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October 9, 2026
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अंबेडकर-अखिलेश पोस्टर के मायने

By Shakti Prakash Shrivastva on April 30, 2025
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                                                                              शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

सियासत एक ऐसा क्षेत्र है जिसके क्रियाकलापों का कोई निर्धारित मापदंड नहीं है। जिस नीति के अनुसरण से सियासी पार्टी का हित सधता है वही नीति उस पार्टी के लिए सर्वाधिक मुफीद मानी जाती है। उत्तर प्रदेश की विधानसभा में प्रमुख विपक्षी समाजवादी पार्टी इन दिनों सियासत में प्रयोगधर्मिता के लिए चर्चा में है। पार्टी के इसी प्रयोगधर्मी चरित्र के नाते इन दिनों लखनऊ स्थित पार्टी मुख्यालय के बाहर लगा होर्डिंग पर पोस्टर सुर्खियों में है। पोस्टर में दिख रहा अंबेडकर और अखिलेश का आधा-आधा चेहरा पार्टी की पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यकों यानि पीडीए के बाद के सियासी एजेंडे को समझने और समझाने के लिए काफी है।

हाल के दिनों में पार्टी मुख्यालय के बाहर लगे कई पोस्टर चर्चा में रहे। बिहार में जब नीतीश कुमार ने बगावत कर सत्ता कब्जाया था तो उन दिनों सपा + जेडीयू = एनडीए बाहर, लिखा पोस्टर सपा के सियासी सपने का मजबून बया कर रहा था। ऐसे ही इस बार लगे पोस्टर में दलित चिंतक डॉ. भीमराव अंबेडकर के साथ सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव का चेहरा होना यह बताने के लिए काफी है कि महाराष्ट्र में पार्टी के कद्दावर नेता अबू आसिम आजमी के मुद्दे पर एक तरह की रणनीतिक चुप्पी साध लेने वाला सपा नेतृत्व रामजी लाल सुमन पर इतना मुखर क्यों है?

याद करिए कि पिछले दिनों महाराष्ट्र के सपा अध्यक्ष अबू आसिम आजमी के औरंगजेब को लेकर दिए गए बयान पर बीजेपी ने जमकर सियासत की थी। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री  योगी आदित्यनाथ तक ने इस मसले पर कहा था कि उसे यूपी भेजो, सबक हम सिखा देंगे। लेकिन सपा जैसी तेवर पसंद पार्टी ने इस पूरे मामले को कोई खास तवज्जो नहीं दिया और यह मामला शांत हो गया। यह मामला सपा की भावी रणनीति को समझने के लिए काफी है। पार्टी ऐसे किसी मुद्दे को तूल नहीं देना चाहती है जिससे हिंदू-मुस्लिम के आधार पर चुनावी बंटवारा हो। क्योंकि सपा यह समझ चुकी है कि जब-जब ऐसा हुआ है तो सपा को चुनावों में इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है।

सांसद रामजीलाल सुमन मुद्दे पर करणी सेना का पार्टी की तरफ से मुखर विरोध पार्टी की सियासी नीति के तहत किया जा रहा है। सपा माने या न माने लेकिन प्रदेश में अच्छा काम कर रही अखिलेश सरकार की हार के पीछे आमजन के बीच पैदा हुई उस धारणा का बड़ा हाथ था कि तत्कालीन सपा सरकार खास जाति और धर्म के लोगों को तरजीह देती है। सपा अब इसका एहसास कर रही है। उसे लगता है कि करणी सेना के रूप में वैसा ही हथियार अब बीजेपी ने उसे मुहैया करा दिया है। करणी सेना के बहाने पार्टी जाति विशेष बनाम पीडीए के मुद्दे को तूल देने में लगी है। वो आमजन को यह समझाने में लगी है कि आखिर करणी सेना के लोगों को फंडिंग कहां से हो रही है।

पार्टी सांसद रामजी लाल सुमन उस जाटव बिरादरी से है जिनके लिए अंबेडकर भगवान हैं। रामजी के प्रकरण के माध्यम से पार्टी मायावती और बीएसपी से नाउम्मीद हो चुके वोट बैंक पर नजरे गड़ाए हुए है। पोस्टर में अखिलेश के साथ आधे हिस्से में अम्बेडकर की तस्वीर लगाकर पार्टी यह स्पष्ट कर रही है कि उसकी सियासत की चाल और उसकी दिशा क्या है।

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