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August 9, 2026
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यूपी के ‘रण’ में INDIA से प्रियंका

By Shakti Prakash Shrivastva on August 9, 2023
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शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव

                                  भारतीय लोकतंत्र के सबसे बड़े महोत्सव यानि लोकसभा चुनाव का बिगुल तो हालांकि अभी नही बजा है लेकिन पक्ष और विपक्ष की पार्टियों की चुनावी रणभेरी बज चुकी है। विपक्ष के 26 दलों का गठबंधन INDIA जहां सताधारी गठबंधन को चुनाव में अपदस्थ करने की जुगत कर रहा है तो वहीं सत्ताधारी 38 दलों का गठबंधन NDA भी अपनी चुनावी हरबा हथियार दुरुस्त करने में लग गया है। इस संदर्भ में सर्वाधिक लोकसभा सीटों वाले प्रदेश यूपी पर दोनों ही गठबंधनों का फोकस है। INDIA की तरफ से यूपी में अहम भूमिका में सपा है लेकिन गठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस की भी यहाँ दो सीटें ऐसी है जो उसके लिए प्रतिष्ठा की हैं। एक रायबरेली और दूसरी अमेठी। इनमे रायबरेली से कांग्रेस की पूर्व अध्यक्षा सोनिया गांधी सांसद हैं वही कई दशकों से कांग्रेस के कब्जे में रही अमेठी पिछले चुनाव में राहुल गांधी की हार के चलते कब्जे से मुक्त हो गई थी। यहाँ से बीजेपी की स्मृति ईरानी ने जीत दर्ज की थी। ऐसे में 2024 लोकसभा चुनाव में रायबरेली सीट से कांग्रेस नए उम्मीदवार की खोज में है। क्योंकि रायपुर अधिवेशन के बाद से ही सोनिया गांधी अपनी बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों के चलते इस बार चुनाव लड़ने की इच्छुक नहीं है। लिहाजा यहाँ से पिछले चुनाव में कांग्रेस के लिए बतौर प्रदेश प्रभारी रही और रायबरेली सीट के लिए अपनी माँ सोनिया गांधी का चुनावी प्रबंधन कर चुकी प्रियंका गांधी को उम्मीदवार बनाने की पार्टी की योजना है।

इस तरह बीच में एक लंबे अरसे से प्रदेश की सियासत से दूरी रखने वाली प्रियंका एक बार फिर यूपी की चुनावी रण में उतरने की तैयारी में है। हालांकि रायबरेली की बगल की अमेठी सीट से पिछला चुनाव लड़ चुके राहुल गांधी इस बार यहाँ से चुनाव लड़ने के इच्छुक नही है। उनकी जगह कांग्रेस गांधी परिवार के विश्वसनीय राज्यसभा सांसद और प्रदेश में खासा जमीनी पकड़ रखने वाले प्रमोद तिवारी को मैदान में उतारने की योजना बना रही है। प्रमोद तिवारी प्रतापगढ़ के रामपुर खास विधानसभा सीट से लगातार नौ बार विधायक रह चुके हैं। दो दशकों तक विधानमंडल दल के नेता रहे है व दो बार मंत्री भी रहे है। 1980 से लगातार जीत दर्ज करने वाले प्रमोद तिवारी मौजूदा वक्त में राज्यसभा में दल के उपनेता हैं। प्रमोद तिवारी को इतने महत्वपूर्ण सीट पर उम्मीदवार बनाने के पीछे पार्टी का वाजिब तर्क भी है। पार्टी के उन दिनों में जब दिग्गज नेता लगातार पार्टी छोड़ कर जा रहे थे तब भी प्रमोद ने कभी पार्टी और गांधी परिवार का साथ नहीं छोड़ा। इसलिए पार्टी के सर्वाधिक विश्वसनीय नेताओं में इनका नाम शुमार है। इन्ही की बिटिया आराधना मिश्र मोना इन दिनों पार्टी विधानमंडल दल की नेता हैं। अब यह तय हो चुका है कि केरल के जिस वायनाड़ सीट से राहुल गांधी सांसद है वो वही से इस बार ताल ठोकेंगे। रायबरेली सीट से सोनिया गांधी 2004 से लगातार सांसद है।

रायबरेली संसदीय सीट में पाँच विधानसभा सीटें रायबरेली, सरेनी, हरचंदपुर, ऊंचाहार और बछराँवा शामिल हैं। यहा से पहले सांसद फिरोज गांधी रहे जिन्होंने 1952 में पहला चुनाव लड़ा और 1960 तक यहाँ का प्रतिनिधित्व करते रहे। इसके बाद इंदिरा गांधी 1967 में यहाँ से सांसद बनी और दुबारा 1971 में भी चुनी गई। 1977 में राजनरायण से चुनाव हार गई लेकिन फिर 1980 में चुनाव जीत गई। फिर 2004 से लगातार सोनिया गांधी चुनाव जीत रही है। लेकिन पार्टी सूत्रों पर यकीन करें तो इस बार उनके स्थान पर प्रियंका गांधी चुनाव मैदान में उतर कर अपनी सियासी पारी की शुरुआत कर सकती है। चूंकि पिछले लोकसभा चुनाव में वो अपनी माँ सोनिया गांधी के चुनाव का सफल प्रबंधन कर चुकी हैं। इसलिए उनके लिए क्षेत्र और क्षेत्र के कार्यकर्ता अनजान नहीं है। लिहाजा उनके लिए रायबरेली से चुनाव लड़ने में कुछ अतिरिक्त दबाव भी नहीं रहेगा। क्योंकि इस बार वो कांग्रेस के साथ-साथ संयुक्त विपक्षी गठबंधन INDIA की भी उम्मीदवार होंगी।

 

 

 

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