्य कर दे। मतलब साफ है कि ऐसे में योगी प्रदेश से बाहर हरगिज नहीं जाएंगे। न केन्द्रीय मंत्रिमंडल में और न ही संगठन अध्यक्षी में।

जबसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नागपुर यात्रा और उनकी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिलने के शेड्यूल की खबरे आई है तबसे सोशल मीडिया समेत सभी मीडिया मंचों पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ी नकारात्मक-सकारात्मक खबरें तैर रही है। अपने-अपने तरीके के तर्कों के आधार पर कोई योगी आदित्यनाथ को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना रहा है तो कोई केन्द्रीय मंत्रिमंडल का प्रभावशाली कैबिनेट मंत्री। कुछ ऐसे भी है जिन्होंने योगी की महाकुंभ और उपचुनावों में मिली सफलता से उपजी लोकप्रियता के आधार पर मुख्यमंत्री पद पर बने रहने की खबरे भी दे रहे है। लेकिन योगी आदित्यनाथ के स्वभाव को जानने वालों खासकर जिन्होंने लगभग 20 साल पहले विधानसभा चुनाव में गोरखपुर सीट से बीजेपी के कद्दावर नेता और कई बार के कैबिनेट मंत्री शिवप्रताप शुक्ल के खिलाफ शहर के बालरोग विशेषज्ञ डॉ राधा मोहन दास अग्रवाल जैसे नए चेहरे को खड़ा कर चुनाव जितवाते देखा है वो बखूबी जानते हैं। इतना ही नहीं जिन्होंने विधानसभा चुनाव में टिकट वितरण से नाराज होकर बीजेपी आलाकमान को बगावती तेवर का एहसास कराने वाले योगी का दौर देखा है। वो भी हरगिज यकीन नहीं करेंगे। ऐसे में योगी को जानने वाले पिछले एक पखवारे में दो बार योगी आदित्यनाथ द्वारा गोरखपुर वापसी की चर्चा किये जाने को भी लेकर चिंतन-मनन कर रहे है। अगर योगी ने दो मंचों पर किसी न किसी रूप में गोरखपुर वापसी की इच्छा जाहिर की है तो उनके अंदर के निर्णय की दृढ़ता का अंदाजा लगाया जा सकता है। इसका सीधा-सपाट अर्थ है कि योगी आदित्यनाथ ने अपने स्तर पर यह मन बना लिया हैं कि उन्हे लखनऊ से आगे दिल्ली का रुख नहीं करना है। और अगर उन्होंने ऐसा मन बना लिया है तो कायासबाजियाँ कुछ भी होती रहे मीडिया कुछ भी राग अलापता रहे योगी समझौता करने वाले नहीं है। उनके इस निर्णय से सरकार का नुकसान हो या पार्टी का इसकी परवाह एक सीमा के बाद योगी आदित्यनाथ नहीं करते हैं। ऐसे निर्णय से होने वाले नफा-नुकसान की फिक्र जिसे करना हो वो करे।

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