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यूपी की जेल से रिहा होगा दाऊद का माफिया दोस्त !

By Shakti Prakash Shrivastva on August 17, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

            योगी आदित्यनाथ की बीजेपी सरकार में माफियाओं ने या तो अपराध से तौबा कर लिया है या प्रदेश छोड़ बाहर निकल गए हैं। क्योंकि इस बाबत सूबे के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही योगी आदित्यनाथ ने यह ऐलान कर दिया था कि अपराध, अपराधियों और भ्रष्टाचार पर जीरो टालरेंस की नीति प्रदेश में अपनायी जाएगी। उन्होंने प्रदेश के माफियाओं को चेतावनी देते हुए यह भी कहा था कि वो या तो अपराध छोड़ दें या प्रदेश वरना हम उन्हे छुड़ा देंगे। बाद के दिनों में ऐसा दिखा भी। बिकरू कांड सहित कई मौके इसके प्रमाण हैं। यही वजह है कि दशकों से अपराध और अपराधियों का दंश झेल रही यूपी की जनता को सरकार की कानून व्यवस्था अच्छी लगी और उसने दुबारा अपने मताधिकार का प्रयोग कर योगी आदित्यनाथ को सूबे की कमान सौंप दी। लेकिन अब इसी सरकार में कभी दाऊद इब्राहिम सरीखे अंतर्राष्ट्रीय अपराधी के नजदीकी रहे और उत्तर प्रदेश की जेल में सजा काट रहे एक कुख्यात अपराधी को रिहा करने की कवायद की जा रही है। उसके साथ दो और अपराधियों को भी रिहा करने की योजना है। लेकिन इस खबर से यह कत्तई मानने की आवश्यकता नहीं है कि सख्त योगी सरकार अचानक किसी दबाव में ऐसा करने जा रही है। क्योंकि ये कुख्यात अपराधी जिन्हे रिहा किए जाने की योजना है उनकी सजा की मियाद पूरी हो चुकी है। उन्होंने अपनी निर्धारित 25 साल की सजा पूरी कर ली है।

जिस अपराधी की चर्चा हो रही है वो है नब्बे के दशक का सबसे कुख्यात माफिया डान ओम प्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू श्रीवास्तव। तीन दशक पहले तक जरायम की दुनिया में उसे किडनैपिंग किंग के नाम से जाना जाता था। बबलू सहित इसके दो साथियों मंगेश उर्फ मँगे और कमल किशोर सैनी को पुणे के कस्टम अधिकारी एल डी अरोड़ा की सरेआम गोलियों से भून कर हत्या किये जाने की जुर्म में सीबीआई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा के बाद फरार चल रहे इनको मारीशस से गिरफ्तार कर देश लाया गया और 1999 में बरेली की सेंट्रल जेल में डाल दिया गया। प्रदेश की राजधानी लखनऊ की यूनिवर्सिटी में छात्र राजनीति से शुरुआत कर अपराध जगत में अपना डंका बजाने वाले बबलू श्रीवास्तव एक समय अंडरवर्ल्ड डान दाऊद इब्राहीम का नजदीकी था और उसके लिए काम करता था। गाजीपुर के मूल निवासी बबलू के पिता पॉलिटेक्निक में प्रिंसिपल थे। बबलू का भाई  सेना में कर्नल था। अच्छे संस्कारित परिवार में परवरिश होने के बावजूद लखनऊ यूनिवर्सिटी में ला की पढ़ाई के दौरान एक ऐसी परिस्थिति बनी जब बबलू ने 1982 में एक छात्र को चाकू मार दिया। इस जुर्म में उसे पहली बार जेल जाना पड़ा।

इस अपराध के बाद फिर बबलू ने पीछे मुड़कर पुरानी जिंदगी में आने की बजाय जरायम की दुनिया में आगे बढ़ता चला गया। कई बड़े और चर्चित वारदातों को अंजाम देने की वजह से बबलू एक माफिया से कुख्यात माफिया डान बन गया। दाऊद से भी दुश्मनी हो जाने की वजह से वह विदेश में जगह-जगह भागता रहा। कस्टम अधिकारी की हत्या के बाद एक घटनाक्रम में उसे मारीशस से गिरफ्तार कर लिया गया। उसे भारत लाया गया। यहाँ साठ से अधिक आपराधिक मुकदमों में वांछित बबलू पर सीबीआई कोर्ट में मुकदमा चला। कोर्ट ने उसे साथियों समेत उम्र कैद की सजा सुनाई। इसके बाद बबलू समेत तीनों को 1999 में बरेली सेंट्रल जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में सजा काटने के लिए रखा गया। बरेली की सेंट्रल जेल प्रशासन की ओर से प्रदेश सरकार को बबलू समेत इन अपराधियों की रिहाई संबंधी प्रस्ताव भेजा गया है। भेजे गए प्रस्ताव में जेल में सजा के दौरान तीनों के अच्छे आचरण और जेल में 25 साल की सजा काटने को रिहाई का आधार बताया गया है। इस संबंध में बरेली सेंट्रल जेल के डीआईजी आरएन पांडे का मानना है कि चूंकि इन कैदियों को सजा का आदेश सीबीआई कोर्ट द्वारा दिया गया है। लिहाजा शासन के अनुमोदन के बाद केंद्र सरकार से भी आदेश पर अनुमोदन आवश्यक होगा। क्योंकि सीबीआई केंद्र सरकार के अधीन कार्यरत है। इसलिए उम्मीद तो ये की जा रही है कि सब कुछ सामान्य रहा तो कुछ दिनों में इनकी रिहाई हो जाए। लेकिन केंद्र सरकार में यदि कुछ औपचारिकताएं  हुई तो इनकी रिहाई में कुछ समय और लग सकता है।

 

 

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