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October 8, 2026
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चुनाव के लिए फ्रंटलाइनर बना संघ !

By Shakti Prakash Shrivastva on July 21, 2025
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                                                                                 शक्ति प्रकाश श्रीवास्तव
पिछले कुछ चुनावों में इस बात की चर्चा सुर्खियां बनी कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ यानि आरएसएस बीजेपी के लिए कुछ खास रुचि नहीं रख रहा है। इस बात में सच्चाई हो या न लेकिन जब चुनावी परिणाम अपेक्षित नहीं आए तो इसमें सच्चाई झलकने लगी। लेकिन अब स्थितियाँ पहले से बदली हुई नजर आ रही हैं। उत्तर प्रदेश में विधानसभा का चुनाव 2027 में होना है लेकिन संघ की तैयारी अभी से दिखने लगी है। उत्तर प्रदेश का पश्चिमाञ्चल जैसा क्षेत्र जो बीजेपी के सियासी लिहाज से बहुत परिणामदायी नही रहा है। संघ ने अपना गंभीर प्रयास वहीं से करने का मन बनाया है। इस इलाके में संघ ने अपने लगभग दर्जन भर से अधिक प्रचारकों के कार्यक्षेत्र में बदलाव किया है। इस बदलाव को इसी नजरिए से देखा जा रहा है।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के वरिष्ठों को जब लगा कि प्रदेश में जमीनी कार्यकर्ताओ में हताशा बढ़ रही है तो उन्होंने यह तय किया कि अब संघ को आक्रामक भूमिका में आगे आना होगा। इसी नीति के तहत संघ ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अपनी सियासी प्रयोगशाला बनाने का निर्णय लिया है। इसमें संघ ने जिलेवार प्रचारकों की नियुक्ति की है। इन प्रचारकों की यह ज़िम्मेदारी होगी कि वो अपने जिलों की संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करे। जिस तरह संघ ने पश्चिमी यूपी में बीजेपी की पकड़ को मजबूत करने के लिए जमीनी स्तर पर काम करने पर अपना फोकस रखा है। उसका फायदा आगामी चुनावों में बीजेपी को मिलना तय है।
विधानसभा चुनाव की रणनीति के तहत संघ ने अपने प्रचारकों को उन्हीं जिलों में तैनात किया है जहां सामाजिक और राजनीतिक समीकरण अपेक्षाकृत जटिल हैं। यहां प्रचारकों की भूमिका न केवल सांस्कृतिक और सामाजिक जागरूकता बढ़ाने की होगी, बल्कि भारतीय जनता पार्टी को आधारभूत स्तर पर मज़बूत करने में भी होगी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हालांकि जाटों और मुस्लिमों का बोलबाला है। और यहाँ राष्ट्रीय लोकदल का प्रभाव अपेक्षाकृत अधिक है। इसमें सुखद ये है कि राष्ट्रीय लोकदल प्रदेश और केंद्र की सत्ता पर काबिज राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन का हिस्सा है। बावजूद अब संघ किसी की वजह से कोई रिस्क नहीं लेना चाहता है। यही वजह है कि उसने जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ बढ़ाने की रणनीति शुरू कर दी है। संघ द्वारा नियुक्त किए गए प्रचारकों की ज़िम्मेदारी है कि वे स्थानीय स्तर पर सभी वर्गों में संपर्क बनाएं। लोगों को संघ के विचारों से जोड़ें। विभिन्न अभियान चलाकर संगठन की उपस्थिति को मजबूत करें। यह बदलाव न केवल राजनीतिक, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी संघ के विस्तार की योजना का हिस्सा है। पिछले दिनों संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भी यूपी के विभिन्न जिलों के दौरे के दौरान आरएसएस स्वयंसेवकों को जनता से जुड़कर रहने की सलाह दी थी।

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