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August 10, 2026
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वक्फ के चलते बिखर न जाए एनडीए !

By Shakti Prakash Shrivastva on April 6, 2025
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                                                                                     शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

बिना किसी विशेष व्यवधान के संसद के दोनों ही सदनों में सरकार द्वारा पेश किया गया वक्फ संशोधन विधेयक आखिरकार गुरुवार को राज्यसभा में भी पास हो गया। लेकिन अब इस विधेयक को लेकर देश में सियासी संकट बढ़ने लगा है। खासकर एनडीए यानि नेशनल डेमोक्रेटिक एलायन्स के उन घटक दलों के सामने यह संकट अधिक दिख रहा है जिसका सियासी चरित्र कमोबेश धर्मनिरपेक्ष है। गठबंधन में शामिल राष्ट्रीय लोकदल और जनता दल यूनाइटेड ऐसे ही दलों में शुमार है। दिल्ली में देर रात वक्फ विधेयक पारित हुआ और सुबह से ही बिहार में सियासी गतिविधियां स्पीड पकड़ ली। गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रही जनता दल यूनाइटेड के मुस्लिम नेताओं में बगावती सुर मुखर होने लगे। सिर्फ जनता दल यूनाइटेड ही नहीं बल्कि कमोबेश ऐसा ही मुस्लिम नेताओं का विरोध सरकार में सहयोगी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अपना खासा जनाधार रख्नने वाली राष्ट्रीय लोकदल को भी झेलना पड रहा है। अभी तो महज दिन-दो दिन ही बीते है लेकिन अगर ऐसा ही विरोध और बढ़ा तो निःसंदेश एनडीए गठबंधन के सामने संकट की स्थिति खड़ी हो सकती है।

संसद के दोनों ही सदनों में वक्फ संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान एनडीए गठबंधन के सभी सहयोगी दलों में जबरदस्त सामंजस्य देखने को मिला। विपक्षी दलों द्वारा समय-समय पर ललकारने वाले मुद्दों पर भी सहयोगी दलों के नेताओं ने कोई खास रुचि नहीं दिखाई। बल्कि अपना पक्ष रखते समय विधेयक की पुरजोर वकालत भी की। लेकिन इन दलों के किसी बड़े नेताओं की तरफ से कोई नकारात्मक टिप्पणी अभी तक नहीं आई है। अभी तक जो विरोध हुआ है वो संगठन के पदाधिकारियों खासकर मुस्लिम पदाधिकारियों की तरफ से ही हुआ है। जैसे राष्ट्रीय लोकदल के प्रदेश महासचिव शाहजेब रिजवी ने वक्फ बिल पर सरकार का समर्थन करने से नाराज होकर अपने पद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया है। शाहजेब रिजवी ने एक वीडियो जारी कर पार्टी प्रमुख जयंत चौधरी के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस पार्टी को मुसलमानों ने अपनी ताकत से मजबूत किया, वही पार्टी अब उनके खिलाफ बने कानून के पक्ष में खड़ी हो गई है। शाहजेब ने इसे मुसलमानों के साथ धोखा करार दिया और कहा कि जयंत चौधरी का यह फैसला उनके समर्थकों की भावनाओं को आहत करता है।

शाहजेब रिजवी के विरोध से पहले ऐसा ही विरोध बिहार में सत्तारूढ़ पार्टी जनता दल यूनाइटेड में भी हुआ। यहाँ पार्टी के मुस्लिम नेताओं ने विरोध का बिगुल फूँक दिया है। सबसे पहले पूर्वी चंपारण के मोहम्मद कासिम अंसारी ने पार्टी छोड़ी और फिर जमुई से नवाज मलिक ने भी इस मुद्दे पर नीतीश कुमार की पार्टी से दूरी बना ली। हालांकि पार्टी हाइकमान ने इन दोनों को पार्टी पदाधिकारी होने से इन्कार किया है। पार्टी छोड़ने वाले नेता चाहे राष्ट्रीय जनता दल के हों या जनता दल यूनाइटेड के लेकिन दोनों ही दल के मुस्लिम नेताओं का मानना है कि इस विधेयक में मुस्लिम हितों की अनदेखी की गई है। इसके लिए उन्होंने जनता दल यूनाइटेड सुप्रीमो नितीश कुमार और राष्ट्रीय लोकदल के चौधरी जयंत चौधरी को जिम्मेदार माना है।

राष्ट्रीय लोकदल में बगावत शुरू हो गया है जबकि जनता दल यूनाइटेड में इस्तीफे भी शुरू हो गए हैं। ऐसे में दोनों ही पार्टियों के आलानेताओं का पुरजोर प्रयास हो रहा है कि ऐसे हालात को और बिगड़ने से रोका जाए। इसके लिए नेताओं ने आलाकमान के निर्देश पर कोशिशें शुरू कर दी है।

 

 

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