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October 8, 2026
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मंत्री पर भड़के BJP के पूर्व सांसद!

By Shakti Prakash Shrivastva on June 18, 2024
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                                                                                शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

हार और जीत दोनों को ही पचा पाना भी एक कौशल माना जाता है। अमूमन ऐसा देखा गया है कि सियासत में जीत मिलने पर जीतने वाला अमर्यादित हो जाता है। ऐसे ही हार पर भी बहुतेरों के व्यवहार बदल जाते है। इन दिनों लोकसभा चुनाव में मिली हार से बौखलाए बीजेपी के ऐसे ही एक पूर्व सांसद का वीडियों सोशल मीडिया पर खासा वायरल हो रहा है। वायरल मीडिया में पूर्व सांसद अपनी ही सरकार के एक मंत्री और एक जिलाध्यक्ष पर जमकर नाराज है। अपनी हार का ठीकरा भी उन्ही दोनों के माथे फोड़ रहे हैं।

वायरल वीडियों में पत्रकारों से मुखातिब पूर्व सांसद सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र के हैं। इनका नाम रविंद्र कुशवाहा हैं और ये सलेमपुर से बीजेपी के प्रत्याशी थे। वायरल वीडियो में श्री कुशवाहा की मुताबिक वो लोकसभा का चुनाव लगभग साढ़े तीन हजार के अंतर से हारे है। उनका आरोप है कि उनकी हार में सलेमपुर की पार्टी विधायक और सरकार में राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम और बलिया के जिलाध्यक्ष और पूर्व विधायक संजय यादव का हाथ है। अपनी हार का ठीकरा सीधे तौर पर इन दोनों पर फोड़ते हुए श्री कुशवाहा ने संजय यादव पर सपा के एजेंट के तौर पर काम करने का आरोप भी लगाया। इस काम में उनका साथ दिया सलेमपुर की विधायक और राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम ने। उन्होंने कहा कि इन दोनों की वजह से ही उन्हे सपा उम्मीदवार के हाथों लगभग साढ़े तीन हजार वोटों से शिकस्त मिली।

दरअसल सलेमपुर लोकसभा क्षेत्र में दो विधानसभा देवरिया जिले और तीन विधानसभा क्षेत्र बलिया जिले के है। इनमें देवरिया जिले की भाटपाररानी और सलेमपुर (सुरक्षित) और बलिया की  बांसडीह, सिकंदरपुर और बेलथरा रोड (सुरक्षित) विधानसभा क्षेत्र है। जिस तरह रविवार को अपने आवास पर बुलाए गए प्रेसवार्ता में पत्रकारों से मुखातिब पुर सांसद ने अपनी ही पार्टी के नेताओं पर अपने तेवर दिखाए उसे देख कही से ये नहीं लगता कि ये अपने को अनुशासित कहने वाली पार्टी बीजेपी के सांसद रह चुके हैं। वो भी एक बार नहीं दो-दो बार के। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि बलिया के विधानसभाओं में उनकी हार वहाँ के पार्टी जिलाध्यक्ष संजय यादव की वजह से हुई है। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही जिलाध्यक्ष उनकी खिलाफत कर रहे थे। वो अपने मंडल अध्यक्षों तक पर दबाव डालकर मेरी खिलाफत करने को कहते रहे। मेरे हराने में उनकी भूमिका शुरू से ही रही है। इसमें उनकी पूरी टीम लगी हुई थी। मेरा वक्ष चले तो एक क्षण भी इस आदमी को जिलाध्यक्ष न रहने दूं। इस पर पार्टी को निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने संजय यादव के साथ सलेमपुर की विधायक और सरकार में राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि एक भी दिन मंत्री मेरे प्रचार के लिए घर से नहीं निकली। उन्होंने सुनियोजित तरीके से मेरा विरोध किया और मुझे हराने के लिए अपने लोगों को प्रेरित किया। अब जबकि केंद्र में सरकार पार्टी की ही बनी है। ऐसे में पार्टी के पूर्व सांसद द्वारा पार्टी अनुशासन का इस तरह उल्लंघन करना कई तरह के सियासी संकेत दे रहे है। जिसका अर्थ समय के साथ सब के सामने होगा।

 

 

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