Responsive Menu
Add more content here...
August 10, 2026
ब्रेकिंग न्यूज

Sign in

Sign up

  • Home
  • टॉप न्यूज
  • यूपी चुनाव : रोहनियाँ में पहली बार आमने-सामने होंगे माँ और बिटिया के ‘प्रत्याशी’

यूपी चुनाव : रोहनियाँ में पहली बार आमने-सामने होंगे माँ और बिटिया के ‘प्रत्याशी’

By Shakti Prakash Shrivastva on February 24, 2022
0 562 Views

वाराणसी, (संवाददाता)। पूर्वाञ्चल की राजनीति में अपना दल (सोनेलाल) और अपना दल (कमेरावादी) ने यह स्थापित कर दिया कि राजनीति में कुछ भी संभव है। जिस माँ ने पाल-पोस कर बड़ा किया उसी माँ से प्रतिद्वंदिता भी की जा सकती है। जी हाँ ऐसा ही है। स्व. सोनेलाल पटेल जाती विशेष के कद्दावर नेता के तौर उभर रहे थे। लेकिन उनके न रहने पर वाराणसी के  रोहनियां विधानसभा में हुए उपचुनाव परिणाम से ऐसी खाई खुदी जो वर्ष दर वर्ष भरने की बजाय और गहरी होती चली गयी। हुआ ये कि सोनेलाल पटेल कि बिटिया अनुप्रिया पटेल 2012 में रोहनियाँ से अपना दल के बैनर तले पहली बार विधायक चुनी गयी। 2014 के लोकसभा चुनाव में वो बीजेपी के सहयोग से मिर्जापुर से सांसद चुनी गयी। सांसद चुने जाने के बाद रिक्त हुई रोहनियाँ सीट के लिए उपचुनाव हुए। अपना दल की तरफ से अनुप्रिया की माँ कृष्ण पटेल उम्मीदवार बनी। इस चुनाव में कृष्णा दूसरे नंबर पर रही। इसी चुनाव परिणाम ने माँ-बेटी के बीच राजनीतिक महत्वाकांक्षा कि वो खाई खोद दी जो समय के साथ और गहरी होती जा रही है। कृष्णा को लगा कि अनुप्रिया अपने पति आशीष पटेल को लड़ाना चाहती थी। ऐसा न होने पर उन्होने भीतरघात कर उन्हे हरवाया। बाद में अनुप्रिया का कद सियासत में काफी बड़ा हो गया जबकि उनकी माँ और बड़ी बहन डॉ पल्लवी का प्रभाव पूर्ववत ही रहा। 2015 में माँ कृष्णा ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का हवाला देते हुए अनुप्रिया को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। 16 दिसंबर 2016 को अनुप्रिया ने अपना दल (सोनेलाल) और कृष्णा ने अपना दल (कमेरावादी) का गठन किया। माँ कृष्णा 2017 का विधानसभा चुनाव रोहनियाँ से लड़ी लेकिन इस बार भी उन्हे हार का मुंह देखना पड़ा। यहाँ से बीजेपी के सुरेन्द्र नारायण सिंह विधायक चुने गए। जबकि बगल की सेवापुरी विधानसभा क्षेत्र से अपना दल (सोनेलाल) के नील रत्न सिंह पटेल चुनाव जीते। मौजूदा चुनाव में अनुप्रिया पटेल के अपना दल (सोनेलाल) का गठबंधन 8 साल पुराने बीजेपी के साथ है वही अपना दल (कमेरावादी) सपा गठबंधन के साथ है। इस बार पहला मौका है जब रोहनियाँ विधानसभा सीट से दोनों ही दल यानि माँ और बेटी दोनों के ही प्रत्याशी आमने-सामने होंगे। चुनाव परिणाम तो 10 मार्च को आएगा ही लेकिन दोनों ही दल अपने-अपने उम्मीदवारों के लिए जी जान से लगे हुए है। यहा से माँ और बेटी दोनों ही चाहते है कि रोहनियाँ पर उनका कब्जा हो। कृष्णा पटेल इस बार स्वयं प्रतापगढ़ से सपा गठबंधन की उम्मीदवार है। लगातार हार की वजह से इस बार वो रोहनियाँ के साथ-साथ अपनी सीट पर भी फोकस किए हुए है। वो चाहती है कि इस बार किसी तरह जीत का स्वाद चखा जाये। राजनीति के जानकारों का मानना है कि यदि ये दोनों दल एक होते तो आज के संदर्भ में इनकी हसीयत अलग होती। हालांकि राजनीति में कुछ स्थायी नहीं होता। संभव है कि कल दोनों एक भी हो जाएँ।

 

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *