Responsive Menu
Add more content here...
April 18, 2026
ब्रेकिंग न्यूज

Sign in

Sign up

BSP का सियासी रिस्टार्ट!

By Shakti Prakash Shrivastva on September 8, 2025
0 114 Views

                                                                             शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
उत्तर प्रदेश से ही उठकर अपने सियासी चरमोत्कर्ष को हासिल करने वाली बहुजन समाज पार्टी यानि BSP का आलम ये है कि आज वो अपनी सियासी अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। एक समय था उत्तर प्रदेश में कई बार उसने सरकार बनाई और मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और उत्तराखंड जैसे राज्यों की सियासत में उसकी प्रभावी उपस्थिति थी। लेकिन अफसोस कि आज उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य की विधानसभा में उसका मात्र एक विधायक है। उसकी जीत में भी माना जाता है कि पार्टी का कोई योगदान नहीं है। बल्कि उसकी जीत उसके नितांत व्यक्तिगत प्रभाव की जीत है। दशकों तक सत्ता के चकाचौंध से दूर रहने के बाद अब एक बार फिर पार्टी चाहती है कि उसकी खोई हुई जमीन वापस मिल जाए। इसके लिए पार्टी अब अपने सियासी सिद्धांतों से भी समझौता करने को तैयार है। इस क्रम में उन नेताओं को जिन्हे पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर पार्टी से निकाल दिया गया था उन्हे भी पार्टी में वापस लिया जा रहा है।
इस क्रम में पार्टी उत्तर प्रदेश में होने वाले पंचायत चुनाव को अपना टारगेट मान रही है। पार्टी ने पूरे दम-खमके साथ चुनाव में उतरने की तैयारी कर ली है।
क्योंकि पार्टी का मानना है कि पंचायत चुनाव के माध्यम से वो न केवल गांव-गांव में अपने मतदाताओं की थाती सहेज सकेगी बल्कि नए कैडर बनाने का प्रयास भी कर सकेगी। इसके लिए पार्टी की तरफ से कैडर कैंप का आयोजन किया जा रहा है। इन कैंपों में सैंकड़ों की तादात में लोगों को पार्टी की सदस्यता भी ग्रहण कराई जा रही है। पार्टी पदाधिकारियों के मुताबिक इसी पंचायत चुनाव की तैयारी का लाभ पार्टी 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव में लेने के मूड में है।
हालांकि पार्टी ने लोकसभा चुनाव के बाद ही कैडर कैंप के जरिए संगठन को मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी थी। पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी गांव-गांव जाकर लोगों को पार्टी की सदस्यता ग्रहण करा रहे हैं। साथ ही अन्य दलों के नेताओं को भी पार्टी में शामिल किया जा रहा है। मिल रही जानकारी की मुताबिक पार्टी बिहार चुनाव में भी अपना ध्यान लगाए हुए है। इसलिए असली सियासी गंभीरता बिहार चुनाव के बाद देखने को मिलेगी। इसके अलावा पार्टी सुप्रीमो मायावती ने दलितों के साथ होने वाली समस्याओं को लेकर भी गंभीर रुख अख्तियार किया है। इस क्रम में पार्टी सुप्रीमो मायावती ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल को पीड़ितों के घर जाकर सांत्वना देने और आर्थिक मदद करने का निर्देश दिया है। पार्टी का यह कदम दलित वोट बैंक को पार्टी के पक्ष में एकजुट करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
इसी सप्ताह पार्टी सुप्रीमो की अध्यक्षता में एक अहम बैठक होने वाली है जिसमें पंचायत चुनाव की तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। इस दौरान पंचायत चुनाव में अहम पदों पर प्रत्याशियों के चयन के बारे में भी निर्देश दिया जाएगा।

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *